महानिशा पूजा...मां कालरात्रि की पूजन करके पा सकते हैं रोगों से मुक्ति

चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन...मंदिरों और घरों में मां काली की आराधना की गई

By: poonam soni

Published: 31 Mar 2020, 10:59 AM IST

होशंगाबाद। 31 मार्च दिन मंगलवार को चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है। आज माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप दुष्टों का संहार करने वाली माँ कालरात्रि की पूजा की गई। ज्योतिषाचार्य पंडित शुभम दुबे के अनुसार नवरात्रि के सातवें दिन होती है मां कालरात्रि की पूजा। मां कालरात्रि को यंत्र, मंत्र और तंत्र की देवी कहा जाता है। कहा जाता है कि देवी दुर्गा ने असुर रक्तबीज का वध करने के लिए कालरात्रि को अपने तेज से उत्पन्न किया था। इनकी उपासना से प्राणी सर्वथा भय मुक्त हो जाता है। शहर के काली मंदिर और अन्य मंदिरों में पूजारी ने मां दुर्गा के सातवें स्वरूप की आराधना की वहीं लॉकडाउन के चलते भक्तों ने घरों में मां की आराधना की।


इस कारण नाम पड़ा शुभंकारी-
दानव, भूत, प्रेत, पिशाच आदि इनके नाम लेने मात्र से भाग जाते हैं। मां कालरात्रि का स्वरूप काला है, लेकिन यह सदैव शुभ फल देने वाली हैं। इसी कारण इनका एक नाम शुभकारी भी है। गले में नरमुंडों की माला पहने वाली माँ कालरात्रि की पूजा करने से सभी तरह के भय का नाश होता है।

चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन ऐसे करें कालरात्रि माता की पूजा
माँ कालरात्रि की पूजा ब्रह्ममुहूर्त में ही की जाती है। इसके अलावा तांत्रिक माँ की पूजा आधी रात में करते हैं। माँ कालरात्रि के पूजन के लिए विशेष कोई विधान नहीं है। इस दिन एक चौकी पर माँ कालरात्रि का चित्र स्थापित करें। इसके बाद माँ कालरात्रि को कुमकुम, लाल पुष्प, रोली आदि चढ़ाएं। माला के रूप में माँ को मुंड रूप में नींबुओं की माला पहनाएं और उनके आगे तेल का दीपक जलाकर विधिवत पूजन करें।

चैत्र नवरात्रि में सातवें दिन होती है माँ कालरात्रि विशेष पूजा आऱाधना
माता कालरात्रि को लाल फूल अर्पित करें एवं गुड़ का भोग लगाएं। माँ कालरात्रि के मन्त्रों का 108 बार जप करें। समयानुसार श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करें व माता की आरती उतारें। पूजा आरती के बाद माँ कालरात्रि से जाने अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगें। माता

लगाएं भोग का प्रसाद सभी भक्तों में बांटे
माँ कालरात्रि की पूजा करने के लिए श्वेत या लाल वस्त्र ही धारण करना चाहिए। माँ कालरात्रि के सामने तेल का दीपक जलाकर गुड़ का भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद 108 बार नवार्ण मंत्र पढ़ते जाएं और एक-एक लौंग चढाते जाएं। बाद में सभी लौंग को हवन में अर्पित करें। ऐसा करने से सभी विरोधी और शत्रु से रक्षी माता कालरात्रि करती रहेगी।

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