सार्थक बाल दिवस: नन्हीं जान को बचाने के लिए इन बच्चों ने सौंप दी अपनी पॉकेट मनी

Childrens Day 2017 से पहले जानिए यहां के बच्चों की दिलेरी की कहानी, जिन्होंने बाल दिवस से पहले पेश की मिशाल, नन्ही सी जान को बचाने के लिए दे दी अपनी प

By: harinath dwivedi

Published: 10 Nov 2017, 04:19 PM IST

मुलताई/बैतूल। उस बच्ची को इस दुनिया में आए हुए कुछ दिन ही दिन हुए हैं अब वह गंभीर बीमारी से पीडि़त है। परिवार आर्थिक रुप से संपन्न नहीं है। ऐसे अब नगरवासियों ने उसे बचाने का बीड़ा उठाया है। इस कड़ी में उत्कृष्ट विद्यालय के कुछ विद्यार्थियों ने भी सहभागिता की और अपनी पॉकेटमनी के बचाए हुए करीब २५०० रुपए उस बच्ची के उपचार के लिए पिता को भेंट किए।

यह है मामला
नगर के महावीर वार्ड निवासी विनोद जैन के घर 28 अक्टूवर को एक प्यारी सी बच्ची ने जन्म लिया था। जिसकी तबियत लगातार बिगड़ रही है। उसे वरुड़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नवजात पुत्री के उपचार के सहयोग के लिए लगातार लोग सामने आ रहे हैं। बच्ची के उपचार के लिए करीब 70 हजार रुपए की जरूरत है अब तक 30 हजार रुपए मिल चुके हैं।

 

वरूड़ के निजी अस्पताल में भर्ती मुलताई के श्रमिक की बेटी की जान बचाने हर वर्ग के लोग सामने आ रहे हैं। गुरुवार को लोगों ने करीब 13 हजार रुपए से अधिक की राशि राशि बच्ची के पिता को दी। सबसे खास उत्कृष्ट विद्यालय के विद्यार्थियों ने अपनी पॉकेट मनी के करीब 2500 रुपए इस नन्ही जान को बचाने के लिए सौंपी। हनी सरदार ने बताया कि स्कूल के बच्चों में सेवाभावना का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होने चॉकलेट के लिए लाए पैसे भी बच्ची के उपचार के लिए दे दिए। बच्ची का उपचार सतत् चलता रहे इसलिए सहयोग करने वाले दूसरों से भी सहायता के लिए अपील कर रहे हैं।

इन्होंने की मदद : गुरूवार को नपा परिसर में साईंसेवा समिति तथा हनुमान सेवा समिति के मनीष शर्मा एवं चिन्टू खन्ना सहित युवाओं ने 8100 रुपए विनोद जैन को दिए। वहीं गौ क्रांतिदल के सदस्यों की पहल पर बसस्टेंड के व्यापारियों ने 3200 रुपए, अनुसया सेवा संगठन द्वारा 1100, रॉबिन सिंह द्वारा 1100 रुपए दिए। फिलहाल सहयोग करने के लिए लगातार लोग सामने आ रहे हैं।

इसलिए मनाते हैं बाल दिवस
चौदह नवंबर बाल दिवस के रूप में मनाने का औचित्य है कि पं. जवाहरलाल नेहरू बच्चों को देश का भविष्य मानते थे। उनकी यह अवधारणा सौ फीसदी सत्य है, क्योंकि आज जन्मा शिशु भविष्य में राजनीतिज्ञ, वैज्ञानिक, लेखक, शिक्षक, चिकित्सक, इंजीनियर या मजदूर कुछ भी बने आखिर राष्ट्र निर्माण का भवन इन्हीं की नींव पर खड़ा होता है। पं. नेहरू प्रौढ़ और युवाओं की तुलना में ज्यादा स्नेह और महत्व बच्चों को दिया करते थे। इसी भावना को समझते हुए समाज ने उन्हें चाचा नेहरू की उपाधि से विभूषित किया। इसलिए आज भी 14 नवंबर का दिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

बाल दिवस पर कार्यक्रम


- बच्चे को उपहार और चॉकलेट वितरित किये जाते हैं |
- कई तरह की प्रतियोगिताएं जैसे fancy dress, debates, speech related to the freedom fighters, country, storytelling और quizzes आयोजित की जाएँगी |
- गायन, नृत्य और अन्य संगीत वाद्ययंत्र के साथ मनोरंजक सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है |
- अनाथ बच्चों को कपड़े, खिलौने, संगीत वाद्ययंत्र, स्टेशनरी, किताबें, वितरित कर उनका मनोरंजन किया जाता है |
- स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित कुछ कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है |
- puzzle, sweet और sugar treasure hunt आदि कुछ खेल गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है |

harinath dwivedi Editorial Incharge
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