बड़ी खबर: भारत का ये बड़ा बैंक अब हो गया कंगाल, कर्मचारियों को नहीं मिल रही सैलरी!

sandeep nayak

Publish: Dec, 07 2017 02:20:39 PM (IST) | Updated: Mar, 13 2018 07:49:26 PM (IST)

Hoshangabad, Madhya Pradesh, India
बड़ी खबर: भारत का ये बड़ा बैंक अब हो गया कंगाल, कर्मचारियों को नहीं मिल रही सैलरी!

बैंक पर उपभोक्ताओं की एफडी का तीन करोड़ रुपए से अधिक बकाया, काट रहे चक्कर

बैतूल। नोटबंदी को एक साल से अधिक समय हो गया हैै, एक बैंक के कर्मचारियों को करीब एक साल से वेतन के लाले पड़े हुए हैं। वहीं करीब ४४२ उपभोक्ता अपनी एफडी की बकाया राशि लेने के लिए बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। यह बकाया राशि करीब ३.१८ करोड़ रुपए है। यह मामला है मप्र के बैतूल जिले के भूमि विकास बैंक का।

यहां सालभर से उसके अधिकारियों-कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। वहीं उपभोक्ता परेशान हैं कि कहीं उनकी जीवन भर की गाड़ी कमाई डूब न जाए। इसलिए अब यह उपभोक्ता आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। ताकि सरकार कोई रास्ता निकाले और उनकी मेहनत की जमा पूंजी मिल सके।

दिसंबर 2016 से नहीं मिला वेतन
बैंक में कार्यरत बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों को दिसंबर २०१६ से वेतन नहीं मिला है। बंैक के ०९ कर्मचारियों का केन्द्रीय सहकारी बैंक में संविलयन किया गया है। अक्टूबर २०१५ समझौता योजना के तहत नौ कर्मचारी बैंक में संविलियन कर दिए गए हैं। वर्तमान में बैंक में चार कर्मचारी ही बचे हैं। पहले बैंक में लगभग १५० कर्मचारी हुए करते थे। समय-समय पर बैंक से कर्मचारी रिटायर हो गए, कई काम छोड़कर चले गए।

नहीं मिली एफडी की राशि
शहर के ही अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि बैंक में एफडी कराई थी। एफडी की परिपक्वता हो गई है। इसके बाद भी आज तक बैंक ने एफडी की राशि नहीं लौटाई है। राशि को लेकर कलेक्टर से शिकायत की है। राशि नहीं मिलती है तो सभी उपभोक्ता धरना आंदोलन करेंगे।

 

इसलिए हुई बैंक की हालत खराब
भूमि विकास बैंक कोठीबाजार से किसानों को विभिन्न योजनाओं के तहत ऋण दिया जाता था। टै्रक्टर, कुआं, थ्रेसर, जीप आदि के लिए ऋण दिए जाते थे। किसानों ने बैंक से ऋण तो लिया, लेकिन इसे वापस ही नहीं किया। बैंक का किसानों पर ऋण ४५ करोड़ से अधिक का बकाया है। बैंक द्वारा किसानों को १९.६ करोड़ रुपए ऋण बांटा था। किसानों पर इतने ही राशि का ब्याज ३३.३७ करोड़ रुपए भी बकाया है। अब किसानों से बैंक वसूली भी नहीं कर पा रहा है। बैंकों के पास वसूली के लिए भी कर्मचारी नहंीं बसे हैं। बैंक ने किसानों से राशि वसूल करने मूलधन वसूली की योजना भी चलाई, इसके भी कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आए। किसान मूलधन भी वापस नहीं चुका पाए। भूमि विकास बैंक में अब परिसमापन की कार्रवाई चल रही है,उपभोक्ताओं की राशि शून्य होगी,इसके बाद बैंक को बंद कर दिया जाएगा। करंट वर्ष में बैंक ने किसानों से कर्ज वसूली का ११ करोड़ ३६ लाख रुपए का लक्ष्य रखा था। बैंक की कर्ज वसूली ७६ लाख ६० हजार रुपए पर ही सिमट गई। बैंक में कर्मचारी नहीं होने से वसूली भी नहीं हो पा रही है।

उपभोक्ताओं को बांटी अनुपाती राशि
राज्य बैंक से सितंबर २०१६ में २ करोड़ १८ लाख ८६ हजार रुपए की राशि बैंक को मिली थी। इस राशि का वितरण एफडी के उपभोक्ताओं को अनुपाती राशि के रुप में किया गया है। इसके बाद से आज तक उपभोक्ताओं को राशि नहीं मिली है। राज्य बैैंक ने भी भूमि विकास बैंक को रााि नहीं दी है। उपभोक्ता राशि के लिए बैंक के चक्कर काट रहे हंैं। उपभोक्ताओं को राशि आने पर देने का हवाला दिया जा रहा है।

 

फैक्ट फाइल
०६ मार्च १९६३ बंैक संचालित
४४२ एफडी वाले उपभोक्ता की संख्या
३१८.६९ लाख एफडी की राशि-
४१४ किसानों को कर्ज बांटा संख्या
१९६.०७ लाख कर्ज की राशि-
४५.०४ करोड़ किसानों पर कुल कर्ज-
३३.३७ करोड़ किसानों पर ब्याज की राशि
०२.१८ करोड़ राज्य बैंक से २०१६ में मिली राशि
२०२८ बैंक से जुड़े कुल किसान
११.३६ करोड़ जून २०१७ में वसूली होना था
७६.६० लाख करंट वर्ष में वसूली हुई

बैंक परिसमापन की ओर है। किसानों को बांटे गए कर्ज की वसूली नहीं हुई है। राज्य बैंक से भी राशि नहीं मिली है। एफडी की राशि लौटाने राज्य बैंक से पैसे की मांग की है।
एमके हरणे, महाप्रबंधक भूमि विकास बैंक, कोठीबाजार, बैतूल

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