script70 percent of 43 year old canals are still uncooked, no water wastage | नहरों की लाइनिंग: 43 साल पुरानी नहरों में से 70 फीसदी अब भी कच्ची, नहीं रक रही पानी की बर्बादी | Patrika News

नहरों की लाइनिंग: 43 साल पुरानी नहरों में से 70 फीसदी अब भी कच्ची, नहीं रक रही पानी की बर्बादी

होशंगाबाद-हरदा जिले में फैला है 2925.79 किमी में नहरों का जाल, दोनों जिलों में हो चुकी है 633.17 किमी लंबी की नहरों की लाइनिंग,अभी बाकी है 2292.62 किमी कच्ची नहरों में सुधार और सीमेंटीकरण

होशंगाबाद

Published: November 19, 2021 12:36:07 pm

देवेंद्र अवधिया
होशंगाबाद. नर्मदापुरम् संभाग के होशंगाबाद-हरदा जिले में हरित क्रांति लाने वाले तवा बांध के निर्माण के बाद से शुरू हुईं नहरें 43 साल बाद भी पक्की नहीं हो सकी है, जबकि इनकी लाइनिंग की चार चरण की करीब 947.92 करोड़ की योजना बनाई गई थी। बीते तीन साल में मात्र 25 से 30 फीसदी नहरें ही पक्की हो पाई है। बाकी की 70 फीसदी नहरें अभी भी कच्ची ही हैं, जिसकी वजह से हर साल पानी की बेजा बर्बादी होती है। खेतों की सिंचाई के साथ ही पानी सीपेज और नदी-नालों से बह जाता है। फिलहाल पानी के अपव्यय को रोकने के कोई उपाय नहीं है। अगर शेष बची नहरों का भी सीमेंटीकरण हो जाए तो पानी के उपयोग के साथ बचत भी होगी। बता दें कि संभाग के दोनों जिलों में 2925.79 किमी में नहरों का जाल बिछा हुआ है। दोनों जिलों में 633.17 किमी की नहरों की लाइनिंग पर करीब 605.86 करोड़ की राशि खर्च की गई है। बांध के पानी से करीब 70 फीसदी एरिया में सिंचित होकर गेहूं की बंपर पैदावार में दोनों जिले प्रदेश में नंबर वन पर है। अन्य जिलों की तुलना में यहां सिंचाई सुविधा मिलने से किसानों में भी समृद्धि और खुशहाली आई है, लेकिन अभी भी 2292.62 किमी नहरें कच्ची और जर्जर और नालीनुमा है। इसके गहरीकरण, चौड़ीकरण और लाइनिंग की जरूरत है। अगर आगामी समय में ऐसा होता है तो टैल एरिया में भी पानी की हर साल आने वाली दिक्कतें दूर हो जाएगी।

वर्ष 1978 से शुरू हुईं हैं तवा बांध की नहरें
होशंगाबाद-हरदा जिले में इटारसी के तवानगर स्थित तवा बांध की दाईं और बाईं नहरें वर्ष 1978 से चालू हुई है। सिंचाई की सुविधा मिलने से किसानों को अब खुद के निजी स्रोतों कुओं, तालाब, नालों के पानी से रबी फसलों की सिंचाई के लिए निर्भर नहीं रहना पड़ता है। नहरों के जरिए खेतों में पलेवा के साथ गेहूं-चने की फसल में तीन पानी की सिंचाई आसानी से पूरी हो जाती है। तवा परियोजना मंडल होशंगाबाद की बात करें तो होशंगाबाद जिले में कुल नहरों की लंबाई 1755.15 किमी एवं हरदा जिले में नहरों की लंबाई 1170.64 किमी है। इस तरह दोनों जिलों में कुल 2925.79 किमी में नहरों का जाल बिछा हुआ है।

633.17 किमी कच्ची नहरों की हुई लाइनिंग
होशंगाबाद जिले में 418.09 किमी एरिया की नहरों की लाइनिंग यानी पक्कीकरण हो चुका है। इसी तरह हरदा जिले में भी 215.08 किमी कच्ची नहरों का सीमेंटीकरण किया जा चुका है। यानी दोनों जिलों में 633.17 किमी की नहरों की लाइनिंग का कार्य तीन साल में पूरा हुआ है। इन एरिया में किसानों को बांध का पानी सिंचाई के लिए भरपूर मिल रहा है। पानी के सीपेज में भी कमी आई है।

2292.62 किमी नहरें अभी पक्की होना बाकी
दोनों ही जिलों की 2292.62 किमी नहरें अभी कच्ची और जर्जर है। गहरीकरण के साथ इनकी लाइनिंग (पक्कीकरण) होना बाकी है। अभी इन एरिया की नहरों का पानी कुछ फीसदी हिस्सा किसानों के खेतों तक पहुंचते-पहुंचते सीपेज में चला जाता है। कई स्थानों पर पानी के अत्यधिक भराव से जमीन दलदली हो जाती है। नदी-नालों में पानी बहकर बर्बाद हो जाता है। इस बर्बादी को रोकने कोई उपाय नहीं हो पाते हैं।
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नहरों से यह हुआ किसानों को फायदा
तवा बांध की नहरों से सिंचाई की सुविधा मिलने से दोनों जिलों का अधिकतम क्षेत्र कृषि योग्य हो गया। जिससे किसानों एवं जनसामान्य में संपन्नता आई है। तवा कमांड में शेष कच्ची नहरों में लाइनिंग का कार्य पूरा होने पर सिंचाई में और भी बढ़ोतरी होगी। पानी का अपव्यय भी रूक सकेगा।

