मध्यप्रदेश के इस जिले को पश्चिम बंगाल मिठास के बदले दे रही करोड़ों रुपए

इतिहास में पहली बार, पश्चिम बंगाल के पकवानों की मिठास बढ़ा रही बैतूल की शक्कर

By: sandeep nayak

Published: 26 Jan 2018, 03:09 PM IST

बैतूल। जिले के किसानों द्वारा खेतों में लगाई गन्ने की फसल से बनाई जा रही शक्कर की मिठास का स्वाद अब पश्चिम बंगाल के लोग चखेंगे। जिले के इतिहास में यह पहला मौका है कि बैतूल में बनी शक्कर ट्रेन से पश्चिम बंगाल भेजी जा रही है। इस शक्कर को बेचने के बाद 8 करोड़ की रकम पश्चिम बंगाल से बैतूल जिले में पहुंचेगी। सोहागपुर स्थित श्रीजी शुगर मिल के संचालक अभिषेक गोयल ने बताया कि जिले के किसानों द्वारा मिल को प्रदान किए जा रहे गन्ने से उच्च गुणवत्ता की शक्कर बनाई जा रही है। इसी गुणवत्ता के कारण पश्चिम बंगाल में बैतूल की शक्कर की मांग अधिक हो रही है। गुरुवार को शुगर मिल से करीब 27 हजार क्विंटल शक्कर ट्रेन के माध्यम से पश्चिम बंगाल भेजने का कार्य किया जा रहा है। गोयल ने बताया कि पहली बार अन्य प्रदेश से जिले में 8 करोड़ से अधिक की रकम पहुंचेगी। अन्य प्रदेशों में जिले में उत्पादित शक्कर को बेचने से जिले का ही राजस्व बढ़ेगा और आर्थिक उन्नति भी होगी।

गन्ना की खेती लाभदायक
शक्कर उत्पादन के लिए गन्ना की खेती जरूरी होती है। यह खेती किसानों के लिए लाभदायक होती है वहीं इससे अच्छी आय भी मिलती है।

 

गन्ना खेती इस तरह करें

गन्ना बहुत ही सुरक्षित महत्वपूर्ण बहुवर्षीय व अधिक मुनाफा देने वाली नगद फसल है. यदि किसान भाई आधुनिक तकनीकि के साथ विपुल उत्पादन का लक्ष्य रखकर गन्ना का शुभारम्भ करें तो सफलता एवं समृद्धि निसंदेह ऐसे किसानो का स्वागत करेगीं।

कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन हेतु नई उन्नत तकनीकि की जानकारियों हेतु किसान भाई निम्नलिखित बिन्दुओ पर विशेष ध्यान देवें

 

मिट्टी परिक्षण- मिट्टी का परिक्षण करवाये परिक्षण के आधार पर आवश्यकतानुसार पोषक तत्वों का उपयोग करके उवर्रक के खर्च में बचत कीजिये।

बुवाई का समय- शरदकालीन गन्ना बुवाई का ऊपयुक्त समय - अक्टूम्बर से नवम्वर।

इस अबधि में गन्ना बोनी करने पर अंकुरण स्वस्थ तथा कांसे, कल्ले की संख्या अधिक होती है प्रति एकड़ 42 से 45 हजार गन्ना संख्या रखना संभव होता हैं।
जड़ी फसल अच्छी, उत्पादन अधिक, रोग तथा कीटों का प्रकोप कम होता है।
फसल वृद्धि शीघ्रगति से होती है, तथा लक्ष्य अनुसार कर सकते है।
विशेष परिस्थितियो में बसंतकालीन गन्ना फरवरी-मार्च में लगाया जा सकता है।

 

 

खेत (जमीन) का चयन – काली भारी मिट्टी, पीली मिट्टी, तथा रेतेली मिट्टी जिसमें पानी का अच्छा निकास हो गन्ने हेतु सर्वोत्तम होती है।

खेत की तैयारी- गन्ना बहुवर्षीय फसल है, इसके लिए खेत की गहरी जुताई के पश्चात् 2 बार कल्टीवेटर व आवश्यकता अनुसार रोटावेटर व पाटा चलाकर खेत तैयार करें, मिट्टी भुरभुरी होना चाहिए इससे गन्ने की जड़े गहराई तक जाएगी और आवश्यक पोषक तत्व का अवशोषण करेगी।

गन्ना बीज का चुनाव– गन्ना बीज 9 से 10 माह के उम्र का गन्ना बीज के लिए उपयोग करे, गन्ना बीज उन्नत जाति, मोटा, ठोस, शुद्ध व रोग रहित होना चाहिए. जिस गन्ने की छोटी पोर हो फूल आ गये हो, ऑंखे अंकुरित हो या जड़े निकल आई हो ऐसा गन्ना बीज के लिये उपयोग न करें. आप निम्न गन्ना प्रजातियों का चयन करे – Co-86032, CoVs-3102, Co-0238, Vsi-434, Co-0239 इन प्रजातियों का ही बीज प्रोयोग करें।

 

