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कमाऊपूत पंचायतों से करोड़ों की आय होने के बाद भी नहीं मिल पाती रेत की कमाई

पीला सोना के राजस्व से वंचित होशंगाबाद जिला, कहने को कमाऊपूत पंचायतें, करोड़ों की आय लेकिन नहीं मिलती रेत की कमाई, हर माह शासन को होती है जिले की रेत से 24-25 करोड़ की रायल्टी बतौर आय, जिले मे तीन साल के लिए संचालित हो रही है 262 करोड़ की 118 रेत खदानें,रेत वाली पंचायतों को रेत राजस्व सीधे नहीं मिलने से विकास-निर्माण अटके पड़े

होशंगाबाद

Published: October 16, 2021 11:38:42 am

देवेंद्र अवधिया
होशंगाबाद. पहले जिले की रेत खदानों यानी पीला सोना वाली पंचायतों को सीधे रेत से अर्जित राजस्व का हिस्सा मिलता था, लेकिन कुछ सालों से इसे बंद कर दिया जबकि कहने को जिले की 25 कमाऊपूत पंचायतें हैं, लेकिन रेत खदानों से खनन-परिवहन से होनी वाली करोड़ों की आय में से विकास-निर्माण तो दूर योजनाओं के निर्माण कार्यों के लिए भी मुफ्त में रेत तक नहीं मिलती। बीते सालों से शासन स्तर से भी खनिज राजस्व की करोड़ों की यह राशि होशंगाबाद जिले को अब तक नहीं मिल सकी है, जिसके कारण पंचायतों में विकास-निर्माण अटके पड़े हैं। इनमें मुख्य रूप से पक्की सड़कें-नालियां, नदी-तट के पहुंच मार्ग सहित अन्य बड़े काम शामिल हैं। पंचायतें योजनाएं के अन्य फिक्स मदों पर ही निर्भर है। विकास-निर्माण समय पर नहीं हो पाते। जिले में कुल 118 रेत खदानें है, जो 262 करोड़ में तीन साल के लिए ठेके पर दी गई है, लेकिन इनमें से 12 खदानें ही चालू हो सकेंगी। ठेका कंपनी प्रतिदिन एक करोड़ और प्रतिमाह करीब 24 करोड़ का रायल्टी टैक्स सरकारी खजाने में जमा करती है. लेकिन कंपनी को भी सुविधाएं नहीं मिल रही। माफियाओं व्दारा किए जाने वाला रेत का अवैध खनन सबसे बड़ी समस्या है।

जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में 118 खदानें हैं। इनमें से 59 खदानें संचालित हैं। बाकी की खदानें बंद चल रही है। पहले जिन पंचायतों के क्षेत्र में रेत का खनन होता था, उनके सीधे-सीधे खाते में रायल्टी मिलती थी। कुछ वर्षों से अब माइनिंग हेड 0853 में यह राशि जमा होती है। ये सीधे राज्य शासन को जाती है। फिर राज्य शासन ही तय करता है कि कितनी राशि पंचायतों को देना है,लेकिन यह राशि बीते साल से रेत वाली पंचायतों को भी नहीं मिली है। यह राशि करोड़ों में है। सूत्रों की मानें तो करीब 24 करोड़ की राशि से खुद कमाऊपूत पंचायतें ही वंचित चल रही हैं।

50 फीसदी पंचायतों में होता है खनन
जिले की पचास फीसदी ऐसी पंचायतें और उनके गांव हैं जहां खदानों में रेत का का खनन होता है। इन गांवों की संख्या करीब 118 से अधिक है। यहां की वैध खदानों से खनिज निगम-विभाग के जरिए शासन को करोड़ों की आय मिलती है। पिछले करीब दस माह से ठेके पर खदानें संचालित है। ठेका कंपनी आरकेटीसी चला रही है। यह ठेका 15 जनवरी 2021 से चल रहा है। इसकी अवधि तीन साल है। कंपनी प्रतिमाह करीब 24 करोड़ यानी हर दिन करीब 80 लाख रुपए की रायल्टी राशि जमा करती है।

