होशंगाबाद। शहर अतिक्रमण की चपेट में है और अफसर बेबस। नतीजा शहरवासी परेशान। इसी परेशान को देख कोर्ट सड़क पर उतरी तो ताबड़तोड़ सभी अधिकारी भी एक्शनमोड में आ गए। शहर में अतिक्रमण और नगर पालिका एवं अफसरों की बेबसी को देखते हुए मंगलवार को खुद अदालत सड़क पर उतर आई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेश अग्रवाल ने सरे बाजार अफसरों की जमकर खबर ली। 14 दुकानों के लाइसेंस सस्पेंड करने के निर्देश दिए। 56 दुकानों से अतिक्रमण हटवाया, उन्हें नोटिस जारी किए। 19 वाहनों के चालान बनाएं। तीन होटल से नौ घरेलू सिलेंडर जब्त किए। सड़क पर अतिक्रमण देख साथ चल रहे नपा सीएमओ अमरसत्य गुप्ता से कहा- रोड पर माल (लोहे के सरिया) कैसे रखा है। लावारिस समझकर ही रात में उठा ले जाते। अभी जब्त करो। खाद्य अमले को फटकरते हुए कहा-बीच शहर में बिना लेबलिंग के बिस्किट और टोस्ट पैक कर बेंचे जा रहे हैं, आप लोग क्या काम कर रहे हो समझ नहीं आ रहा। अगर आपके विभाग का कोई मंथली बंधा हो तो भूल जाएं। अब मैं स्वयं इसकी मॉनिटरिंग करुंगा।
मजिस्ट्रेट के यह तेवर देखकर अधिकारियों और दुकानदारों में हड़कंप मच गया। दोपहर ढाई बजे से शुरू हुई कार्रवाई शाम पांच बजे तक चली। सीजीएम ने व्यवसायियों से कहा कि दुकान के बाहर एक फीट भी अतिक्रमण नहीं होना चाहिए, मैं कल फिर चेक करने आऊंगा। सड़क पर पड़े सरिया की दावेदारी करने भी कोई नहीं आया। चलित न्यायालय ने नपा की दुकानों को अतिक्रमण मुक्त कराया। नपा की निर्माणाधीन दुकानों में घोड़े बंधे मिले थे, जिन्हें कांजी हाउस भिजवाया। नपा की 1४ दुकानदारों ने अपनी मनमर्जी से निर्माण कार्य किया था, उनकी दुकानों का अनुबंध निलंबित करने के निर्देश दिए। करीब ५६ दुकानदारों को नपा की दुकानों के फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने और कुछ को बढ़ाई शटर को पीछे करने के लिए नोटिस जारी किए जा रहा हैं। चलित न्यायालय के सीजीएम के साथ मजिस्ट्रेट पलक राय और विजय पाठक भी थे।

 

 

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