गन्ना बीज 9 से 10 माह के उम्र का गन्ना ही बीज के लिए उपयोग करें गन्ना बीज उन्नत जाति, मोटा, ठोस, शुद्ध व रोग रहित हो. गन्ना की ऑख पूर्ण विकसित तथा फूली हुई हो जिस गन्ने का छोटी पोर हो फूल आ गये हो ऑख अंकुरित हो या जड़े निकल हो ऐसा गन्ना बीज के लिए उपयोग न करें।

बीज की मात्रा- एक ऑख का टुकड़ा लगाने पर प्रति एकड़ 10 क्विंटल बीज लगेगा, 2 ऑख के टुकड़े लगाने पर 20 क्विंटल बीज लगेगा, पॉली बैग, पॉली ट्रे के उपयोग से बीज की बचत होगी तथा अधिक उत्पादन प्राप्त होगा।

बीज की कटाई- तेज धार वाले ओजार से गन्ना की कटाई करते समय ध्यान रखें कि ऑख के ऊपर वाला भाग 1/3 तथा निचला हिस्सा 2/3 भाग रहे।

नाली से नाली की दूरी (घार की दूरी) – नालियों के बीच की दुरी 4 से 4.5 या 5 फिट रखें इसके निम्न लाभ होगे।

 

सूर्यप्रकास, हवा अधिक मिलने से गन्ना अधिक होता हे, तथा अधिक गन्ना उत्पादन प्राप्त होता हे बीज की मात्रा कम लगती है.
अन्तरवर्तीय फसल या यंत्रीकरण हेतु सुलभ।
हार्वेस्टर द्वारा गन्ना कटाई में सुविधा।

 

बीजोपचार- अनेक रोग व कीट प्रकोप बीज के माध्यम से होते है, इसलिए बीज उपचार आवश्यक है।

रसायनिक उपचार (प्रति एकड़) कार्बनडाईजिम (बावेस्टीन) 100 ग्राम क्लोरोपयरीफास 300 मि.लि., यूरिया 2 किलो, 1 किलो चूना, 100 लीटर पानी में घोल बनाकर बीज के टुकडो को 10 मिनिट तक घोल में डूबाकर उपचारित करे।

जैविक उपचार – ( प्रति एकड़ ) 1 लीटर एजोटोवैक्टर + एक लीटर पी. एस. बी. का 100 लीटर पानी में घोल बनाकर रसायनिक बीज उपचार के पश्चात् बीज के टुकडो को सूखने के बाद उपरोक्त घोल में 30 मिनिट डुबाकर उपचार करने के पश्चात् बुवाई करें।

बुवाई विधि – माध्यम से भारी मिट्टी में सुखी बुवाई करें नालियों में गोबर खाद या कम्पोस्ट खाद, बेसल डोज, सूक्ष्म पोषक तत्व डाले. घार में गन्ने के टुकड़े को कातार में जमा दें. गन्ने की आंखे आजू-बाजू में हो ऐसा रखें (दोनों आंखे नाली की बगल की तरफ हो) इसके बाद 2-3 इंच मिट्टी से टुकडो को दबा दे।

गोबर खाद या कम्पोस्ट- गन्ना फसल के लिये लगभग 50 कुन्टल गोबर खाद या कम्पोस्ट खाद का उपयोग गन्ना बुवाई के समय नालियों में डालकर करना चाहिए. गोबर खाद के कारण जमीन में हवा व पानी का संतुलन बना रहता है. मिट्टी की जलधारण क्षमता बढती हें जीवा‍‌‍णओ की संख्या में वृद्धि होती हें हरी खाद प्रेसमड मुर्गी खाद बायोकम्पोस्ट, गन्ने की सुखी पत्तियां अन्य घासफूस की पलटवार कर भूमि में कार्बनिक पदार्थ मिलायें जा सकते हैं।

मिट्टी में साधारणत: 0.75% से 1% तक कार्बनिक या जीवांश पदार्थ का होना आवश्यक हैं।

रसायनिक उर्वरको का प्रयोग – फसलो की सही बढ़बार, उपज और गुणवत्ता के लिये पोषक तत्वों का सही

अनुपात और जरुरी मात्रा मिट्टी में साधारणत: 0.75% से 1% तक कार्बनिक या जीवांश पदार्थ का होना आवश्यक हैं।

रसायनिक उर्वरको का प्रयोग – फसलो की सही बढ़बार, उपज और गुणवत्ता के लिये पोषक तत्वों का सही अनुपात और जरुरी मात्रा में मिट्टी परिक्षण प्रतिवेदन (रिपोर्ट) के अनुसार ही प्रोयोग करें जहाँ तक संभव हो सरल खाद जैसे यूरिया, सुपरफास्फेट, व म्यूरेट ऑफ़ पोटाश जैसे उर्वरको अनुशासित मात्रा में फसल को दें।

गन्ना बुवाई से पूर्व (प्रति एकड़) – सुपरफास्फेट 150 किलो 50 किलो म्यूरेट ऑफ़ पोटाश 25 किलो यूरिया + 10 किलो रीजेंट.

गन्ना बुवाई से 45 दिन बाद- 100 किलो यूरिया दो से तीन बार सिंचाई के समय बाँट- बाँट कर डाले।

गन्ना बुवाई से 80 दिन बाद- 100 किलो यूरिया उपरोक्त अनुसार बाँट- बाँट कर डाले।

sandeep nayak Desk/Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned