चार घंटे चली समीक्षा बैठक में निर्णय : नर्मदा तटों से जल्द हटेंगे अतिक्रमण, टूटी फेंसिंग सुधरेगी

सीईओ ने की पिछले पौधरोपण की समीक्षा, नए लक्ष्य तय किए

By: sandeep nayak

Published: 06 Jan 2020, 12:05 PM IST

होशंगाबाद/नर्मदा के रिपेरियन जोन में कुछ तटों के पौधरोपण की हालत बेहद खराब है, तो कुछ की अच्छी स्थिति है। नर्मदा तटों पर बेजा अतिक्रमण हो गए हैं और फेंसिंग और पौधों और बोर्डों को भी उखाड़ कर फेंक दिया गया है। यहां गांवों के दबंग इस पर खेती कर रहे हैं। इस संबंध में समीक्षा के बाद जिला पंचायत सीईओ आदित्य सिंह ने निर्देश दिए हैं कि उक्त बेजा कब्जों और अतिक्रमणों को अभियान चलाकर जल्द ही सख्ती से हटवाया जाएगा। दोषियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाएंगे। रविवार को जिपं सभाकक्ष में पांच घंटे तक चली बैठक में 36 पंचायतों 68 गांवों के सरपंच-सचिव, सहायक यंत्री और रोजगार सहायक सहित नर्मदा परिवार के करीब 300 सदस्य, समाजसेवी शामिल हुए। जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक कौशलेंद्र तिवारी ने पौधरोपण के कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। जिन तटों पर पौधे नष्ट हो गए हैं, वहां नए सिरे पौधरोपण की योजना भी तैयार की गई।

इन तटों पर हुआ नुकसान
रिपेरियन जोन के खैरा, सांडिया, पिपरिया, सिवनी में पौधों को नुकसान हुआ है। 2 लाख से अधिक पौधों और तीन करोड़ बीजों का रोपण किया गया था। इनमें से करीब 80 हजार पौधे पनपने से पहले ही नष्ट हो गए। अधिकांश बीज बाढ़ में बह गए, लेकिन कुछ जगह बीजों से पौधे पनपे हैं। होशंगाबाद के बांद्राभान, डोंगरवाड़ा, हासलपुर, रंढाल, बरंडुआ, तालनगरी, खोकसर, खरखैड़ी में सबसे खराब स्थिति है। यहां सरपंच-सचिवों की लापरवाही से पौधों नष्ट हो गए और फेंसिंग भी टूट गई। कतिपय तत्वों ने कब्जे कर यहां मवेशियों से पौधे चरवा दिए और खेती करनी शुरू कर दी। यहां जनपद सीईओ ने भी रूचि नहीं ली। भैला में पौधे जला दिए गए और बोर्ड उखाड़कर फेंक दिए हैं।
इन तटों पर जीवित हैं पौधे
नर्मदा रिपेरियन जोन के पिपरिया, सोहागपुर, बाबई और सिवनीमालवा के कुछ इलाकों में अच्छे काम हुए हैं। यहां पौधे जीवित, सुरक्षित हैं और 4 से छह फीट ऊंचाई के हो चुके हैं। इनकी देखभाल भी हो रही है।

sandeep nayak Desk/Reporting
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