कर्ज में डूबे हजारों किसानों का संकट गहराया

पहले से ही सरकारी अनदेखी की मार झेल रहे हरियाणा के किसानों का संकट और गहरा हो गया है।

By: शंकर शर्मा

Published: 24 May 2018, 10:31 PM IST

चंडीगढ़। पहले से ही सरकारी अनदेखी की मार झेल रहे हरियाणा के किसानों का संकट और गहरा हो गया है। विभिन्न बैंकों ने कर्ज में डूबे किसानों पर कर्ज की अदायगी न किए जाने के चलते उनकी जमीन नीलाम करने के नोटिस जारी कर दिए हैं। यह नोटिस जारी होने के बाद प्रदेश सरकार जहां चुप है वहीं किसान संगठनों ने फिर से सरकार के विरूद्ध लामबंद होना शुरू कर दिया है। प्रदेश में अब तक करीब साढे पांच हजार किसानों को नोटिस जारी हो चुके हैं। यह प्रक्रिया अभी भी जारी है।


हरियाणा में इस समय करीब 15 लाख किसान हैं। इनमें से अधिकतर किसान निजी तथा सहकारी बैंकों के अलावा साहूकार के कर्ज की मार तले दबे हुए हैं। सहकारी बैंकों का करीब पौने सात हजार करोड़ रुपये का कर्ज इस समय किसानों की तरफ खड़ा है। किसानों को जमीन गिरवी रखकर कर्ज दिया जाता है। प्रदेश में किसानों की हालत यह है कि वह अपना पुराना कर्ज चुकता करने के लिए नया कर्ज लेने को मजबूर हो रहे हैं।


प्रदेश सरकार के तमाम दावों के बावजूद बैंकों द्वारा कर्ज में डूबे किसानों को उनकी जमीन नीलाम करने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं। प्रदेश के जींद, रोहतक, भिवानी, दादरी व झज्जर आदि समेत कई जिलों में किसानों को यह नोटिस जारी किए जाने का समाचार है। बताया जाता है कि विभिन्न बैंकों द्वारा अब तक करीब साढे पांच हजार किसानों को जमीन नीलाम करने के लिए नोटिस जारी किए जा चुके हैं। नोटिस जारी किए जाने की यह प्रक्रिया लगातार जारी है। जिन गावों में किसानों द्वारा यह नोटिस स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं बैंक प्रबंधक नोटिस उनके घर के बाहर चस्पा कर रहे हैं। बैंकों द्वारा जारी किए गए नोटिस किसानों के स्वाभिमान का मुद्दा बन गए हैं।

अकेले जींद जिला में अब तक करीब डेढ सौ किसानों को नीलामी के नोटिस जारी किए जाने का समाचार है। नोटिस में कर्ज की राशि, नीलामी की तारीख तथा जमीन का पूरा विवरण दिया गया है। ऐसी स्थिति हर जिले में बन रही है। कुर्की के नोटिस मिलने से किसानों में खासा आक्रोश है।

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी को भी किसानों ने नोटिस मिलने की जानकारी दी है। राजनीतिक दलों और भाकियू नेताओं के बीच जल्द ही कोई बैठक हो सकती है, जिसमें किसानों के हित में बड़े आंदोलन का ऐलान किया जा सकता है।


उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों हरियाणा सरकार को उन किसानों की सूची देने के लिए कहा था, जिनकी तरफ बैंकों और दूसरे वित्तीय संस्थानों का बकाया है।

हरियाणा सरकार ने यह कहते हुए सूची देने से इनकार कर दिया था कि इससे किसानों की बदनामी होगी। अब वही सरकार डिफाल्टर किसानों की जमीन की नीलामी के नोटिस दे रही है। इन नोटिसों को गांवों में सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा किया जा रहा है। अखबारों में डिफाल्टर किसानों की सूची विज्ञापन के जरिए प्रकाशित करवा रही है।

वसूली नहीं होने से लगातार घाटे में जा रहे हैं बैंक
हरियाणा में कर्ज के मुद्दे पर एक तरफ जहां किसानों का तर्क है वहीं बैंक अपने घाटे का बड़ा कारण किसानों तथा अन्य लोगों द्वारा समय पर अदायगी नहीं किए जाने को बड़ा कारण मान रहे हैं। हरियाणा स्टेट को-आपरेटिव अपेक्स बैंक लिमिटेड (हरको) दो साल पहले मात्र 23 करोड़ के लाभ में था। इससे पहले बैंक की वित्तीय स्थिति लगातार खराब चल रही थी।


