...अब गांवों में ही बनेंगे शहरों जैसे घर

हरियाणा के गांव होंगे शहरों जैसे। पंचायतों की खाली जमीनों पर विकसित होंगी कालोनियां।
ग्रामीण कालोनियों को मिलेंगी सैक्टरों की सुविधाएं।
पानीपत व हिसार जिलों में शुरू होगा पायलट प्रोजैक्ट।

(चंडीगढ़). शहर की चमक-धमक को देखकर एक ना एक दिन इंसान गांवों से पलायन कर जाता है और फिर शहर की भागमभाग का ही हिस्सा बन जाता है, जो कुछ शहर में है वैसा ही गांवों में उपलब्ध हो तो फिर कोई गांव ऐसा नहीं होगा, जो शहर से कम हो। फिर देखादेखी के फेर में कोई भी शहर की ओर पलायन नहीं करेगा। ऐसे में ना सिर्फ गांवों का महत्व कम होगा, बल्कि शहरों पर भी जनसंख्या का दबाव नहीं होगा।
हरियाणा के गावों का शहरों की तर्ज पर विकास करने के ऐलान तो सरकारों द्वारा किए जाते रहे हैं लेकिन शहरों की तर्ज पर गांवों में आवासीय कालोनियां बसाने की दिशा में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। गावों की खाली एवं बंजर जमीनों पर यह आवासीय कालोनियां विकसित की जाएंगी। पायलट प्रोजैक्ट के रूप में हिसार व पानीपत जिलों में इसकी शुरूआत किए जाने की योजना है।
विभागीय अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक के बाद यह तय किया गया है कि बड़ी आबादी वाले अथवा कस्बों का रूप धारण करते जा रहे गांवों में आवासीय कालोनियां विकसित की जाएं। गांवों में बनने वाली कालोनियों में वहां मकान अलाट करने में पहले से रहने वाले लोगों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। छोटे मकान बीपीएल के लिए और थोड़ा बड़े व महंगे मकान साधन संपन्न लोगों के लिए होंगे। जिस तरह से हाउसिंग बोर्ड और एचएसवीपी मिलकर शहरों में मकान बनाते हैैं, उसी तरह से इन दोनों विभागों की पालिसी का अध्ययन कर एचआरडीए के अधीन पंचायत विभाग यह मकान बनाएगा। इन प्रस्तावित कालोनियों में शहरों की तरह तमाम सुविधाएं होंगी। ग्राम पंचायत को प्रस्ताव पारित कर यह जमीन एचआरडीए को देनी होगी, जिसका पैसा ग्राम पंचायत के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। यह जमीन कलक्टर रेट पर खरीदी जाएगी।
ऐसा होगा ग्रामीण कालोनियों का स्वरूप
एक बड़े गांव में एक ही कालोनी विकसित होगी।
कालोनी का आकार 25 से 30 एकड़ का होगा।
एक एकड़ जमीन में 2800 गज जगह पर निर्माण किया जा सकेगा।
पहले चरण में सिंगल स्टोरी के मकान बनेंगे।
दूसरे चरण में डबल स्टोरी या उससे ऊपर मकान भी बनाए जाएंगे।

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satyendra porwal
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