नहीं बना बाजार तो करेंगे विधानसभा चुनाव का बहिष्कार

नपा के खिलाफ धरने में की नारेबाजी

By: poonam soni

Published: 16 May 2018, 02:18 PM IST

इटारसी. मत्स्य व्यापारी संघ को कई सालों से स्थाई मछली बाजार बनाकर देने का लॉलीपॉप देती आ रही नगरपालिका के खिलाफ मंंगलवार को मछली व्यवसायियों का गुस्सा फूटा। व्यवसायियों ने अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया और नगरपालिका के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। मत्स्य व्यापारी संघ ने मांगें पूरी नहीं होने की दशा में विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने की भी चेतावनी दे डाली।
धरना कार्यक्रम में मौजूद संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कहा कि नपा से उन्हें बस आश्वासन ही मिल रहे हैं। स्थाई मछली मार्केट बनाने की दिशा में कोई काम नहीं हो रहा है। संघ के अध्यक्ष मोहन रायकवार ने धरना कार्यक्रम में कहा कि नपा शहर में तमाम विकास कार्य कर रही है मगर जब स्थाई मछली बाजार की बात आती हे तो उनकी मांग की अनदेखी हो जाती है इसी वजह से यह आंदोलन करना पड़ा। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती है तो मत्स्य व्यापारी संघ द्वारा विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा। संघ की ओर से सीएमओ को दो सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा गया।

मत्स्य व्यापारी संघ ने ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांगें रखीं हैं। जिनमें प्रमुख मांग स्थाई मछली मार्केट जल्द से जल्द बनाने की है। यदि संघ की मांगों की सुनवाई नहीं होती है तो संघ और उनके परिजन विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
मोहन रायकवार, अध्यक्ष मत्स्य व्यापारी संघ इटारसी
मामले में बैठक कर निराकरण करेंगे
&संघ की तरफ ज्ञापन आया है। हम जल्द से जल्द से इस मामले में एक बैठक करेंगे और इस समस्या का निराकरण करने का प्रयास करेंगे।
अक्षत बुंदेला, सीएमओ
एक करोड़ से प्रस्तावित है मछली बाजार
मत्स्य व्यापारी महासंघ की मांग पर नगरपालिका ने 20 जनवरी 2015 को पीआईसी की बैठक में स्थाई मछली मार्केट बनाने का प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव में दो मंजिला मछली मार्केट बनाने का प्रावधान था जिसमें मटन मार्केट भी शामिल था। 17 अप्रैल 2017 को नपा के बजट सम्मेलन में इस मछली बाजार के लिए 1 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया गया था मगर अब तक कहीं कुछ नहीं हुआ है।
७४ साल पुराना बाजार
शहर का मछली बाजार ७४ साल पुराना है। स्थाई मार्केट नहीं होने से मत्स्य व्यापारी टपरे और झोपड़ों में मछली बेचने का व्यवसाय करते आ रहे हैं। गर्मी और बरसात में उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत उठाना पड़ती है। बरसों से मत्स्य व्यापारी संघ को सुव्यवस्थित मछली बाजार बनाकर देने की बात हो रही है मगर उस पर अमल नहीं हो रहा है।

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