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स्कूली विद्यार्थियों सहित ग्रामीणों का हुआ दंत परीक्षण, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी दी

डोंगरवाड़ा में जारी राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर में दंत परीक्षण

होशंगाबाद

Published: December 22, 2021 12:19:57 pm

होशंगाबाद- होमसाइंस कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना का सात दिवसीय शिविर गोद ग्राम डोगरवाड़ा में जारी है। मंगलवार को कॉलेज प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन के मार्गदर्शन में मतदान जागरूकता एवं दंत परीक्षण कार्य किया गया। राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हर्षा चचाने, डॉ. रीना मालवीय के नेतृत्व में शिविर की दैनिक दिनचर्या अनुसार प्रभात फेरी निकाली गई। कॉलेज के योग शिक्षक रघुवीर राजपूत द्वारा पीटी योग एवं परेड का अभ्यास कराया गया। परियोजना कार्य के अंतर्गत स्वयं सेविकाओं द्वारा मतदाता जागरूकता अभियान चलाया। स्वयं सेविकाओं में गांव के मुख्य चौराहे में मतदान जागरूकता के लिए नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया। कॉलेज की छात्रा दीया मेहरा आज संस्थान द्वारा बच्चों को गुडटच, बेडटच के बारे में बताया। मंगलवार को शिविर के दौरान नि:शुल्क दंत परीक्षण कराया गया। दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. शांतनु श्रीवास्तव द्वारा ग्रामीणों का दंत परीक्षण किया गया। बौद्धिक सत्र में डॉ. हंसा व्यास ने बताया कि छात्राओं को सभी बाते अपने माता पिता से साझा करना चाहिए। माता पिता हमारी सबसे पहले गुरू होते है इसलिए अपने माता पिता का सम्मान करों। कार्यक्रम में डॉ. रश्मि श्रीवास्तव, डॉ. कचन ठाकुर, डॉ. रागिनी सिकरवार, डॉ. कीर्ति दीक्षित, प्रीति ठाकुर, डॉ. नीतू पवार, डॉ. संगीता पारे, रफीक अली सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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छात्राओं ने सीखा वर्मी कंपोस्ट बनाना
होशंगाबाद-मंगलवार को होमसाइंस कॉलेज में प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन के निर्देशन में वर्मी कंपोस्ट प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया। प्राचार्य डॉ. जैन ने बताया कि विगत 6 वर्षों से कॉलेज में वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन किया जा रहा है। केंचुए के द्वारा बनाई जैविक खाद को वर्मी कंपोस्ट कहते हैं। वनस्पति शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रागिनी सिकरवार एवं डॉ. मनीष चंद्र चौधरी ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट उत्पादन हेतु गोबर, काली मिट्टी,कॉलेज परिसर के पेड़ पौधों से गिरी हुई सूखी पत्तियां, फूलों एवं भोजन अपशिष्ट को कच्ची सामग्री के रूप में उपयोग किया जाता है। इनसेनिया फिटिडॉ नामक प्रजाति के केचुए जिन्हें सामान्यत: रेड बिंगलर अथवा रेडवर्म के नाम से भी जाना जाता है, को वर्मी कंपोस्टिंग हेतु उपयोग किया गया है। वर्मी कंपोस्टिंग हेतु 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान एवं 30 से 40 प्रतिशत नमी आदर्श होती हैं, और वर्मी कंपोस्ट को तैयार होने में लगभग 3 से 4 माह का समय लगता है। इस अवसर पर डॉ. रश्मि श्रीवास्तव, प्रीति ठाकुर, आशीष सौहगोरा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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