मां की सेहत से जुड़ी इन बातों का रखें ध्यान

उम्र के अनुसार बदलता शरीर, आराम-व्यायाम-खानपान सही हो

By: Hemant Pandey

Published: 10 May 2020, 05:07 PM IST

मां घर में हर किसी का खयाल रखती है। लेकिन वह अपना ध्यान ठीक से नहीं रख पाती है। यह बात घरेलू और कामकाजी दोनों महिलाओं पर लागू होता है। 20-30 वर्ष की उम्र में शरीर की कोशिकाएं मजबूत होती हैं तो कोई समस्या नहीं होती है लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है। परेशानी सामने आने लगती है। मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है। इस बात यह 10 मई को है। मां को हर उम्र में हैल्दी डाइट के साथ आराम आदि की जरूरत होती है। जानते हैं क्या है मां का हैल्थ मंत्र।
उम्र के हिसाब से समस्या
20-35 वर्ष की उम्र में आमतौर पर लड़कियों की शादी हो जाती है। वे काम पर ज्यादा ध्यान देती हैं। उनमें एनीमिया, माहवारी की अनियमितता, संक्रामक रोग, रिप्रोडक्टिव ऑर्गन इंफेक्शन और अनचाहे गर्भ के मामले अधिक देखे जाते हैं। इनकी अनदेखी न करें।
35-45 वर्ष की उम्र में महिलाएं बच्चे और परिवार में इतनी व्यस्त रहती हैं कि अपनी सेहत के लिए समय नहीं निकाल पाती हैं। बच्चों के कॅरियर व खानपान का अधिक तनाव रहता है। इससे मानसिक समस्याएं होती हैं। इसी उम्र में हॉर्मोन असंतुलन से महिला का वजन तेजी से बढ़ता या घटता है। बाल झडऩे के साथ जोड़ों में दर्द और हड्डियां कमजोर होती हैं। इससे कमजोरी, काम में मन न लगना और हर वक्त थकान रहती है।
45 वर्ष से अधिक से उम्र की महिलाओं में कई तरह की समस्या होती है। मेनोपॉज होने से हॉर्मोन असंतुलन से हार्ट डिजीज, ब्लड प्रेशर, कैंसर और मानसिक रोग आदि का खतरा रहता है। लेकिन शुरू से ही अच्छा खानपान, सही दिनचर्या, नियमित जांच आदि पर ध्यान दिया जाए तो इनसे बचाव संभव है।
खून की कमी महिलाओं में गंभीर समस्या है। इसलिए आयरन रिच डाइट जैसे चुकंदर, पालक, गाजर और दूसरी मौसमी फल-सब्जियां के साथ डेयरी प्रोडक्ट अधिक लेना चाहिए जबकि मेनोपॉज शुरू होने के बाद उनमें विटामिन डी और कैल्शियम की कमी होने लगती है। रोज एक लीटर दूध या डेयरी प्रोडक्ट लें। विटामिन्स वाली चीजें अधिक लें। रोटी-चावल कम और फल-सब्जियां भी ज्यादा मात्रा में लेनी चाहिए।
हैल्दी डाइट लें
रुटीन टेस्ट करवाते रहें
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में बीमारियां कम उम्र में होती हैं। इसलिए 30 वर्ष के बाद से ही कुछ जांचें जैसे मेमोग्राम, एचपीवी और पैपस्मीयर जांच डॉक्टरी सलाह पर करवानी चाहिए। 40 वर्ष के बाद से थायरॉइड, शुगर, बीपी, कैल्शियम की रेगुलर जांच से बीमारी की आशंका घटती है। महिलाओं में कई बीमारियां हैं जिन्हें समय रहते जांचों से पहचाना जा सकता है। कुछ टीके भी आते हैं जो बीमारियों से बचाते हैं।
ृआराम करें, तनाव न लें
महिलाएं घर में सबसे पहले उठती और सबसे बाद में सोती हैं। लेकिन पर्याप्त नींद नहीं लेतीं। नींद की कमी से ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्मोन संबंधी बीमारियों की आशंका बढ़ती है। पारिवारिक जिम्मेदारियों से वे ज्यादा तनाव में रहती हैं। तनाव से जल्दी बुढ़ापे की व अन्य समस्याएं होती हैं।
नियमित योग व्यायाम करें
स्वस्थ रहने के लिए रोज 40-50 मिनट व्यायाम जरूरी है। लेकिन अधिकतर महिलाएं व्यायाम नहीं करती हैं। घर में भी योग-व्यायाम कर सकती हैं। महिलाओं को वृक्षासन, गोमुखासन, सर्वांगासन और भ्रामरी प्राणायाम करना चाहिए। इससे तन-मन दोनों स्वस्थ रहता है। थकान भी घटती है। इसलिए देखें कि मां ये जरूर करें।
मां को रोज समय दें
मां से सब उम्मीद करते हैं कि उनका काम वह समय पर कर दें। लेकिन क्या आप भी मां के लिए रोजाना थोड़ा समय निकालते हैं? कोशिश करें कि उनके पास बैठकर बात करें। इससे वे मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगी। उनकी समस्या का भी आपको पहले पता चल सकेगा। इससे समय पर इलाज आदि हो सकेगा। खुशनुमा माहौल से मां की इम्युनिटी बढ़ेगी। वे हैल्दी रहेंगी।
45-50 वर्ष में कैंसर का खतरा
एक शोध के अनुसार भारतीय महिलाओं में 45-50 वर्ष में कैंसर देखने को मिला रहा है। इसमें कारणों में कुपोषण, मोटापा, अधिक फैटी फूड खाना, देरी से शादी, स्तनपान की कमी, तनाव, सेहत पर ध्यान न देना है। करीब 10 फीसदी महिलाओं में जेनेटिक कारणों से कैंसर हो रहा है।

Hemant Pandey
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