ये है 90 साल पुराना, 55 फुट ऊंचा पीपल का पेड़, जिसे दो क्रेनों से 20 फूट किया री-प्लांट

पीपल के तीसरे पेड़ की शिफ्टिंग और री-प्लांट में परिवर्तन संस्था को करीब एक पखवाड़े का वक्त लग गया

By: poonam soni

Updated: 07 Jan 2019, 05:44 PM IST

इटारसी. पुलिस कॉलोनी के निर्माण नक्शे के बीच में आ रहे विशालकाय पेड़ों को मूल स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर लगाने की श्रंखला में रविवार को परिवर्तन संस्था ने पीपल के पेड़ को पुलिस स्टेशन के पीछे स्थापित किया है। इस दौरान दो क्रेनों की मदद ली है। पेड़ की शिफ्टिंग के दौरान साइड से गुजर रहे बिजली के तार से दुर्घटना न हो, इसके लिए करीब एक घंटे क्षेत्र की बिजली बंद रखी गयी थी। ऑपरेशन कल्पतरु के अंतर्गत परिवर्तन संस्था ने पीपल का तीसरा और अभियान का चौथा पेड़ एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर लगाया। पीपल के तीसरे पेड़ की शिफ्टिंग और री-प्लांट में परिवर्तन संस्था को करीब एक पखवाड़े का वक्त लग गया।
पंद्रह दिन से चल रही थी प्रक्रिया : यह पेड़ करीब पचपन फुट ऊंचा था और 90 साल पुराना है। इसकी शाखाएं भी अधिक थीं। पुलिस थाने के पीछे बन रहे पुलिस आवास के नक्शे में आ रहे इस पेड़ को काटने के लिए नगर पालिका में निर्माण एजेंसी ने आवेदन दिया था। परिवर्तन संस्था ने पेड़ को शिफ्ट करके री-प्लांट करने की मंशा जतायी थी। विगत पंद्रह दिन से पेड़ के इर्दगिर्द गोलाकार गड्ढा बनाकर उसकी जड़ों का उपचार किया जा रहा था ताकि उसे उसकी मूल मिट्टी के साथ ही उठाकर दूसरी जगह लगाया जा सके। पंद्रह दिन के उपचार के बाद पीपल के बड़े पेड़ को दो क्रेनों की मदद से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर स्थापित किया है। संस्था के सदस्यों ने पेड़ को स्थापित करने के बाद पूजा की और गायत्री मंत्र का जाप किया है। परिवर्तन के वरिष्ठ सदस्य अखिल दुबे ने कहा कि अब तक चार पेड़ री-प्लांट किए जा चुके हैं और यह अभियान अभी जारी रहेगा। इस अभियान के अंतर्गत करीब एक दर्जन पेड़ और शिफ्ट होना है।
चार पेड़ों को कर चुके हैं स्थापित
संस्था के सदस्य सोनू प्रजापति ने बताया कि करीब डेढ़ माह पूर्व आपरेशन कल्पतरु प्रारंभ किया था और अब तक हम चार पेड़ एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थापित कर चुके हैं। उन्होंने आमजन से भी आग्रह किया है कि यदि इस तरह के पेड़ को काटने की नौबत आती है तो वे काटने की बजाय उनको शिफ्ट करने पर जोर दें और यदि स्वयं कर सकते हैं तो स्वयं करें, अन्यथा विशेषज्ञों की मदद लेकर पेड़ों को बचाएं और पर्यावरण की रक्षा में अपना योगदान दें।

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