पिछले साल 2017 के वित्तीय लाभ के बारे में बैंक ने अभी तक कोई डिटेल जारी नहीं की है। बैंक की शेयर कैपिटल 138 करोड़ रुपये है। उसका अपना फंड 755 करोड़ का है। बैंक में कुल जमा 3926 करोड़ रुपये हैं, जबकि उधार की राशि 3934 करोड़ रुपये है। बैंक ने पिछले साल 2803 करोड़ के कर्ज दिए हैं। वसूली के अभाव में कर्ज की राशि बढक़र 6725 करोड़ रुपये हो गई है। बैंक की कुल वर्किंग कैपिटल 8751 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है।

एक्ट का उलंघन कर रहे हैं वित्तीय संस्थान
बैंकों द्वारा नीलामी के लिए जारी किए गए नोटिस को किसानों द्वारा सरफासी एक्ट का उल्लंघन करार दिया जा रहा है। किसानों के अनुसार सरफासी एक्ट 1993, जिसे साल 2006 में संशोधित किया गया था। जिसमें यह कहा गया है कि एक लाख रूपए से 9 लाख रूपए तक के कर्जदार किसान को कोई बैंक या दूसरी वित्तीय संस्था उसकी जमीन की नीलामी करने के नोटिस नहीं दे सकती। बैंकों द्वारा इस एक्ट को धत्ता बताकर सरासर कानून तोड़ा जा रहा है।

किसानों को नोटिस:विपक्ष को सरकार के खिलाफ मिला मुद्दा
हरियाणा में बैंकों द्वारा किसानों को जमीन नीलामी के लिए नोटिस जारी किए जाने के बाद जहां किसान संगठन अपनी रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं वहीं एक बार फिर से विपक्ष को भी सरकार के विरूद्ध बड़ा मुद्दा मिल गया है। किसान पहले से ही राजनीति का केंद्र बिंदु रहे हैं।

किसानों के साथ झूठे वादे करके सत्ता में आई भाजपा सरकार अब किसानों के हितों का हनन करने पर उतर आई है। प्रदेश में पिछले करीब एक सप्ताह से किसानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं लेकिन सरकार इस मामले में चुप है। जिससे यह साफ हो रहा है कि यह नोटिस सरकार के इशारे पर ही जारी किए जा रहे हैं। इंडियन नेशनल लोकदल किसानों के हित में अपनी आवाज बुलंद करेगा। अभय चौटाला, नेता प्रतिपक्ष, हरियाणा।

किसानों के पास जमीन के अलावा कुछ नहीं है। पूर्व सरकार के कार्यकाल में कभी भी किसानों को इस तरह से अपमानित नहीं किया गया है। वर्तमान सरकार नोटिस के माध्यम से किसानों को अपमानित करने का काम कर रही है। प्रदेश के किसानों के विरूद्ध होने वाली इस कार्रवाई को बिना देरी के रोकना जरूरी है। अन्यथा किसान तबाही की तरफ बढ़ेंगे। कांग्रेस पार्टी सरकार की इस कार्रवाई को विरोध करती है। किसानों की जमीन को अगर कुर्क किया तो कांग्रेस पार्टी इसका विरोध करेगी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा , पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा।

किसानों को न तो फसल के उचित दाम मिल रहे और न ही उन्हें भावांतर भरपाई योजना का लाभ दिया जा रहा है। बैंकों की ओर से कुर्की के नोटिस भेजकर किसानों को प्रताडि़त अलग से किया जा रहा है। किसानों को नोटिस जारी होने से सरकार का किसान विरोधी चेहरा सामने आ गया है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में किसान,कर्मचारी, व्यापारी हर वर्ग के लोग अपनी मांगों को पूरी करवाने के लिए सडक़ों पर हैं। यह सरकार हरियाणा के इतिहास में अब तक की सबसे कमजोर सरकार है। नवीन जयहिंद अध्यक्ष, आप, हरियाणा।

शंकर शर्मा
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