खुद को 'भगवान' मानता है ये दौलतमंद सिंगर, शुरू किया खुद का 'धर्म', जुड़े हजारों लोग

By: पवन राणा
| Updated: 30 Apr 2019, 04:32 PM IST
खुद को 'भगवान' मानता है ये दौलतमंद सिंगर, शुरू किया खुद का 'धर्म', जुड़े हजारों लोग
New religion

वीडियोज में लोग नाचते-गाते और जश्न मनाते देखे जा सकते हैं। ना कोई परम्परा का आडंबर और ना ही अनुशासन की 'चाबुक'। उपदेश देने की परम्परा को भी शामिल नहीं किया गया है।

मुंबई। पॉपुलैरिटी के साथ-साथ अगर दौलत भी आ जाए तो दिमाग में कुछ अलग करने की 'सनक' चढ़ जाना आश्चर्यजनक नहीं है। इसके साथ ही अगर लोगों का सपोर्ट मिल जाए तो हौंसले सातवें आसमान पर होते हैं। ऐसा ही कुछ एक फेमस सिंगर के साथ हो रहा है। दुनियाभर में मशहूर इस दौलतमंद सिंगर ने खुद का ही 'धर्मस्थल' शुरू कर दिया है।

 

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यहां बात विश्व प्रसिद्ध सिंगर कान्ये वेस्ट की हो रही है। कान्ये वेस्ट को उनकी पत्नी किम कर्दाशियां के कारण भी जाना जाता है। कान्ये के बारे में इतना ही कहना काफी है कि जब-जब वह अपने कपड़ों या स्टाइल में कोई बदलाव लाते हैं तो फैंस उसे फॉलो करना शुरू कर देते हैं। मीडिया में सुर्खियां भी मिलती हैं। कान्ये के परिवार की छोटी से छोटी बातें भी चर्चा का विषय बन जाती हैं।

 

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ऐसी शौहरत के मालिक कान्ये ने अब नया काम किया है। रिपोर्ट्स की मानें तो कान्ये ने अब खुद का 'धर्मस्थल' शुरू कर दिया है। 'संडे सर्विस' के नाम से शुरू इस धर्मस्थल को बनाने के पीछे वजह है युवा ईसाईयों की चर्च में कम होती संख्या। साथ ही कान्ये का मानना है कि लोग परम्परागत प्रार्थना के तरीकों से बोर हो गए हैं। उनकी प्रार्थना सभा लोगों को आर्ट के जरिए सीधे जीसस 'भगवान' से जुड़ने का तरीका है। ये वे लोग हैं जो एक-दूसरे को प्यार करते हैं और परवाह करते हैं।

 

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कान्ये की अपनी तरह की नई 'संडे सर्विस' की फोटोज और वीडियोज सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं। यहां करीब 50 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए। वीडियोज में लोग नाचते-गाते और जश्न मनाते देखे जा सकते हैं। ना कोई परम्परा का आडंबर और ना ही अनुशासन की 'चाबुक'। उपदेश देने की परम्परा को भी शामिल नहीं किया गया है। हालांकि बहुत से लोग कान्ये के इस प्रयोग से नाखुश हैं। उनका कहना है कि कान्ये पहले ही खुद को भगवान बता चुके हैं। अब मनमाने तरीके से चर्च छोड़ खुद का तरीका अपनाना 'नया पंथ' शुरू करने जैसा है।

 

दूसरी ओर लोगों का यह भी कहना है कि चर्च की परम्परागत चीजों से युवा खुद को जोड़ नहीं पाते हैं। साथ ही चर्च का रूख सामाजिक मुद्दों पर पसंद नहीं किया जाता है।

जो भी हो, कान्ये ने अपनी तरह की 'संडे सर्विस' शुरू करके एक नई बहस को जन्म दे दिया है। लोग जो भी बोलें, कान्ये इस दिशा में बहुत आगे बढ़ चुके हैं।