पेट व आंत की मांसपेशी कमजोर होने से हर्निया की दिक्कत

हाइटस हर्निया सबसे आम है जो ५० की उम्र के बाद के लोगों में ज्यादा होता है। इसकी गंभीर स्थिति भोजन नली के कैंसर की आशंका को भी बढ़ा देती है।

By: विकास गुप्ता

Published: 22 Aug 2017, 09:25 PM IST

शरीर में पेट के अंगों के आसपास खाली जगह (एब्डॉमिनल केविटी) होती है। जो एक पतली झिल्ली (पेरिटोनियम) से ढक़ी होती है। कई बार इस झिल्ली, मांसपेशियों व डायफ्राम के कमजोर होने से ये दूर-दूर होने लगती हैं। यहां गैप बनने से अंगों का कुछ भाग पेट पर गांठ के रूप में उभरता है। इसे हर्निया कहते हैं। यह कई प्रकार का होता है। जानें कारण व इलाज-

हाइटस हर्निया सबसे आम है जो ५० की उम्र के बाद के लोगों में ज्यादा होता है। इसकी गंभीर स्थिति भोजन नली के कैंसर की आशंका को भी बढ़ा देती है।

हाइटस हर्निया

इसमें भोजन नली सिकुड़ जाती है व अमाशय खिंचकर सीने के डायफ्राम से ऊपर आ जाता है। फूड पाइप व अमाशय के बीच वॉल्व एक्शन कम होने से एसिड व खाना पेट से फूड पाइप में चला जाता है जिससे भोजन नली में अल्सर बनता है। इससे सीने में जलन होती है जो लेटने पर बढ़ जाती है। गरिष्ठ चीजें खाने से तकलीफ बढ़ती है। बार-बार अल्सर बनना फूड पाइप को सिकोडक़र मांसपेशियों कमजोर करता है। भोजन निगलने में दिक्कत होती ।

कारण : इसके कारण अज्ञात हैं लेकिन सीने में या आसपास में किसी प्रकार की चोट से मांसपेशियों या कोशिकाओं में हुई क्षति से यह हो सकता है। पेट या आसपास की मांसपेशियों पर खांसने, उल्टी करने, भारी वजन उठाने या आंतों की मूवमेंट से होने वाले दबाव से भी ऐसा हो सकता है। अधिक उम्र, वजन व धूम्रपान भी वजह हैं।

एब्डोमिनल वॉल हर्निया

अन्बाइलिकल (नाभि पर), एपिगेस्ट्रिक (नाभि के ऊपर व सीने के नीचे), हाइपोगेस्ट्रिक (नाभि के नीचे), इस्पिगेलियन (पेट के दाएं-बाएं) व इंसीजनल हर्निया (पूर्व में हुई किसी सर्जरी वाले हिस्से से अंग का बाहर निकलना) आदि पेट से जुड़े हर्निया हैं। कई बार आंत कमजोर मांसपेशी से बाहर आकर मुड़ जाती है। इसमें रक्त प्रवाह बंद हो जाता है और गेंगरीन होने से यह फट सकती है। मरीज की जान का जोखिम बढ़ जाता है। अवस्था को स्ट्रेंगुलेशन ऑफ हर्निया कहते हैं।
लक्षण : पेट पर उभार, सूजन, खांसने व खिंचाव से उभार बढऩा, वजन उठाने और गेंगरीन होने पर तेज दर्द भी होता है।
कारण : आनुवांशिकता, फाइब्रॉइड, मोटापा, पेट में पानी भरने व कब्ज, शरीर में पौष्टिक तत्त्वों का अभाव, धूम्रपान आदि।

इंग्यूनल हर्निया
यह खासकर जांघ के जोड़ में होने वाला हर्निया है। इसके मामले पुरुषों में ज्यादा पाए जाते हैं। इसमें जोड़ की मांसपेशियों के कमजोर होने से अंग बाहर आकर अंडकोष में खिसक जाता है। महिलाओं में केवल गर्भावस्था के दौरान पेट का आकार बढऩे और मांसपेशियों पर प्रेशर आने से जांघ के जोड़ में ऐसा होता है।
लक्षण : प्रभावित अंग में सूजन, भारीपन, जलन और हल्का दर्द प्रमुख है। खांसने, हंसने, झुकने व किसी प्रकार के खिंचाव से यह दर्द बढ़ भी जाता है।
कारण : गर्भस्थ शिशु का इंग्यूनल कैनाल बंद होना चाहिए लेकिन यदि शिशु में यह कैनाल खुला हो तो समस्या होती है। जननांगों की मांसपेशियों में कमजोरी।

जांच
फिजिकल चेकअप, बेरियम डायजेस्टिव ट्रैक्ट एक्स-रे और एंडोस्कोपी करने की सलाह दी जाती है। कई मामलों में अल्ट्रासाउंड की भी मदद लेते हैं।

इलाज
लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह देते हैं। इसमें एसिड बनाने वाली चीजों से परहेज कराते हैं। दवाओं से सूजन दूर कर अंदरुनी मांसपेशियों को मजबूत करते हैं।

सर्जरी
हर्निया का आकार बढऩे व स्थिति गंभीर होने पर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी ही विकल्प है। जिसमें क्षतिग्रस्त मांसपेशी को ठीक करते हैं।
न्यू ट्रीटमेंट
हाइटस हर्निया के इलाज में नई फंडोप्लिकेशन सर्जरी करते हैं। इसमें प्रभावित हिस्से के आसपास की मांसपेशी को एक जगह पर स्टिच कर एसिड को फूड पाइप में जाने से रोकते हैं।

विकास गुप्ता
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