तीसरी गर्मी की मूंग को भी मिलने लगा पानी
सबसे अहम् बात ये है कि रबी की मुख्य गेहूं-चने की फसल के साथ ही अब हरदा-होशंगाबाद जिले में तीसरी गर्मी की मूंग फसल के लिए भी सिंचाई की सुविधा तवा बांध की नहरों से मिलने लगी है। बीते दो साल से लगातार पानी मिल रहा है। जिससे मूंग की भी बंपर पैदावार हुई और किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिला है। विगत वर्ष 80 हजार 720 हैक्टेयर रकबे में गर्मी की मूंग को नहरों के जरिए पानी दिया गया था।

यह हैं दोनों जिलों की नहरों की स्थिति
तवा बांध से दो तरफ नहरें दाईं और बाईं तरफ फैली हुई है। जिसमें बाईं मुख्य तट नहर से इटारसी, सिवनीमालवा, टिमरनी और हरदा एवं दाईं मुख्य तट नहर से सोहागपुर, बाबई, पिपरिया एवं आसपास के क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलती है।

नहरों की लाइनिंग पर खर्च हुई राशि
तवा परियोजना अंतर्गत नहरों की लाइनिंग के लिए ईआरएएस मद में क्रमश: चार चरणों में 947.92 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति हुई थी। जिनमें करीब 605.86 करोड़ रुपए व्यय किए जा चुके हैं। प्रथम चरण में वर्ष 2013 में 89.91 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे, जिसके विरुद्ध 104.84 करोड़ खर्च कर वा बाईं मुख्य नहर की चेन क्रमांक 214 (किमी6.42) से चेन क्रमांक 1526(किमी 45.78) तक कुल 39.36 किमी की लाइनिंग पूरी हुई। दूसरे चरण में वर्ष 2016 में 458.01 करोड़ की मंजूरी मिली। जो कि 28 हजार 412 हैक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के निर्माण व सौर ऊर्जा संयंत्र के लिए हुई। इस योजना कमांड क्षेत्र नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अंतर्गत प्रस्तावित मोरंड गंजाल संयुक्त सिंचाई योजना के तहत ओवर लेप होने से सिंचित क्षेत्र 15610 हैक्टेयर में सीमित किया गया। सौर ऊर्जा संयंत्र को पृथक करने से लागत कम हुई।

अन्य उद्वहन सिंचाई योजना की स्थिति
झाड़बीड़ा उद्वहन सिंचाई योजना 15610 हैक्टेयर पर अनुमानित लागत 150.39 करोड़ है। पिपरिया शाखा नहर से 2692 हैक्टेयर में 28.59 करोड़ की लागत से पिपरिया उद्वहन सिंचाई योजना प्रस्तावित हुई। वर्ष 2017 में 3 क्यूमेक्स से अधिक व 5 क्यूमेक्स से कम जल प्रवाह क्षमता वाली नहरों की लाइनिंग, क्षतिग्रस्त स्ट्रक्चरों की मरम्मत के कुल 18 कार्यों पर 135.62 करोड़ रुपए लगे। इसमें से 8 कार्य पूर्ण हुए। जिन पर 37.38 करोड़ से 72.87 किमी लाइनिंग पूर्ण तथा 5 कार्य प्रस्तावित किए गए। इस चरण में अवशेष राशि से 236.59 किमी अतिरिक्त लाइनिंग होनी है। इस तरह कार्यों पर वर्तमान तक अद्यतन व्यय 115.63 करोड़ एवं कार्य पूर्णता उपरांत प्रस्तावित व्यय 135.62 करोड़ है।

इनका कहना है...
होशंगाबाद जिले की बात करें तो अभी अधिकांश नहरें कच्ची व पुरानी है। जिनकी स्थिति ठीक नहीं है। इनकी लाइनिंग होना चाहिए, ताकि पानी का अपव्यय रूके और किसानों को नहरों से रबी सिंचाई के लिए हर साल भरपूर पानी मिल सके।
-उदय कुमार पांडे, जिला मंत्री भारतीय किसान संघ

तवा परियोजना अंतर्गत होशंगाबाद-हरदा जिले की 633.17 किमी की नहरों की लाइनिंग का कार्य पूरा हो चुका है। इन एरिया में किसानों को बांध का पानी सिंचाई के लिए भरपूर मिल रहा है। पानी के सीपेज में भी कमी आई है। शेष कच्ची नहरों के भी पक्कीकरण के कार्य रबी सीजन के उपरांत पूर्ण कराए जाएंगे।
-एसके सक्सेना, अधीक्षण यंत्री जल संसाधन विभाग
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नहरों की लाइनिंग: 43 साल पुरानी नहरों में से 70 फीसदी अब भी कच्ची, नहीं रक रही पानी की बर्बादी
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