हरियाणा सरकार तृतीय व चतुर्थ श्रेणी में खत्म करेगी साक्षात्कार

हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के सरकारी विभागों में दर्जा तीन व चार के लिए होने वाली भर्तियों में साक्षात्कार को समाप्त किया जाएगा

By: शंकर शर्मा

Published: 11 Sep 2017, 10:29 PM IST

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के सरकारी विभागों में दर्जा तीन व चार के लिए होने वाली भर्तियों में साक्षात्कार को समाप्त किया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा यह निर्णय केंद्र सरकार के निर्देशों पर लिया जाएगा। इस निर्णय को अमल में लाने के लिए प्रदेश सरकार पूरी तरह से सहमत नहीं है। इसके बावजूद सरकार को यह निर्णय मजबूरी में लेना पड़ रहा है।


बुधवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया जा सकता है। इससे पूर्व दो बार मंत्रीसमूह की साप्ताहिक बैठकों में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श हो चुका है। मंत्रिमंडल में निकायों की प्रॉपर्टी पर बरसों से बैठे लोगों को मालिकाना हक दिए जाने के फैसले पर भी स्वीकृति मिल सकती है।


सूत्रों के अनुसार तृतीय व चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में साक्षात्कार खत्म करने से पहले सरकार ने उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश की नीतियों का भी अध्ययन किया है। बेशक, इंटरव्यू खत्म होगा लेकिन इसमें भी सरकार कोई ऐसी गुंजाइश रखेगी ताकि शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के विद्याॢथयों के अंतर को मिटाया जा सके।


ग्रामीण परिवारों की प्रॉपर्टी, परिवारों की सालाना आय व खेती वाली जमीन के भी नंबर तय होने की उम्मीद है। प्रदेश के कई मंत्रियों की दलील है कि अगर इंटरव्यू पूरी तरह से खत्म कर दिया गया तो शहरों के बच्चों के मुकाबले गांवों के बच्चे नौकरियों में पिछड़ जाएंगे। शहरों के कान्वेंट स्कूलों में पढऩे वाले विद्याॢथयों का नंबरों में भी ग्रामीण व सरकारी स्कूलों के बच्चे मुकाबला नहीं कर सकते। माना जा रहा है कि इसका कोई न कोई फार्मूला कैबिनेट की बैठक में निकाला जा सकता है।


केंद्र सरकार द्वारा तृतीय व चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में साक्षात्कार खत्म करने के बाद उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश व पंजाब सहित कई राज्यों में इसे लागू किया है। बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में नगर निगमों, नगर परिषदों व नगर पालिकाओं में निकायों की प्रॉपर्टी पर लम्बे समय से बैठे लोगों को मालिकाना हक दिया जा सकता है। नगर परिषदों व नगर पालिकाओं में पहले से ही यह कानून है कि कलैक्टर रेट पर कब्जाधारियों के नाम प्रॉपर्टी की जा सकती है।


निगमों में भी कानून तो है लेकिन यह कलैक्टर रेट की बजाय मार्केट रेट पर है। माना जा रहा है कि निगमों के एक्ट में संशोधन बारे कैबिनेट में फैसला हो सकता है। इसके बाद 20 वर्ष या इससे भी अधिक समय से निकायों की प्रॉपर्टी पर बैठे लोगों को जमीन का मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ होगा।

शंकर शर्मा
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