रामलीला के साथ ही इसका साहित्य भी है प्राचीन

66 साल पुराने साहित्य से आज भी होती है तैयारी, रंगमंच भी रहता है आकर्षण का केन्द्र

By: rajendra parihar

Published: 08 Oct 2021, 11:11 AM IST

होशंगाबाद- सेठानी घाट स्थित सतसंग भवन जारी रामलीला संपूर्ण रूप से प्राचीन है। पीढिय़ों से काम करने वाले कलाकार, सबसे अधिक वर्षों से अभिनय करने वाले कलाकारों के साथ ही इसका साहित्य और संगीत भी प्राचीन है। कई दशकों पहले तैयार किए गए साहित्य और प्राचीन संगीत संसाधनों का उपयोग रामलीला को संपूर्ण रूप से प्राचीन बना रहा है।
पिता के साहित्य को बनाया अनुकूल
1962 से रामलीला में शत्रुघ्न सहित अन्य किरदार निभाने वाले हरेराम संकीर्तन भवन के स्व. पं. रामकृष्ण दुबे कई वर्षों तक रामलीला समिति से जुड़े हुए है। पं. दुबे के पिता स्व. भवानी शंकर परसाई ने 1941 में रामलीला को पात्रों के अनुसार लिपिबद्ध किया था। 29 वर्षों तक इसी साहित्य से रामलीला का मंचन होता रहा। वर्ष 1970 में पं. दुबे ने पिता द्वारा लिखित रामलीला के कठिन शब्दों को हटाकर इसे कलाकारों के अनुकूल बनाया था। रामलीला का संगीत निर्देशन स्व. पं. बद्रीप्रसाद शुक्ल ने किया था। वर्तमान में इनके पुत्र पं. राम परसाई संगीत निर्देशन करते हैं।
रंगमंच भी आकर्षण का केन्द्र
रामलीला महोत्सव समिति का रंगमंच भी इसमें आकर्षण का केन्द्र हैं। लोगों को रामलीला के 18 दिनों में मंच पर प्रसंग के आधार पर मंच को विभिन्न रूपों मेें बदला जाता है। राजमहल से लेकर जंगल, पर्वत, नदी के दृश्यों को बखूबी से मंच पर प्रदर्शित किया जाता है। हनुमान का आकाश में उडऩा और रावण द्वारा सीता का आकाश मार्ग से अपहरण रामलीला में आकर्षण का केन्द्र रहते हैं। लीला अधिकारी व मंंच सयोजन का काम प्रशांत दुबे संभाल रहे हैं।
भगवान श्रीराम ने किया ताड़का का वध
मुनि विश्वामित्र के साथ वन में पहुंचे राम और लक्ष्मण ने राक्षसों का संहार कर मुनियों को आतंक के वातावरण से मुक्त कराया श्री राम ने ताड़का वध किया। मारीच को बिना भर का बाण मारकर सौ योजन दूर फेंका अग्निबाण से सुबाहु को भस्म किया, श्री राम के द्वारा ही अहिल्या का उद्धार हुआ । यह प्रसंग सेठानी घाट स्थित मंच पर इन दिनों चल रही रामलीला महोत्सव में मंगलवार की लीला में मुनि विश्वामित्र वन में राक्षसों के आतंक की चिंता लिए राजा दशरथ के पास पहुंचते हैं राजा दशरथ मुनि विश्वामित्र से आगमन का कारण पूछते हैं तो मुनि विश्वामित्र कहते हैं कि राजन असुर समूह मुझे बहुत सताते हैं इसलिए मैं आपसे कुछ मांगने आया हूं। विश्वामित्र कहते हैं कि राक्षसों से रक्षा करने के लिए उन्हें श्रीरघुनाथ और लक्ष्मण को चाहिए है जिससे वह राक्षसों का संहार कर देंगे और ऋषि मुनि सुरक्षित हो जाएंगे। उनकी बातों को सुनकर राजा दशरथ व्याकुल हो जाते हैं और बार-बार अनुरोध करते हैं कि श्री राम और लक्ष्मण उनको बहुत अधिक प्रिय हैं इन्हें में कैसे दे दूं ।यह किशोर बालक हैं ये कैसे बड़े-बड़े राक्षस से युद्ध करेंगे। राजगुरु वशिष्ठ राजा दशरथ को सभी प्रकार से समझाते हैं और उनका मन का संशय दूर करते हैं तब राजा दशरथ आशीर्वाद देकर श्रीराम, लक्ष्मण को मुनि विश्वामित्र को सौंप देते हैं। मुनि के साथ लक्ष्मण सहित श्रीराम वन की ओर प्रस्थान करते हैं वन में जाते हुए ताड़का का नाम की भयंकर राक्षसी का वध करके और मारीच को एक साधारण बाण सौ योजन दूर फेंकते हैं। अगली बार से स्वभाव को भस्म करके तत्पश्चात भगवान राम अहिल्या का उद्धार करते हैं। मंगलवार की लीला में प्रद्युमन दुबे ने राम ,अनिकेत दुबे ने लक्ष्मण , अजय परसाई ने विश्वामित्र , सुभाष परसाई ने दशरथ ,अभिषेक सैनी ने ताड़का , दीपेश व्यास ने मारीच, मनोज परसाई ने प्रधान , और दीपक साहू ने जम्बू की भूमिका निभाई ।

rajendra parihar Reporting
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