आप भी जानें विहार के दौरान कहां विश्राम करते हैं आचार्य विद्यासागर

आप भी जानें विहार के दौरान कहां विश्राम करते हैं आचार्य विद्यासागर

poonam soni | Updated: 04 Jul 2019, 11:13:38 AM (IST) Hoshangabad, Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

जिले में चौथी बार हुआ आचार्य विद्यासागर का आगमन, होशंगाबाद में 8 घंटे रूके आचार्य, आज पहुंचेंगे बुधनी

होशंगाबाद। आचार्य विद्यासागर, हर कोई इस नाम से परिचित है। इनके बारे में काफी कुछ जानते भी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आचार्य विहार के दौरान विश्राम कहां करते हैं। आज हम आपको इसी बारे में बताएंगे। आचार्य विद्यासागर महाराज इन दिनों 30 मुनियों के साथ नेमावर सिद्ध स्थल की ओर विहार कर रहे हैं। वह बुधवार सुबह आठ बजे आंचलखेड़ा, निमसाडिय़ा से होशंगाबाद पहुंचे। जहां उनका पड़ाव रहा नर्मदा महाविद्यालय। आचार्य 30 मुनि और 100 लोगों के साथ हर दिन 20 किलोमीटर पैदल विहार कर रहे हैं। उन्होंने संघ मुनियों के साथ कॉलेज में आहाचर्या ली। संघ ने बताया कि जैन समुदाय द्वारा आचार्य के दर्शन में एकत्र की गई राशि नेमावर के सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र मंदिर में दान की जाएगी। नेमावर में 17 साल से मंदिर तैयार हो रहा है। जो अगले दो साल में पूर्ण हो जाएगा। जहां भूतकाल के 24, भविष्यकाल के 24, वर्तमान काल के 24 व पांच पंच बाल यति की अष्टधातु की प्रतिमाएं स्थापित की जाएगी।

 

महावीर जैन परिवार ने सजाईं थी 60 चौकियां मिली विधी
महावीर जैन समाज की सुशील गोयल ने बताया कि 60 चौकियां सजाने पर आचार्य को भोजन ग्रहण कराने का मौका मिला। सुशील की माता कुसुम गोयल ने बताया कि वे और उनके पति स्वर्गीय एमएल गोयल ३५ साल से ग्रह त्याग कर आचार्य के साथ नेमावर में उनके आश्रम में जाकर रहे। 40 साल तक उन्होंने आचार्य के साथ विहार किया। कुसुम के पति एमएल गोयल ने आचार्य के सानिध्य में नेमावर में समाधि ली। इसलिए उनके परिवार को भोजन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। महावीर परिवार ने करीब ३० प्रकार के पकवान तैयार किए थे।

 

ऐसी है आचार्य की दिनचर्या
संघ मुनियों के साथ आचार्य का बिहार सुबह 5.30 बजे शुरू होता है। और सूर्य अस्त के बाद कदम रूक जाते हैं। चाहे वह गांव हो या जंगल। २४ घंटे में एक बार आहाचर्या लेते हैं। केवल साढ़े तीन घंटे लकड़ी के पटिए पर एक ही करवट में रात्रि विश्राम करते हैं।

कोशिश होती है विद्या के मंदिर में हो विश्राम
आचार्य विद्यासागर महाराज ने कॉलेज स्टॉफ से कहा कि हमारी कोशिश होती है कि जहां भी वे विश्राम करें वो सरस्वती और विद्या का मंदिर हो क्योंकि इन जगहों पर राजनीति और नेताओं का हस्तक्षेप नहीं होता। उन्होंने शिक्षा के स्तर पर कहा कि ज्यादातर बच्चे नौकरी के उद्देश्य से शिक्षा प्राप्त करते हैं। अगर वे उपभोक्ता के उपभोग की वस्तु के संपादन पर ध्यान केंद्रित करते हुए पढ़ाई करें, तो निश्चित शिक्षा का स्तर सुधरेगा। इसके अलावा शिक्षा के मूल्याकंन में पुन:विचार करना चाहिए। विदेशी शिक्षा से बच्चों को शिक्षित करने से उन्हे भारतीय संस्कृति और इतिहास का ज्ञान नही होता।

 

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