कलेक्टर ने एसडीएम को दी धमकी, रेत डंपरों पर जमकर झगड़े

कलेक्टर ने एसडीएम को दी धमकी, रेत डंपरों पर जमकर झगड़े
कलेक्टर ने एसडीएम को दी धमकी, रेत डंपरों पर जमकर झगड़े

poonam soni | Updated: 14 Sep 2019, 12:50:28 PM (IST) Hoshangabad, Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

बिना पावती 50 करोड़ रुपए की फाइल देने से एसडीएम ने कर दिया था इनकार

होशंगाबाद/ मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में गुरूवार देर रात एसडीएम और कलेक्टर के बीच एक फाइल को लेकर विवाद मचा। मामला पचास करोड़ के ऑफिसर्स क्लब की फाइल बिना पावती तहसीलदार को देने से मना करने के मामले में कलेक्टर और एसडीएम में ठन गई है। कलेक्टर ने रात को एसडीएम और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों को अपने बंगले पर बुलाया। एसडीएम को एफआईआर दर्ज करके जेल भेजने की धमकी दी। कर्मचारियों का बर्खास्त करने की धमकी देते हुए नस्ती पर हस्ताक्षर कराए। मामले में एसडीएम ने कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव को छह पेज का शिकायती पत्र भेज दिया है। जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख किया है।

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Video: कलेक्टर ने अपने ही एसडीएम को बनाया तीन घण्टे बंधक...जाने क्यों?

कलेक्टर से सीधी बात
प्रश्न: एसडीएम आप पर तीन घंट बंधक बनाने का आरोप लगा रहे हैं
-वो सब गलत है, उन्हें ऑफिशियल काम के लिए बुलाया गया था, इस दौरान ऑफिस के सभी लोग थे, एडीएम साहब थे, सभी थे। क्योंकि उनकी शिकायतें लंबे समय से आ रही थीं, इसलिए उनको हटाकर आदित्य रीछारिया को एसडीएम बनाया गया है

प्रश्न: एसडीएम रवीश श्रीवास्तव को लेकर किस तरह की शिकायतें थीं।
- प्रशासन को जांच कर शिकायतें भेजी जाएगी, मैं आपको नहीं बता सकता हूं। लेकिन समय आने पर सब बता दूंगा

प्रशन- आप पर मोबाइल फोन छीने जाने का भी आरोप है
- मोबाइल फोन की आप डिटेल निकला सकते हैं

प्रश्न: एसडीएम के आरोप थे कि अवैध रेत के परिवाहन पर कार्रवाई से रोकने की मंशा थी
- जब से वो कार्यरत हैं या कोई भी अधिकारी हो जिनको कार्रवाई करने से रोका गया है। बल्की मैं हमेशा टीएल में शासन की मंशा अनुसार कार्रवाई करने को कहता हूं। यहीं कारण है कि होश्ंागाबाद में अवैध रेत को लेकर सबसे अधिक कार्रवाई हुई है।

प्रश्न : 8 ईटीपी कैसे जारी हुई और कैसे बंद हुई
- शासन स्तर पर शुरू हुई थी और वहीं बंद कर दी गई

प्रश्न : ऑफिसर क्लब की फाइल उपलब्ध नहीं कराना और रेत विवाद का कारण है
- रेत को तो अनावश्यक जोड़ा गया है, अगर ऑफिसर क्लब की फाइल उपलब्ध नहीं कराएंगे तो शासन का नुक्सान होगा

इस जमीन को लेकर था दोनों अफसरों के बीच तकरार
कलेक्टर और एसडीएम के बीच रेत के साथ ही पाचस करोड़ की ऑफिसर क्लब की विवादित भूमि को लेकर भी तनातनी थी। इसकी फाइल कलेक्टर ने तहसीलदार को सौंपने का कहा था, लेकिन एसडीएम बिना पावती के नहीं सौंप रहे थे। हालांकि तहसीलदार के पावती देने पर उन्हें फाइल दे दी गई थी, लेकिन उसकी एक कापी कराकर एसडीएम ने अपने पास रख ली थी। इससे कलेक्टर नाराज थे।

यह है वो जमीन

जिला प्रशासन के अधिकारियों की मानें तो २ एकड़ कि भूमि का पट्टा सबसे पहले सेवानिवृत चीफ जस्टिस तारे के नाम पर थी। इसके बाद इन्होंने भूमि की बसीयत दीपक जैन को कर दी। लेकिन भूमि का लंबे समय तक कोई उपयोग नहीं हो सका। इसके बाद जिला प्रशासन को वर्ष 1995 में सबसे पहले नजूल की यह भूमि ध्यान में आई। वर्ष 1996 में इस भूमि की शासन ने शर्तों को नहीं मानने के कारण लीज निरस्त कर दी थी। इसके बाद शासन ने वर्ष 2002 में सबसे पहले पूरी भूमि पर कब्जा लिया। वर्ष 2006 में शासन के इस निर्णय के विरोध में सबसे पहले दिल्ली के दीपक जैन हाईकोर्ट चले गए। तब से ऑफिसर क्लब की भूमि का मामला कोर्ट में है।

दूसरे दिन तहसीलदार को जबाव बनवाने किया रवाना :

विवाद होने के बाद तहसीलदार शैलेंद्र बडोनिया को ऑफिसर क्लब की फाइल लेकर जबलपुर रवाना किया गया है। वो वहां पर महाअधिवक्ता से पूरे मामले को लेकर जबाव तैयार कराएंगे। कलेक्टर मामले को अपने पक्ष में करने की तैयारियां कर रहे।

