पंजाब ने पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोकने में जताई असमर्थता

Shankar Sharma

Publish: May, 17 2018 09:20:10 PM (IST)

Hisar, Haryana, India
पंजाब ने पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोकने में जताई असमर्थता

पंजाब सरकार ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है

चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने पंजाब से पाकिस्तान जा रहे रावी-व्यास के पानी को रोकने की मांग की थी। पंजाब ने इस मुद्दे पर हाथ खड़े कर दिए हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने विदेश जाने से पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को एक पत्र लिखकर पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोकने की मांग उठाई थी।


पत्रकारों से बातचीत में मनोहरलाल खट्टर ने कहा कि पाकिस्तान जा रहे पानी को रोकने को लेकर हरियाणा और पंजाब में कहीं कोई टकराव जैसे हालात नहीं हैैं, लेकिन इस पानी को राज्यों तथा जनहित में रोका जाना चाहिए। पंजाब अगर यह मानता है कि बांध बनाना संभव नहीं है तो हरियाणा पाकिस्तान जा रहे पानी को रोकने के लिए केंद्रीय जल प्राधिकरण (सेंट्रल वाटर ट्रिब्यूनल) के पास दस्तक देने की संभावनाएं तलाशेगा।


खट्टर ने यह पानी रोककर बीबीएमबी के सहयोग से पंजाब में कहीं बांध बनवाकर इस पानी को रोककर संबंधित राज्यों में बंटवारा करने का सुझाव दिया था। पाकिस्तान जा रहे इस पानी को रोकने की परिकल्पना केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने रोहतक दौरे के दौरान भी की थी। पाकिस्तान जा रहे पानी को रोकने की बात 2008 से चल रही है, लेकिन नितिन गडकरी के रूख के बाद हरियाणा गंभीर हुआ है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का आग्रह कैप्टन अमरिंदर सिंह से किया था। कैप्टन अमरिंदर ने आरंभ में तो मुख्यमंत्री का कोई पत्र नहीं मिलने की बात कही थी, लेकिन कुछ दिन बाद पत्र मिलने की पुष्टि करते हुए हरियाणा को कह दिया था कि उनका सुझाव अमल में लाना संभव नहीं है, लेकिन हरियाणा को अपने यहां से पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोकने की पहल करनी चाहिए।

पाकिस्तान जा रहे पानी को अगर बांध के जरिये रोकने की योजना सफल रही तो देश के हिस्से का 1112 क्यूसिक यानी 5 लाख 60 हजार एकड़ फुट पानी बचेगा। बंटवारे के समय भारत को सतलुज, रावी और ब्यास नदियां मिली। वहीं पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियां मिलीं। इसके बाद भी भारतीय नदियों का पानी पाकिस्तान जा रहा है।

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