झुकी सरकारः मोदी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत

 विपक्ष के दबाव के आगे गुजरात सरकार झुकती नजर आई है। गुजरात सरकार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री (अब प्रधानमंत्री) नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिृत्त जज एमबी शाह की अध्यक्षता में गठित आयोग की रिपोर्ट शुक्रवार को विधानसभा के पटल पर रख दिया। 

गांधीनगर. विपक्ष के दबाव के आगे गुजरात सरकार झुकती नजर आई है। गुजरात सरकार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री (अब प्रधानमंत्री) नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिृत्त जज एमबी शाह की अध्यक्षता में गठित आयोग की रिपोर्ट शुक्रवार को विधानसभा के पटल पर रख दिया। उपमुख्यमंत्री नीतिन पटेल ने 22 खंड और 5000 से अधिक पन्नों वाली इस रिपोर्ट को सदन में रखते हुए कहा कि अब यह सार्वजनिक संपत्ति हो गई है और कोई भी विधायक इसे सदन की लाइब्रेरी से लेकर पढ़ सकता है। सरकार ने पहले भी कहा था कि आयोग ने सभी आरोपों को नकारते हुए मोदी और उनके सरकार को क्लिन चिट दे दी थी। गौरतलब है कि इसे सदन के पटल पर रखने की मांग को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने जबरदस्त हंगामा किया था। इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को भी कांग्रेस का प्रदर्शन जारी था। उसका आरोप था कि सरकार मोदी के शासन में हुए भ्रष्टाचार को छुपा रही है। 

विपक्ष ने मोदी के भ्रष्टाचार को छुपाने का लगाया था आरोप
कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष शंकर सह वाघेला ने बार-बार आरोप लगाया था कि सरकार अगर सदन में रिपोर्ट नहीं रखती तो इसका मतलब यह होगा कि वह मोदी के भ्रष्टाचार को छुपाना चाहती है। उधर कांग्रेस के विधायक शुक्रवार को सदन में रिपोर्ट पेश करने की मांग तथा गुरुवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह विधायक अमित शाह की ओर से सदन में कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों को लेकर माफी की मांग वाले बैनर पहन कर आए थे। उन्हें बाद में दिन भर के लिए सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया।  गौरतलब है कि 20 फरवरी को शुरू हुए बजट सत्र का आज आखिरी दिन है। जब इस रिपोर्ट को पेश किया गया तो कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष शंकर सह वाघेला सदन में मौजूद नहीं थे। दरअसल, आलाकमान के बुलावे पर प्रदेश अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी के साथ वाघेला दिल्ली में हैं।

मोदी के खिलाफ था उद्योगपतियों को अनुचित लाभ देने का आरोप
कांगेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन मोढ़वाडिया और विधानसभा में तब के नेता प्रतिपक्ष शक्ति सिंह गोहिल की ओर से राष्ट्रपति से गुजरात की तत्कालीन मोदी सरकार के खिलाफ टाटा समूह के नैनो संयंत्र के लिए 33000 करोड़ का गैरकानूनी लाभ देने, अडानी समूह को उसके मुंद्रा बंदरगाह सह विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र क्षेत्र, एस्सार और कुछ अन्य औद्योगिक समूह एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं निवर्तमान शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू से कथित तौर पर जुड़े एक समूह को औने-पौने कीमत पर जमीन के आंवटन कर भ्रष्टाचार करने की गुहार लगाते हुए इसके जांच की मांग की गई थी। 

मोदी ने ही गठित की थी जांच आयोग
विपक्ष के आरोप बाद मोदी ने खुद ही न्यायमूर्ति शाह की अध्यक्षता में इन मामलों की जांच के लिए आयोग का गठन किया था। इसके लिए 16 अगस्त 2011 को अधिसूचना जारी की गई थी। इसने कुल 15 में से नौ आरोपों की जांच में सरकार को क्लिन चिट देते हुए सितंबर 2012 में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी। मजेदार बात यह है कि मूल आरोपी दोनों कांग्रेसी नेता आयोग की सुनवाई के दौरान स्वयं इसके सामने पेश ही नहीं हुए थे। 


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