जिले में 45 ही स्वीकृत हैं रेत खदानें
जिले में कुल 118 रेत खदानों में से 45 ही स्वीकृत है। इनमें से बारिशकाल एवं एनजीटी की रोक लगने से पहले करीब 27-28 खदानें ही संचालित हो सकी है। बाकी की खदानें बंद रहीं। बारिशकाल में एनजीटी की रोक के कारण साढ़े तीन माह खदानें बंद ही रहीं। जिले में चालू अक्टूबर माह में एनजीटी की रोक हटने के बाद ठेका कंपनी की 24 खदानें शुरू करने की प्लानिंग है। नर्मदा-तवा के तट-खदानों में पानी घटने रेत निकलने के बाद ये शुरू हो पाएंगी, लेकिन 24 अक्टूबर से जिले में तवा बांध की नहरें चालू होने जा रही है। इस कारण इनमें से कुछ खदानें चालू होने में देरी होगी।

ये हैं कमाऊपूत ग्राम पंचायतें
तवा-नर्मदा, दूधी, आंजन, मोरन, हथेड़, सुखतवा, खाहरा, गंजाल नदियों से जुड़ी पंचायत व ग्रामों में रायपुर, निमसाडिय़ा, मेहराघाट-होरियापीपर, रजौन, सांगाखेड़ा खुर्द, मरोड़ा, रामगढ़, सुरेलाकला, बैदर, डोंगरवाड़ा, चपलासर, जावली, केसला, माल्हनवाड़ा, सोमलवाड़ा, कामती, बाबरी, सांगाखेड़ा कला, आंचलखेड़ा, पवारखेड़ा खुर्द, गूजरवाड़ा, पाहनवर्री, ग्वाड़ीकला, डिमावर, नवलगांव, रेवा वनखेड़ी, मदनपुर, खापरखेड़ा, ढांढिया किशोर, रामपुर, अन्हाई, परसवाड़ा, उमरधा, पिपरिया राजा आदि शामिल हैं।

सालों से नहीं मिला मजदूरों को भी बोनस
जिले में करीब 5 हजार मजदूर रेत खदानों की मजदूरी से जुड़े हुए हैं। ये सभी ग्रामीण इलाके के हैं, लेकिन इन्हें भी सालों से रेत की आय से बोनस राशि का वितरण भी नहीं हो सका है। यह राशि मजदूरों को वर्ष 2019 से नहीं मिल रही है। मजदूरी सिर्फ रोजाना की मजदूरी-मुकद्दमी की आय पर निर्भर हैं। भारतीय मजदूर संघ के संयोजक भगवत शर्मा बताते हैं कि कई बार मंत्री व जिले के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन बोनस राशि का वितरण नहीं हो रहा है।

जिले में कुल खदानें : 118
कुल रेत वाली पंचायतें: करीब 25
खदानों का कुल रकबा: 1540.071 हैक्टेयर
कुल रेत की मात्रा: 4759768
रेत ठेका की कुल राशि : 262 करोड़
खदानों की वैधता तिथि : 31.12.2021
ठेका संचालक अवधि : तीन साल
प्रतिमाह रायल्टी आय : करीब 24 करोड़

इनका कहना है..
जिले में पंचायतों के अंतर्गत कुल 118 खदानें आती है। रेत राजस्व की राशि शासन स्तर से तय होती है। पंचायतों को जल्द ही राशि मिलने जा रही है। कितनी राशि मिलेगी यह बता अभी संभव नहीं है। जो भी राशि मिलेगी उससे पंचायतों के विकास कार्य कराए जाएंगे।
-मनोज सरियाम, सीईओ जिला पंचायत होशंगाबाद

जिले का रेत का पूरा राजस्व 0853 शासन के माइनिंग हेड में जमा होता है। शासन स्तर से ही इसका आवंटन होता है। जिले के आवंटन की स्थिति की जानकारी दिखवाई जाएगी।
-शशांक शुक्ला, जिला खनिज अधिकारी होशंगाबाद

कमाऊपूत पंचायतों से करोड़ों की आय होने के बाद भी नहीं मिल पाती रेत की कमाई
कमाऊपूत पंचायतों से करोड़ों की आय होने के बाद भी नहीं मिल पाती रेत की कमाई

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