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कश्मीर में बरतनी होगी अतिरिक्त सतर्कता

इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि घुसपैठ कर हमारी सीमा में घुस आए आतंकियों के स्थानीय मददगार भी कम नहीं हैं। हमारे जवानों की शहादत भी इसीलिए हो जाती है क्योंकि आतंकियों के इन मददगारों की कमर अभी पूरी तरह टूटी नहीं है। अमरनाथ यात्रा और संभावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

जयपुरJun 12, 2024 / 09:30 pm

Gyan Chand Patni

जम्मू-कश्मीर में बीते तीन दिन में एक के बाद एक आतंकी घटनाओं ने सीमा पार से हो रही घुसपैठ के खतरों की ओर फिर से आगाह किया है। आगामी दिनों में विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच ये आतंकी हमले बताते हैं कि आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर में आम लोगों में खौफ पैदा करने में जुटे हैं। डोडा में आतंककारियों ने सेना की चौकी पर हमला कर दिया। यह कठुआ में आतंकियों की गोलाबारी में एक जने की मौत और दो अन्य के घायल होने के कुछ घंटों बाद ही हुआ। वहीं तीन दिन पहले ही आतंककारियों ने तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस पर कायराना हमला किया था।
करीब छह साल से लोकतांत्रिक सरकार का इंतजार कर रहे कश्मीर में लोकसभा चुनावों के दौरान मतदाताओं ने जिस तरह का उत्साह दिखाया, उससे भी आतंकी संगठन और उनके आका बौखलाए हुए हैं। इसीलिए आतंकी सोची-समझी साजिश के तहत वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। इन घटनाओं में सीमा पार की शह तो जगजाहिर है ही। ये घटनाएं यह भी बता रही है कि आतंकी साजिश रचकर घात लगाकर हमले करने लगे हैं। हमले भी इस इरादे से किए जाते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग हताहत हों जिससे डर का माहौल बने। तीर्थ यात्रियों की बस पर हमला ऐसी ही साजिश का हिस्सा थी। यह भी कहा जा सकता है कि अपनी कायराना करतूतों के माध्यम से ये आतंकी यह भी जताने का विफल प्रयास करने में जुटे हैं कि कश्मीर में अभी अमन-चैन लौटा नहीं है। जबकि हकीकत यह है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में पर्यटन परवान पर चढ़ा है। लोकसभा चुनावों में कश्मीर में जिस तरह से मतदान प्रतिशत बढ़ा है उससे भी लगता है कि लोग अब राज्य में भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार का चुनाव करने को उत्सुक हैं।
आतंकियों को सीमा पार से मिल रही मदद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन दिनों सुरक्षाबलों को मुठभेड़ में मारे गए आतंकी के पास बड़ी संख्या गोला-बारूद, पाकिस्तान में बनी चॉकलेट और दवाइयां बरामद हुए हैं। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि घुसपैठ कर हमारी सीमा में घुस आए आतंकियों के स्थानीय मददगार भी कम नहीं हैं। हमारे जवानों की शहादत भी इसीलिए हो जाती है क्योंकि आतंकियों के इन मददगारों की कमर अभी पूरी तरह टूटी नहीं है। अमरनाथ यात्रा और संभावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

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