आज का पंचांग 16 सितंबर 2018: संतान सप्तमी व्रत एवं पूजन आज

आज का पंचांग 16 सितंबर 2018: संतान सप्तमी व्रत एवं पूजन आज

Tanvi Sharma | Publish: Sep, 16 2018 10:21:16 AM (IST) होरोस्कोप

आज का पंचांग 16 सितंबर 2018: संतान सप्तमी व्रत एवं पूजन आज

ज्योतिष पं. गुलशन अग्रवाल

राष्ट्रीय मिति भाद्रपद 25 शक संवत् 1940 भाद्रपद शुक्ल सप्तमी रविवार विक्रम संवत् 2075। सौर भाद्रपद मास प्रविष्टे 31, मुहर्रम 05 हिजरी 1440 तदनुसार अंग्रेजी तारीख 16 सितम्बर सन् 2018 ई०। दक्षिणायण, उत्तरगोल, शरदऋतु।

राहुकाल सायं 4 बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक। सप्तमी तिथि अपराह्न 3 बजकर 55 मिनट तक उपरांत अष्टमी तिथि का आरंभ, ज्येष्ठा नक्षत्र अगले दिन तड़के 4 बजकर 55 मिनट तक उपरांत मूल नक्षत्र का आरंभ, प्रीति योग रात्रि 10 बजकर 58 मिनट तक उपरांत आयुष्मान योग का आरंभ, वणिज करण अपराह्न 3 बजकर 55 मिनट तक उपरांत बव करण का आरंभ।

आज के मुहर्त- अनुकूल समय में संतान सप्तमी का पूजन करने के लिए शुभ मुहूर्त है।

चंद्रमा अगले दिन तड़के 4 बजकर 55 मिनट तक वृश्चिक उपरांत धनु राशि पर संचार करेगा। आज ही भद्रा अपराह्न 3 बजकर 55 मिनट से, अगले दिन तड़के 4 बजकर 50 मिनट तक मुक्त भरण संतान सप्तमी व्रत, श्री महालक्ष्मी व्रत शुरू (सप्तमी योग)।

आज जन्में बच्चे
आज जन्म लिए बच्चों के नाम (नो, या, यी, यू, ये) अक्षरों पर रख सकते है। आज जन्म लिए बच्चे की मूलशांति अवश्य कराएं। ऐसे जातक शरीर से मध्यम होंगे। स्वतंत्र विचारधारा व आवेशित प्रकृति के होंगे। सामान्य धनसंपदा के मालिक व न्यूनतम व्यवहारशील होंगे।

पंचांग क्या है

पंचांग या पंचागम् हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से 5 अव्यवों का गठन होता है, अर्थात् तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। पंचांग मुख्य रूप से सूर्य और चन्द्रमा की गति को दर्शाता है। हिन्दू धर्म में हिन्दी पंचांग के परामर्श के बिना शुभ कार्य जैसे शादी, नागरिक सम्बन्ध, महत्वपूर्ण कार्यक्रम, उद्घाटन समारोह, परीक्षा, साक्षात्कार, नया व्यवसाय या अन्य किसी तरह के शुभ कार्य नहीं किये जाते ।जैसा कि प्राचीन समय से बताया गया है कि हर क्रिया के विपरीत प्रतिक्रिया होती है। इसी तरह जब कोई व्यक्ति पर्यावरण के अनुरूप कार्य करता है तो पर्यावरण प्रत्येक व्यक्ति के साथ समान तरीके से कार्य करता है। एक शुभ कार्य प्रारम्भ करने से पहले महत्वपूर्ण तिथि का चयन करने में हिन्दू पंचांग मुख्य भूमिका निभाता है। पंचांग एक निश्चित स्थान और समय के लिये सूर्य, चन्द्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति को दर्शाता है। संक्षेप में पंचांग एक शुभ दिन, तारीख और समय पे शुभ कार्य आरंभ करने और किसी भी तरह के नकारात्मक प्रभाव को नष्ट करने का विचार प्रदान करता है।

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