सोशल मीडिया पर बेटी ने पहचानी अपने पिता की लाश, जानें क्या है मामला

सोशल मीडिया पर बेटी ने पहचानी अपने पिता की लाश, जानें क्या है मामला

pradeep sahu | Publish: Sep, 09 2018 08:00:00 AM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

अंधे कत्ल का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार

पिपरिया. पुलिस ने बीस दिन पहले हुए अंधे कत्ल का पर्दाफाश कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों ने बीस हजार के लालच में हत्या कर लाश नग्न कर झाडिय़ों में छिपा दी थी। पुलिस ने शव की पहचान के लिए फोटो सोशल मीडिया पर वायरल किया था, जिसे देखकर मृतक की बेटी ने पहचान लिया। इसके बाद हत्या का खुलासा हुआ। आरोपी मृतक का दोस्त निकला। उसने पुलिया से धक्का देकर पहले सूख चुकी नदी में गिराया फिर लाठियों से पीट-पीटकर हत्या कर दी। लाश ठिकाने लगाने में उसके एक दोस्त ने मदद की। एसपी अरविंद सक्सेना ने बताया कि दोनों आरोपियों रामभरोस कीर और सत्यनारायण दीक्षित उर्फ बाबा को गिरफ्तार कर लिया है। पिपरिया पुलिस को 19 अगस्त की रात को माता मोहल्ला नहर ग्राम सिलारी के पास सूखी नदी के पुल के नीचे एक अज्ञात व्यक्ति का नग्न हालत में शव मिला था। उसके शरीर पर चोट के निशान थे। लाश चार पांच दिन पुरानी थी और कचरे के ढेर से ढकी गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लाठियों से पीटकर और गला दबाकर हत्या करना आया था। एसपी अरविंद सक्सेना ने जांच दल को दस हजार रुपए देने की घोषणा की है।

20 हजार के लालच में की हत्या - एसपी ने बताया कि मृतक की पहचान चालीस वर्षीय चरणदास पुत्र श्यामलाल लोधी निवासी ग्राम माछा, सोहागपुर के रूप में हुई। उसे उसकी छोटी बेटी ने सोशल मीडिया पर तस्वीर देखकर पहचाना। चरणदास की तीन बेटियां हैं। पत्नी का निधन हो चुका है। चरणदास ने पचमढ़ी में नागद्वारी मेले में दुकान लगाई थी, जहां से उसे 40 हजार की आमदानी हुई थी। मेले में ही 20 हजार रुपए उसने अपनी तीनों बेटियों को बांट दिए थे। शेष 20 हजार अपने पास रख लिए थे। बेटियों को ससुराल भेजकर वह दोस्त रामभरोसे के साथ गांव के लिए रवाना हो गया था। रास्ते में दोनों ने सत्यनारायण बाबा की कुटिया पर शराब पी और मछली खाई। इस दौरान रामभरोसे को उसके बीस हजार रुपए पर लालच आ गया। वह उसे बहाने से बुलाकर पुलिया पर ले गया और नीचे धक्का दे दिया। गिरने के बाद भी नहीं मरा तो लाठियों से सीने पर बार कर पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद भागकर वापस कुटिया में आया। सत्यनारायण दीक्षित को साथ ले जाकर दोनों ने उसके कपड़े उतारे और फिर झाडिय़ों में छिपा दिया था। शव की पहचान होने के बाद बेटी ने बताया कि वह रामभरोसे के साथ गांव के लिए निकले थे। इस आधार पर उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने जुर्म स्वीकार कर लिया।

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