जबलपुर में महाअधिवक्ता को फाइल अवलोकन कराकर जबाव तैयार कराने आया हूं। मामला काफी पुराना है, इसलिए तथ्य आगे भी जुटाने होंगे।
शैलेंद्र बडोनिया, तहसीलदार

मुझे अभी किसी तरह की जानकारी नहीं है। अगर एेसा विवाद हुआ है तो दोनों पक्षों को बुलाकर बात करूंगा।
रवींद्र मिश्रा, आयुक्त नर्मदापुरम

यह है पूरा घटनाक्रम...
रात 9.29 बजे
कलेक्टर ने दूरभाष पर नजूल शाखा से संबंधित ऑफ ीसर्स क्लब वाली नस्ती और प्रकरण की 4 फ ाइलें तुरंत तहसीलदार होशंगाबाद को देने का फरमान सुना दिया। कहा-महाधिवक्ता द्वारा जवाब तैयार करने प्रकरण जबलपुर बुलाया गया है। मैंनें तत्काल रीडर गजेंद्र को फ ोन करके पावली प्राप्त कर प्रकरण तहसीलदार को देने के लिए कहा। रीडर ने मुझे बताया तहसीलदार शैलेंद्र बडोनिया द्वारा रसीद देने से मना कर दिया गया है। उनके द्वारा यह कहा गया कि मैं अपने व्यक्तिगत कार्य से जबलपुर जा रहा हूं और प्रकरण तो मैं अपने साथ ऐसे ही लेकर जा रहा हूं। एसडीएम ने बिना लिखित प्रमाण के किसी को भी न सौंपा जाए कहकर एसडीएम गणेश विसर्जन व्यवस्था देखने भ्रमण पर रवाना हो गए।

रात 11.०० बजे
एसडीएम को फोन करके प्रवाचक ने बताया कि बडोनिया ने यह लिखित में दे दिया है, कि वह यह प्रकरण लेकर जबलपुर जा रहे हैं। तब मैंने उन्हें संपूर्ण नस्ती सौंपने हेतु निर्देशित किया। इसके बाद एसडीएम बांद्राभान स्थित विसर्जन स्थल पहुंचे। लौटते वक्त कुलामणि रोड स्थित वैभव शर्मा के स्टॉक पर 50 ट्रक खड़े और कुछ रेत से लदे वाहन जाते देखकर जानकारी लेने रुका। शाम 6 बजे से ही सारे रॉयल्टी पोर्टल बंद कर दिए थे। पूछताछ करने पर बताया कि ट्रक शाम 7 बजे से खड़े हैं, जिससे यह स्पष्ट था कि रात में रेत भरकर उन्हें भेजा जाएगा। एसडीएम ने तत्काल माइनिंग इंस्पेक्टर अर्चना ताम्रकार एवं नायब तहसीलदार ललित सोनी को फ ोन कर मौके पर उपस्थित होने निर्देशित किया। खनिज निरीक्षक मौके पर डेढ़ घंटे बाद भी नहीं पहुंची।

रात 12.29 बजे
बंगले से कलेक्टर ने एसडीएम को फोन किया और तुरंत बंगले पर बुलाया। एसडीएम ने नायब तहसीलदार से कहा मुझे कलेक्टर ने बुलाया है आप यहां आकर ट्रकों पर कार्रवाई करें। एसडीएम को सोनी ने बताया कि उन्हें भी कलेक्टर ने बंगले पर तुरंत आने के लिए कहा है। इसी वजह से ट्रकों पर एसडीएम या नायब तहसीलदार द्वारा कार्रवाई नहीं की जा सकी। कलेक्टर बंगले पहुंचने पर एसडीएम ने देखा कि कलेक्टर नायब तहसीलदार से किसी बयान पर दस्तखत करवा रहे थे। कलेक्टर ने रीडर गजेंद्र एवं बाबू नवीन आदि स्टाफ को बुलवा लिया। उनसे बोल रहे थे कि साइन नहीं करोगे तो बर्खास्त कर दूंगा। तहसीलदार शैलेंद्र बडोनिया भी यहां मौजूद थे। एसडीएम को एफआईआर दर्ज करके जेल भिजवाने की चेतावनी दी।

अभद्रता की, चाबी छीन ली...
एसडीएम ने शिकातय पत्र में बताया कि कलेक्टर ने अभद्र भाषा का उपयोग करते हुए झूठे प्रकरणों में फंसाने की धमकी दी। कलेक्टर के आदेश पर उनके दो सिपाही मेरी गाड़ी के सामने खड़े हो गए और मेरे ड्राइवर मोहित को पकड़कर खींच कर गाड़ी से बाहर निकाल लिया। गाड़ी की चाबी निकालकर रख ली।

कलेक्टर की रेत और एसडीएम की भ्रष्टाचार को लेकर की शिकायत
शुक्रवार को एसडीएम के खिलाफ होशंगाबाद बिल्डर्स एसोसिएशन प्रभारी मंत्री पीसी शर्मा से मिला। एसोसिएशन अध्यक्ष चंद्रभान सिंह ठाकुर ने बताया कि लगातार कॉलोनाइजरों को धमकाकर एसडीएम पर वसूली को आरोप लगाया। मामले में प्रभारी मंत्री ने कहा बिल्डर्स ने कलेक्टर पर रेत के अवैध परिवहन को बढ़ावा देने और एसडीएम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।

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