टीबी से बच्चों की मौत भारत में सबसे अधिक

लैंसेट के एक अध्ययन में कहा गया कि भारत में टीबी यानी तपेदिक से सबसे ज्यादा मौतें होती है। 

By: Ravi Gupta

Published: 22 Aug 2017, 11:42 AM IST

नई दिल्ली। भारत में टीबी यानी तपेदिक से सबसे ज्यादा मौतें होती है। लैंसेट के एक अध्ययन में कहा गया है कि देश में साल 2015 में टीबी से 55,000 से अधिक बच्चों की मौत हुई। साथ ही साल 2015 में दुनिया भर में 15 साल की उम्र के 10 लाख से अधिक बच्चों को टीबी था। बच्चों में टीबी का पता लगाना इसलिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि टीबी की संवेदनशील जांच होती है व इसके अलावा टीबी का कोई तय लक्षण नहीं है। अभी तक तीन हफ्ते से ज्यादा खांसी को टीबी के लक्षणों में एक माना जाता है। लेकिन टीबी का कोई तय लक्षण नहीं है। हालांकि सरकार सरकारी अस्पतालों में टीबी के लिए हर मुमकिन कोशिश करती आई है। लेकिन अशिक्षा व अधूरी जानकारी की वजह से लोग अपने बच्चों को अस्पताल नहीं ले जाते हैं।

2015 में टीबी से हुई 2,39,000 बच्चों की मौत
हालांकि कम उम्र के बच्चों में इस बीमारी के गंभीर रूप में होने की आशंका ज्यादा होती है, हालांकि पांच साल से कम उम्र के बच्चों की इस बीमारी के कारण मौत की दर का कोई अनुमानित आंकड़ा नहीं हैं। ब्रिटेन के शेफिल्ड विश्वविद्यालय के पेटे डोड ने कहा कि उनके अनुमान के अनुसार 2015 में 217 देशों में 15 साल की उम्र तक 2,39,000 बच्चों की मौत टीबी की वजह से हुई थी। जिनमें से 80 फीसदी बच्चे पांच साल से कम उम्र के थे। इस आयु के बच्चों की मौत की 10 प्रमुख वजहों में टीबी की बीमारी थी। जिन बच्चों की मौत हुई उनमें 96 फीसदी से अधिक बच्चों का इस बीमारी का उपचार नहीं हुआ था। टीबी से सबसे ज्यादा मौत भारत, नाइजीरिया, चीन, इंडोनेशिया और कांगो देश में हुई। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह सभी देश वर्तमान डब्ल्यूएचओ की सूची में टॉप 30 हैं, जो कि टीबी से ग्रस्त हैं। वहीं टीबी घटना 400 प्रति 100,000 प्रति वर्ष की दर रही है। डोड ने कहा कि टीबी से ग्रस्त बच्चों को वह उपचार न मिल पाने के कारण उनकी मौत हो जाती है।

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