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Raisen जिले के मंडीदीप में 365 दिन में कर दिया 619 गर्भवतियों को रैफर

एक वर्ष में करीब 1300 डिलीवरी हुई। जिनमें से 619 गर्भवती महिलाओं को भोपाल के सरकारी अस्पतालों में रेफर किया गया।

रायसेनJun 13, 2024 / 07:29 pm

Ashish Pathak

woman health

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रायसेन। जिले के मंडीदीप नगर में सिविल अस्पताल तो शुरू कर दिया गया, लेकिन 6 साल बीतने के बाद भी जरूरी सुविधाएं अब तक उपलब्ध नहीं कराई गईं। नतीजतन गंभीर बीमारियों का इलाज तो दूर, सीजर डिलीवरी भी नहीं हो पा रही हैं। इस बात को अस्पताल की संख्या को देखकर समझा जा सकता है। ये बताते हैं कि एक वर्ष में करीब 1300 डिलीवरी हुई। जिनमें से 619 गर्भवती महिलाओं को भोपाल के सरकारी अस्पतालों में रेफर किया गया। यह स्थिति बनने की वजह स्त्री और निश्चेतना विशेषज्ञों की कमी होना है। 
अस्पताल में सीजर ऑपरेशन की जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन वे आबादी के मान से नाकाफी साबित हो रही हैं। ऐसे में स्त्री एवं निश्चेतना विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते जहां गरीब परिवारों की महिलाओं को भोपाल आवागमन करने में परेशानी के साथ किराए में ज्यादा पैसा भी खर्च करने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं नाम मात्र का यह सिविल अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। इसके बाद भी जिम्मेदारों ने अब तक भी यहां आवश्यक सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध कराने की जरूरत नहीं समझी।
औसतन 3.5 डिलीवरी प्रतिदिन 

बता दें कि इस अस्पताल से नगर सहित आसपास के 62 गांवों की आबादी जुड़ी है। यहां हर दिन औसतन 3.5 डिलीवरी होती हैं। यह काम एक स्त्री रोग तथा एक निश्चेतना विशेषज्ञ के जिम्मे है, यह महिला डॉक्टर भी 55 साल से ऊपर की हैं। इसके अलावा वे स्वास्थ्य कारणों से भी अस्पताल में अधिक काम और समय नहीं दे पाती हैं। ऐसे में गरीब जरूरतमंदों को महंगे प्राइवेट नर्सिंग होम का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ता है। जबकि आबादी के मान से यहां चार स्त्री रोग और दो निश्चेतना विशेषज्ञों की जरूरत है।
खर्च हो रही प्रोत्साहन की राशि 

वार्ड 15 निवासी राजू सिंह बताते हैं कि शासन द्वारा प्रसव के बाद 1400 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। यदि मेरी पत्नी की डिलीवरी यहीं हो जाती तो पत्नी को मिली प्रोत्साहन राशि किराए में खर्च नहीं होती। उन्होंने कहा कि नगर के अस्पताल में ही सीजर की सुविधा न मिलने से प्रसूताओं की परेशानी बढ़ गई है।
साल दर साल बढ़ रहे रेफर केस 

सिविल अस्पताल में वर्ष 2021-22 में 480 गर्भवती महिलाओं को रेफर किया गया था। वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा बढकऱ 565 हो गया। जबकि वर्ष 2023-24 में इनकी संख्या 619 तक पहुंच गई। वहीं यदि सीजर ऑपरेशन की बात करें तो वर्ष 2022 में 30 अक्टूबर तक ओटी रूम ही नहीं था। इसके बाद नवंबर 2022 से 31 मार्च तक 2024 तक 138 सीजर ऑपरेशन किए गए।
इनका कहना है

नार्मल गर्भवती महिलाओं को रेफर का मामला गंभीर है। ऐसा नहीं होना चाहिए। इसे में दिखवाता हूं। 

डॉ. दिनेश खत्री, सीएचएमओ रायसेन।

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