एक दिन में 15 लोगों को काट सकता है जीका का एडीज मच्छर

एक दिन में 15 लोगों को काट सकता है जीका का एडीज मच्छर

Hemant Pandey | Publish: Oct, 13 2018 06:32:51 PM (IST) स्वास्थ्य

प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन के एक्सपर्ट की माने तो मादा एडीज को अण्डों की ग्रोथ के लिए खून की जरूरत होती है इसके लिए लोगों को काटती है। मादा एडीज मच्छर एक दिन में 15-20 लोगों को काट सकती है।

जीका, डेंगू और चिकनगुनिया मादा एडीज मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी है। प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन के एक्सपर्ट की माने तो मादा एडीज को अण्डों की ग्रोथ के लिए खून की जरूरत होती है इसके लिए लोगों को काटती है। मादा एडीज मच्छर एक दिन में 15-20 लोगों को काट सकती है। यह दिन में एक्टिव रहती हैं और खून चूसती है। वहीं मलेरिया फैलाने वाली मादा एनाफिलीज मच्छर रात में एक्टिव रहती है और एक दिन में 10 लोगों तक को काटती है। एनाफिलीज मच्छर गंदे और साफ पानी में दोनों जगह पनपते हैं जबकि एडीज मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। अगर संक्रमित मादा मच्छर अंडे देती हैं तो उनके अंडे भी संक्रमित होते हैं। इससे संक्रमित मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है।
कैसे फैलता है जीका वायरस
यह डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की तरह मच्छरों से फैलता है। यह एडीज मच्छर से फैलता है जो दिन के वक्त काटता है। संक्रमित मच्छर के काटने से यह बीमारी मनुष्यों में फैलती है। इसके साथ ही मच्छरों के अलावा असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने, संक्रमित व्यक्ति के खून-लार से भी फैल सकता है। एक बार इंफेक्शन होने के बाद इसका असर छह माह तक रहता है। इस दौरान मरीज ब्लड या अर्गन डोनेट नहीं कर सकता है। ऐसा करने से दूसरे को भी इसका इंफेक्शन हो सकता है।
वायरल जैसे जीका वायरस के लक्षण
जीका वायरस से संक्रमित व्यक्ति को हल्का बुखार रहता है। इसके साथ ही थकान, आंखों का लाल होना, जोड़ और सिर दर्द के साथ शरीर पर लाल चकत्ते निकलते हैं। इसमें मरीज का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है। इसके लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं है। जीका वायरस की पहचान के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट करते हैं।
जीका वायरस से खतरा क्यों
गर्भवती महिला को होने पर गर्भस्थ शिशु को इसका खतरा रहता है। गर्भ में पल रहे शिशु को भी जीका बुखार हो सकता है। इसकी वजह से बच्चे के सिर का विकास रूक सकता है। जन्म के समय बच्चे का सिर सामान्य से छोटा होता है। दिमाग व लिवर संबंधित दूसरी बीमारियां हो सकती हैं। बच्चे में ऑटिज़्म, सुनने में दिक्तत तो बड़ों में जीका होने पर उनकी इम्युनिटी कम होने लगती है।

जीका वायरस का इतिहास
जीका वायरस का संबंध युगांडा (अफ्रीका) के जीका जंगल से है। जीका जंगल के कारण ही इसका नाम जीका वायरस रखा गय। पहली बार इस वायरस की पुष्टि 1947 में अफ्रीकी लंगूर में हुई थी। लंगूरों को हुए बुखार की जांच के दौरान ये वायरस पाए गए थे। 1954 में नाइजीरिया के एक व्यक्ति में यह वायरस मिला था। इसके बाद से अफ्रीका से एशिया और अन्य स्थानों तक जीका वायरस पहुंच गया।

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