पंचकर्म से असाध्य रोगों का इलाज संभव, सोनू निगम भी हो चुके हैं ठीक

अभी हाल ही में अरविन्द केजरीवाल अपनी खांसी का इलाज कराने केरल गए थे। अब भारत के बाकी राज्यों में भी इसका पद्धति का प्रचार बढ़ रहा है ।


लखनऊ. आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा पद्धति से असाध्य रोगों को ठीक किया जा सकता है। कुछ दिनों पहले बॉलीवुड के मशहूर सिंगर सोनू निगम भी पंचकर्म चिकित्सा पद्धति की तारीफ़ कर चुके हैं। इस चिकित्सा पद्धति के माध्यम से पांच कर्मों (वमन, विरेचन, वस्ति, रक्तमोक्षण, नस्य) से इलाज किया जाता है। ये कहना है बलरामपुर अस्पताल के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अरुण निरंजन का।

उन्होंने बताया कि पंचकर्म चिकित्सा पद्धति केरल में बहुत मशहूर है। अभी हाल ही में अरविन्द केजरीवाल अपनी खांसी का इलाज कराने केरल गए थे। अब भारत के बाकी राज्यों में भी इस पद्धति का प्रचार बढ़ रहा है।

डॉ. अरुण निरंजन ने बताया कि पंचकर्म एक प्रकार की थैरेपी है। आयुर्वेद में शोधन एवं शमन दो प्रकार की चिकित्सा होती है। जिन रोगों से मुक्ति औषधियों द्वारा संभव नहीं होती, उन रोगों के कारक दोषों को शरीर से बाहर कर देने की पद्घति शोधन कहलाती है। पंचकर्म विधि से शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त बनाया जाता है। इससे शरीर की सभी शिराओं की सफाई हो जाती है और शरीर के सभी सिस्टम ठीक से काम करने लगते हैं। पंचकर्म के जरिए रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है। पंचकर्म में तीन तरह से शरीर की शुद्धि की जाती है।
 
उन्होंने बताया कि इस चिकित्सा पद्धति में मसाज, स्टीम बाथ, कटि-स्नान, फुट मसाज, फेशियल एंड फेस पैक और वेट लॉस पैकेज का प्रयोग करते हैं। इस प्रक्रिया का उपयोग मुख्यत: वात, पित्त, कफ त्रिदोषों को संतुलन में लाने के लिए किया जाता है।

डॉ. निरंजन ने बताया कि मानसिक रोगों व तनाव का शिकार हो चुके लोगों में पंचकर्म सिद्धांत बेहद फायदेमंद होता है। इस पद्धति में हर्बल तेलों और पाउडरों से मसाज द्वारा प्राकृतिक वातावरण में व्यक्ति का उपचार किया जाता है। इसके अलावा कैंसर, घुटने के दर्द, स्पेंडोलाइटिस, मोटापा, सियाटिका, हाई ब्लड प्रेशर, सर्वाइकल कैंसर जैसे असाध्य रोग भी इस चिकित्सा पद्धति से ठीक हो चुके हैं। 
 
जानिये पांच कर्मों के बारे में
वमन- कफ प्रधान रोगों को वमन करने वाली औषधियां देकर ठीक कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को वमन कहते हैं।

विरेचन- पित्त दोष विरेचन औषधियों के द्वारा विरेचन करवा कर ठीक किया जाता है।

नस्य- इस चिकित्सा में नाक के छिद्रों से औषधि अंदर डालकर गले और सिर के दोषों को दूर किया जाता है।

रक्तमोक्षण- इस प्रक्रिया में खराब रक्त को बाहर निकाला जाता है। यही रक्त शरीर में बीमारियों का कारण होता है। शिराओं को काटकर या कनखजूरे या लीच चिपका कर अशुद्ध रक्त बाहर निकालने की कोशिश की जाती है।

वस्ति- वात दोष को बाहर करने के लिए ये विधि अपनाई जाती है। इसमें गुदा के द्वारा वस्तियंत्र से औषधि को अंदर प्रवेश कराकर बाहर निकाला जाता है।

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Hariom Dwivedi
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