लॉकडाउन का असर:शर्मिले हुए एसटीआर के जानवर, गश्ती दल देखकर छिपने लगे

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जानवरों के व्यवहार में आया बदलाव

होशंगाबाद। कोरोना वायरस के कारण देशभर में जारी लॉकडाउन से जहां इंसानों की दिनचर्या में बड़ा बदलाव आया है, वहीं सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के जानवरों में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। जो बाघ और अन्य जानवर पहले पर्यटकों को देखकर भी विचलित नहीं होते थे, वे अब शर्मिले होने लगे हैं। गश्ती दल को देखकर ही जंगल की तरफ भाग जाते हैं। इतना ही नहीं जंगल से बाहर निकलकर इंसानों पर भी हमला कर रहे हैं। हाल ही में एक तेंदुए ने चौकीदार पर सोते समय हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया था।

पहले पर्यटकों के वाहनों को देखकर हटते नहीं थे जानवर

एसटीआर संचालक एसके सिंह बताते हैं कि लॉकडाउन के कारण पर्यटन पर भी प्रतिबंध है। इसका असर भी जानवरों में दिखने लगा है। एसटीआर के जानवरों के व्यवहार में बदलाव देखा जा रहा है। वह अब शर्मिले हो रहे हैं। पहले पर्यटकों के वाहनों को देखकर जो जानवर हटते नहीं थे, वो अब कोई भी मूवमेंट देख छिप रहे हैं। हालांकि हमारे पार्क में आक्रमक बाघ एवं अन्य जानवर नहीं हैं। लेकिन हाल ही में मटकुली में एक मात्र एेसी घटना है जब तेंदुआ ने जंगल से बाहर निकलकर चौकीदार पर हमला किया है।

लॉकडाउन का असर:शर्मिले हुए एसटीआर के जानवर, गश्ती दल देखकर छिपने लगे

पार्क के बाहर तक आ रहे जानवर

एसटीआर के जानवर अब बेफिक्र दिख रहे हैं। उनका मूवमेंट जंगल से बाहर तक देखा जा रहा है। जंगल के अंदर रहने वाले बाइसन पार्क के बाहरी हिस्से में देखे जा रहे हैं। एसटीआर में बुलबुल की आदि चिडिया के चहचहाट काफी साफ सुनाई दे रही है। पार्क में तरह-तरह की तितलियां भी पार्क में मंडरा रही हैं। एसटीआर से मिली जानकारी के अनुसार अब एसटीआर के जानवर पहले से शर्मिले हो गए हैं, जो जानवर पहले जिप्सी-गाडि़यों और पर्यटक के आदि हो चुके थे। अब मॉनिटरिंग के लिए जाने वाले वन अधिकारी और कर्मचारियों को देख छुप रहे हैं।
पार्क के बंद होने के कारण मॉनिटरिंग में अधिक स्टॉफ
एसटीआर बंद होने के कारण अब एसटीआर के अधिकारियों को मॉनिटरिंग में ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है। एसटीआर के संचालक ने बताया कि पार्क बंद होने से रात के साथ दिन में गश्त को बढ़ाया गया है। जिसके जानवरों की सही तरह से मॉनिटरिंग किया जा सके। एसटीआर में करीब ५५ बाघ-बाघिन हैं। जिनमें कॉलर आईडी सिर्फ दो को लगाई गई है। बाकि की मॉनिटरिंग उनकी टेरोटरी के मुताबिक की जाती है।

पेट्रोलिंग में सामाजिक दूरी का हो रहा अनुपालन
प्रदेश में कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए 23 मार्च से लॉक डाउन लगा हुआ है। लॉकडाउन के लगने के बाद से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में पेट्रोलिंग को तेज कर दिया गया है। 24 घंटे-सातों दिन की तर्ज पर तीन शिफ्ट में जीप, बाइक और पैदल पेट्रोलिंग की जा रही है। इसमें सामाजिक दूरी का अनुपालन किया जा रहा है।

लॉकडाउन का वनों, वन्य जीव पर प्रभाव का रिपोर्ट देने का निर्देश
लॉकडाउन के दौरान उच्चाधिकारियों से का गैर वन क्षेत्र, वन क्षेत्र, संरक्षित वन,वन्य जीव, चिडिया और तितलियों पर क्या प्रभाव पड़ा है, इसका विश्लेषण कर रिपोर्ट भेजने को कहा गया था। जिसकी उच्चाधिकारियों को भी रिपोर्ट भेजी गई है।पेट्रोलिंग में सामाजिक दूरी का हो रहा अनुपालनप्रदेश में कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए 23 मार्च से लॉक डाउन लगा हुआ है। लॉकडाउन के लगने के बाद से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में पेट्रोलिंग को तेज कर दिया गया है। 24 घंटे-सातों दिन की तर्ज पर तीन शिफ्ट में जीप, बाइक और पैदल पेट्रोलिंग की जा रही है। इसमें सामाजिक दूरी का अनुपालन किया जा रहा है। एसटीआर से मिली जानकारी के अनुसार गश्त के लिए संख्या नही बढ़ी है। लेकिन कर्मचारी पहले से अधिक समय दे रहे हैं। पहले पर्यटकों के होने के कारण सुबह शाम की गश्त सामान्य होती थी। लेकिन अब इन गश्तों का समयकाल बढ़ाया गया है। जिसका अनिवार्य तौर पर पालन करना होता है।

बाघों ने नहीं बदला ठिकाना

एसटीआर ने जानवरों के पीने के पानी के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं जंगल में ही की थी। इसलिए यहां किसी बाघ के एसटीआर से बाहर निकलने की सूचना नहीं मिली। लेकिन मटकुली में एक कर्मचारी तेंदूए का शिकार हुआ है। एसटीआर के अधिकारियों का कहना है कि जिस क्षेत्र में तेंदूए ने हमला किया है, वहां जनवरों का मूवमेंट काफी लंबे समय से है। जिस कर्मचारी पर तेंदूए ने हमला किया है, वो खर्राटे लेता था। ऐसे में तेंदूए ने धोखे में हमला किया था। हमारे यहां जानवर हिंसक नहीं हुए हैं।
फैक्ट फाइल
एसटीआर और पचमढ़ी अभयारण्य - १४२७ वर्ग किलोमीटर
यह हैं जानवर- यहां जानवरों में बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, भेडकी, नीलगाय, चौसिंगा, चिंकारा, गौर, जंगली सुअर, जंगली कुत्ता, भालू, काला हिरण, लोमड़ी, साही, उडऩ गिलहरी, मूषक मृग और भारतीय विशाल गिलहरी आदि पाये जाते हैं।
पक्षियों - इसमें अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें धनेश और मोर प्रमुख हैं।

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बृजेश चौकसे
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