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सेहत के लिए टीका अब भी कहीं-कहीं फीका

बच्चे हों या गर्भवती महिलाएं, टीकाकरण को लेकर अब सरकारी के बजाय निजी अस्पताल की राह पकड़ रहे हैं।

नागौरJun 26, 2024 / 09:16 pm

Sandeep Pandey

नागौर ग्रामीण, जायल, मेड़ता, भैरून्दा ब्लॉक में वर्ष 2023 के मुकाबले आई कमी

ग्रामीण क्षेत्र में अब भी भ्रांतियों के चक्कर में नहीं लगवा रहीं गर्भवती महिलाएं टीके

नागौर. बच्चे हों या गर्भवती महिलाएं, टीकाकरण को लेकर अब सरकारी के बजाय निजी अस्पताल की राह पकड़ रहे हैं। शायद यही वजह है कि वर्ष 2023 के मुकाबले वर्ष 2024 में नागौर ग्रामीण ही नहीं जायल, मेड़ता के साथ भैरून्दा तक में टीकाकरण कम हुआ। पूरे जिले की बात करें तो टारगेट लगभग पूरा हो गया पर टीकाकरण को लेकर अब भी सरकारी स्तर पर और प्रयास करने की आवश्यकता जताई जा रही है।सूत्रों के अनुसार संक्रमण रोगों की रोकथाम के लिए टीकाकरण सबसे अधिक प्रभावी और सस्ता तरीका माना जाता है। टीकाकरण रोगों से बचाता है, टीकाकरण एक प्रकार की दवाई है जो सामान्यतया इंजेक्शन के माध्यम से लगाई जाती है। नवजात से लेकर गर्भवती महिलाओं को स्वस्थ रखने के लिए बरसों से अनिवार्य के साथ ऐच्छिक टीके सरकारी अस्पतालों में मुफ्त लगाए जाते हैं। समय-समय पर शिविर/अभियान अथवा हर गुरुवार को टीके लगाने का चलन है पर यहां कुछ गांव में अब भी टीके को लेकर कई भ्रांतियां हैं, जिससे कई नवजात शिशुओं को टीका नहीं लगवाया जाता हैं। ऐसे में कई बच्चे बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। यह भी सामने आया कि टीकाकरण के लिए अब निजी अस्पताल की ओर भी रुख करने लगे हैं।
चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ श्रवण खोजा का कहना है कि सरकारी स्तर पर भले ही वैक्सीनेशन को लेकर कवायद हो रही हो पर ग्रामीण स्तर पर अब भी लोग इससे बच रहे हैं। अनावश्यक अफवाह अथवा गलत-सलत सूचनाओं पर यकीन करके टीकाकरण नहीं करवाते। आशा सहयोगिनी के जरिए प्रयास तो हो रहे हैं पर सरकारी आंकड़ों से इतर भी लोग हैं जो अब भी टीकाकरण से दूर हैं। टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता हैं, ताकि नवजात शिशु को कोई रोग ना लगे। टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता हैं, ताकि नवजात शिशु को कोई रोग ना लगे।
आंकड़ों पर नजर, यहां घटा टीकारण

वर्ष 2023 व 2024 के आंकड़ों पर नजर डालें तो सर्वाधिक नागौर ग्रामीण ब्लॉक में 4.80 फीसदी टीकाकरण कम हुए। वर्ष 2023 में लक्ष्य 6253 के मुकाबले 5942 टीके लगे, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या 5642 रह गई। इसी तरह जायल ब्लॉक में 3.62 फीसदी कम रहा, वर्ष 2023 में 6292 के मुकाबले 5238 था जो वर्ष 2023 में 5010 रहा। मेड़ता ब्लॉक में टीकाकरण वर्ष 2024 में 2.31 फीसदी घटा, यहां वर्ष 2023 के लक्ष्य 6052 के मुकाबले 5329 था जो वर्ष 2024 में 5189 रह गया। इसी तरह भैरूंदा ब्लॉक में करीब एक फीसदी टीकाकरण घटा। वर्ष 2023 में 2650 संख्या थी जो वर्ष 2024 में 2621 रह गई। वैसे पूरे जिले में करीब एक फीसदी टीकाकरण पिछले साल के मुकाबले कम माना गया।
इनका कहना

टीकाकरण को और व्यवस्थित करने के लिए अब सॉफ्टवेयर के साथ रीयल डाटा पर फोकस किया जा रहा है। रियल टाइम रिपोर्टिंग के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही जागरूकता बढ़ाने का काम किया जा रहा है।-डॉ महेश वर्मा, जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी, नागौर।०००००००००००००००००००००
गर्भवती महिलाओं के लिए टीकाकरण जरूरी है, ताकि गर्भ में पलने वाले बच्चे के लिए कवच का काम करें। पहले की तुलना में महिलाएं अधिक जागरूक हुई हैं। ग्रामीण स्तर पर तरह-तरह की भ्रांतियां संभवतया कुछ को टीकाकरण से रोकती हैं।
-डॉ दीपिका व्यास, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ,, जेएलएन अस्पताल, नागौर।

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