मरीजों को राम भरोसे छोड़ हड़ताल पर गए डाक्टर

अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हरियाणा के डाक्टर आज सभी संवेदनाओं को दरकिनार करते हुए मरीजों को राम भरोसे छोड़ हड़ताल पर चले गए।

By: शंकर शर्मा

Published: 11 Sep 2017, 10:35 PM IST

चंडीगढ़। अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हरियाणा के डाक्टर आज सभी संवेदनाओं को दरकिनार करते हुए मरीजों को राम भरोसे छोड़ हड़ताल पर चले गए। हालांकि प्रदेश सरकार ने एस्मा लागू करके डाक्टरों की हड़ताल को रोकने का प्रयास भी किया लेकिन सरकार के यह प्रयास विफल हो गए। डाक्टरों की हड़ताल के कारण ओपीडी में आने वाले रोगियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।


हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। इस बीच चिकित्सकों ने रविवार को ऐलान किया कि वह सोमवार को दो घंटे के लिए हड़ताल पर रहेंगे। राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में डॉक्टरों ने आज सुबह दो घंटे सांकेतिक हड़ताल की। 8 से 10 बजे तक डॉक्टरों ने पेन-डाउन हड़ताल की और इस दौरान ओपीडी पूरी तरह से ठप रही। हालांकि डॉक्टरों ने अमरजेंसी सॢवस को बाधित नहीं किया और आपातकालीन सेवाओं में डॉक्टर रुटीन में काम करते रहे।


इस बीच डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए सरकार ने मंगलवार को उन्हें वार्ता के लिए बुलाया लिया है। हरियाणा मेडिकल सॢवसेज एसोसिएशन (एचएमएसए) के पदाधिकारियों का शिष्टमंडल मंगलवार को 12 बजे स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव अमित झा के साथ बैठक करेगा। इस बैठक में अगर डॉक्टरों की मांगों पर सहमति नहीं बनती तो बुधवार से डॉक्टरों की हड़ताल फिर शुरू होगी। वर्ष 2011 के बाद यह पहला मौका है जब राज्य के डॉक्टरों ने हड़ताल करने का कदम उठाया है। पिछले वर्ष भी हड़ताल का ऐलान तो हुआ था लेकिन सरकार से वार्ता के बाद इसे टाल दिया गया।


करीब एक वर्ष में भी सरकार ने डॉक्टरों की मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो उन्होंने हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया। एचएसएमए प्रदेशाध्यक्ष डॉ.जसबीर ङ्क्षसह परमार व महासचिव डॉ.राजेश श्योकंद के अनुसार उनकी मांगों पर सरकार पहले भी कार्रवाई का भरोसा दे चुकी है लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। डॉक्टरों का पीजी कोटा खत्म होने की वजह से सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। सरकार ने इसके लिए नीति तो बनाई लेकिन उसमें कई कमियां छोड़ दी, जिसकी वजह से इस नीति को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया।


सुप्रीम कोर्ट व मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के फैसले के डॉक्टरों का इन-सॢवस पीजी कोटा खत्म कर दिया गया। फिर सरकार ने रिमोट व जोखिम भरे इलाकों में सेवा देने वाले डाक्टरों के हर साल 10 अंक तय करने का निर्णय लिया। अधिकतम 3 वर्षों तक यानी 30 अंक डॉक्टरों को मिल सकते थे। पिछले वर्ष सरकार ने नये सिरे से इस नीति को अधिसूचित करने को कहा था लेकिन आज तक नहीं हुई। इस वजह से पिछले वर्ष निट परीक्षा में राज्य के डॉक्टरों को मौका नहीं मिला। अगले महीने फिर से परीक्षा है और इसी वजह से डॉक्टर हड़ताल पर उतरे। नये डॉक्टर भी राज्य में इसीलिए ज्वाइन नहीं कर रहे हैं क्योंकि उन्हें पीजी में दाखिला नहीं मिलता।

क्या हैं डॉक्टरों की मुख्य मांगें
सरकार ने विशेषज्ञों की कमी को देखते हुए उन्हें विशेष पैकेज देने का फैसला किया था। डिप्लोमा होल्डर को 20 हजार और डिग्री होल्डर को 30 हजार रुपए मासिक अतिरिक्त देने पर सहमति बनी थी। लेकिन आज तक यह फैसला लागू नहीं किया।
-हरियाणा में डॉक्टरों को केंद्र की तर्ज पर 3 की जगह 4 एसीपी (5, 9, 13 व 20 वर्ष पर) देने का वादा किया था। इसकी मंजूरी भी मिल चुकी है लेकिन फाइल अभी तक नहीं निकली।
-एमबीबीएस कैडर के 90 प्रतिशत डॉक्टर एसएमओ पर रिटायर होते हैं। डॉक्टरों के साथ बातचीत में एडिशनल एसएमओ का नया पद बनाने पर सहमति बनी थी लेकिन सरकार ने इसकी अधिसूचना भी जारी नहीं की।

शंकर शर्मा
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