आज के दिन इन मुहूर्त में करें अच्छे कार्य

Sunil Sharma

Publish: Sep, 17 2017 09:57:29 AM (IST)

होरोस्कोप
आज के दिन इन मुहूर्त में करें अच्छे कार्य

द्वादशी भद्रा संज्ञक तिथि दोपहर बाद २.४३ तक, उसके बाद त्रयोदशी जया संज्ञक तिथि रहेगी

द्वादशी भद्रा संज्ञक तिथि दोपहर बाद २.४३ तक, उसके बाद त्रयोदशी जया संज्ञक तिथि रहेगी। यदि समयादि शुद्ध हो तो द्वादशी तिथि में सभी चर-स्थिर कार्य, विवाहादि मांगलिक कार्य व जनेऊ आदि के कार्य करने योग्य हैं। पर तेल लगाना व यात्रा नहीं करना चाहिए।

शुभ वि.सं. : २०७४, संवत्सर: साधारण, अयन: दक्षिणायन, शाके: १९३९, हिजरी: १४३८, मु.मास: जिलहिज-२५, ऋतु: शरद्, मास:आश्विन, पक्ष: कृष्ण।

नक्षत्र: अश्लेषा ‘तीक्ष्ण व अधोमुख’ संज्ञक नक्षत्र रात्रि १२.०७ तक, उसके बाद मघा ‘उग्र व अधोमुख’ संज्ञक नक्षत्र है। अश्लेषा नक्षत्र में शत्रुनाश, व्यापार, साहस, अग्निविषादिक असद् कार्य, चौर्य और कूटकपट के कार्य सिद्ध होते हैं।
ग्रह राशि-नक्षत्र परिवर्तन: मंगल प्रात: ८.११ पर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

चंद्रमा : रात्रि १२.०७ तक कर्क राशि में, इसके बाद सिंह राशि में रहेगा।

ग्रह उदयास्त: प्रात: १०.१० पर मंगल पूर्व में उदय होगा।

वारकृत्य कार्य : रविवार को सामान्य रूप से सभी स्थिर कार्य, राज्याभिषेक, ललित कला सीखना, राज्य सेवा, पशु क्रय, औषध निर्माण, धातु कार्य, यज्ञादि-मंत्रोपदेश आदि कार्य शुभ व सिद्ध होते हैं।

दिशाशूल : रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चन्द्र स्थिति के अनुसार आज उत्तर व पूर्व दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद है।

श्रेष्ठ चौघडि़ए
आज प्रात: ७.४८ से दोपहर १२.१९ तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत तथा दोपहर बाद १.५३ से अपराह्न ३.२४ तक शुभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं तथा दोपहर ११.५७ से १२.४५ तक अभिजित श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

राहुकाल
सायं ४.३० बजे से सायं ६.०० बजे तक राहुकाल वेला में शुभ कार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

शुभ मुहूर्त
२१ सितम्बर : विवाह हस्त व चित्रा में (द्विगर्त प्रदेशीय), प्रसूति स्नान, नामकरण, अन्नप्राशन, कूपारम्भ, जलवा और विपणि-व्यापारारम्भ हस्त नक्षत्र में।
२२ सितम्बर : विवाह (द्विगर्त प्रदेशीय), विपणि-व्यापारारम्भ, वाहन क्रय करना, मशीनरी प्रारंभ, चूड़ाकरण, नामकरण, सगाई व अन्नप्राशन चित्रा नक्षत्र में।
२३ सितम्बर : विवाह (द्विगर्त प्रदेशीय) अतिआवश्यकता में स्वाति नक्षत्र में (भद्रा व वैधृति दोष)।

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