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स्वास्थ्य

गजक में खड़िया मिट्टी की मिलावट, किडनी को खतरा, ऐसे जांचें

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2 months ago
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सर्दी बढ़ने के साथ ही तिल से बने उत्पाद गजक रेवड़ी की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है। इस मौसम में ये बेहद स्वास्थ्य वर्धक भी माने जाते हैं, लेकिन बाजार में मिलावट के बढ़ते मामलों के चलते ये उल्टा स्वास्थ्य के लिए खतरा भी बन सकते हैं। गजक में सेलम खड़िया से लेकर घास—फूंस तक की मिलावट की शिकायतें सामने आ रही हैं, इतना ही नहीं इनमें घटिया तिल और गुड़ के प्रयोग किए जाने की भी शिकायत है।

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जहां स्वास्थ्य के नुकसान पहुंचाने वाले मिलावटी तिल उत्पाद गंभीर चिंता का विषय है, वहीं खराब और पुराने तिल व सड़े हुए रंगीन गुड़ की मिलावट इसे और भी अधिक नुकसानदेह बना सकती है। गजक को आकर्षक और चमकीली दिखाने के लिए इसमें रंग और दूसरे कैमिकल मिलाने की भी आशंका बनी रहती है।

 

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साबुत तिल से बने उत्पाद जिनमें तिल के लड्डू, रेवड़ी और तिल पट्टी शामिल हैं उनमें मिलावट की संभावना कम होती है। लेकिन गजक, कुटे तिल से बनी सामग्री और मूंग फली व ड्रायफ्रूट को गुड के साथ मिलाकर बनाए जाने वाले उत्पादों में मिलावट की संभावना अधिक है। ऐसे में लोगों को इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है।

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सेलम खड़िया वजन बढ़ाने के लिए डाली जाती है, लेकिन उसमें बहुत अधिक मात्रा में कैल्शियम होता है। खड़िया एक तरह की मिट्टी होती है, जिसकी ज्यादा मात्रा सेहत के नुकसान दायक होती है। मिट्टी किडनी की सेहत बिगाड़ती है। गजक के छोटे टुकड़े को पानी में डालकर देख सकते हैं कि उसमें मिट्टी है या नहीं। मिट्टी होगी पानी में नीचे जम जाएगी।

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बेहतर गुणवत्ता और नामी ब्रांड वाली दुकानों से ही गजक और तिल उत्पाद खरीदना बेहतर रहता है। सड़क किनारे ठेलों पर बेची जाने वाली गजक खरीदते समय पूरी जांच परख करनी चाहिए। गजक खाने के बाद उल्टी, मिचली की शिकायत रहती है तो तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए।

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