script​नॉर्मल डिलीवरी के लिए प्रेग्नेंसी में करें ये योगासन, देखें तस्वीरें |Do these yoga asanas during pregnancy for normal delivery | Patrika News
स्वास्थ्य

​नॉर्मल डिलीवरी के लिए प्रेग्नेंसी में करें ये योगासन, देखें तस्वीरें

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3 months ago
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मत्स्यासन: मत्स्यासन फेफड़ों की क्षमता में सुधार करता है, सीने-गर्दन की मांसपेशियों, कंधों, गर्दन की मांसपेशियों को तनाव मुक्त करता है। यह सांस लेने के सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद करता है। सांस की समस्याओं को दूर करता है। इसको नियमित रूप से दिनचर्या में शामिल करते हैं तो मन ज्यादा शांत हो जाएगा। बड़ी-बड़ी चुनौतियों का भी आप सहजता के साथ सामना कर पाएंगे। इसके साथ ही पेट की चर्बी कम करता, महिला रोगों में भी उपयोगी है।

हालांकि ये सभी आसान आप चिकित्सक की देखरेख में करें।

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मलासन: अगर महिला तीसरी तिमाही में मलासन का अभ्यास करती है तो नॉर्मल डिलीवरी में मदद मिलती है। साथ ही, डिलीवरी के दौरान दर्द भी अपेक्षाकृत कम होता है। इस आसन का नियमित अभ्यास करने से पेल्विक फ्लोर की मसल्स को मजबूती मिलती हैं, जिससे महिला की डिलीवरी अधिक आसान होती है। यह पीठ के निचले हिस्से को भी खींचता है जिससे असुविधा से राहत मिलती है। चित्र की मुद्रा में बैठकर अभ्यास कर सकती हैं।

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भद्रासन: यह मुद्रा जांघों के अंदरूनी हिस्से और कमर की मांसपेशियों को फैलाती है, जिससे श्रोणि क्षेत्र में लचीलेपन को बढ़ावा मिलता है। यह दिमाग को शांत करता है, वेरिकोज वेन्स की समस्या से बचाता और पाचन क्रिया को भी दुरुस्त करता है। इसे करने के लिए पैरों को पूरी तरह फैलाकर चटाई पर बैठें। इसके बाद पैरों को धीरे से मोड़ते हुए शरीर के पास लेकर आएं और दोनों तलवों को आपस में मिला दें। ये पैरों से नमस्ते की स्थिति बन जाएगी। अब सीधे बैठें और अपने हाथों को घुटनों या टखनों पर रखें। कुछ देर इसी मुद्रा में रहें। फिर पैरों को सामान्य स्थिति में ले आएं। इस क्रम को 4 से 5 बार दोहराएं।

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पर्यंकासन: पर्यंक यानी फैलाव। पर्यंकासन में जांघ से लेकर सिर तक की मांसपेशियों में खिंचाव होता है और ये अंग स्वस्थ बने रहते हैं। यह आसन धीरे-धीरे कूल्हों, जांघों और पीठ के निचले हिस्से को फैलाता है। पेट पर अनावश्यक दबाव से बचाता और मांसपेशियों को आराम देने में मदद करता है। इसके अभ्यास के लिए पीठ के बल लेट जाएं। धीरे से एक घुटने को मोड़ें, पैर को अपनी तरफ लाएं। खिंचाव को और बढ़ाने के लिए स्वाभाविक रूप से सांस लेते हुए थोड़ी देर के लिए स्थिति में बने रहें। मुड़े हुए पैर को छोड़ें और विपरीत पैर से इन चरणों को दोहराएं।

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