फैजान हत्याकांड: क्राइम पेट्रोल सीरियल देखकर बनाई थी हत्या की योजना, सगे भाई गिरफ्तार

- नदी में आई बाढ़ दिखाने के बहाने बाइक से ले जाकर की थी फैजान की हत्या

- कॉल डिटेल में पकड़े जाने के डर से मोबाइल बंद करके तीन दिन तक करते रहे रैकी

-सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए छाते से आरोपियों ने छुपा कर रखा था चेहरा

By: poonam soni

Updated: 21 Sep 2019, 12:12 PM IST

होशंगाबाद/ क्राइम पेट्रोल देख दुकान के ही एक कर्मचारी ने अपने बड़े भाई के साथ मिलकर पंद्रह वर्षीय फैजान को मौत के घाट उतारा था। इसके बाद उसके पास रखे ४० हजार रुपए लूटकर भाग गए थे। हत्या की यह योजना आरोपियों ने क्राइम पेट्रोल सीरियल देखकर बनाई थी। सीरियल में देखकर ही सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए छाते का उपयोग किया था, लेकिन एक चूक ने उन्हें पुलिस की गिरफ्त में ला दिया। गिरफ्तार आरोपियों का नाम सतीश यादव (23) और मनीष यादव (25) है। दोनों भाई हैं और मालाखेड़ी होली चौक में रहते हैं। अदालत ने आरोपियों को एक दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा है। एसपी एमएल छारी ने बताया कि आरोपियों ने आरोपियों ने फैजान के सिर पर लोहे की राड मारी और फिर गला दबाकर हत्या की थी। हत्या में उपयोग की गई राड और बाइक एमपी 05एमटी 9738 एवं राड जब्त कर ली है लेकिन अभी मोबाइल बरामद नहीं हो सका है। लूटी गई राशि में 25 हजार रुपए भी बरामद हो गए हैं। वारदात का तरीका क्राइम पेट्रोल सीरियल से लिया था। इसी से उन्होंने पुलिस से बचने के उपाय किए। बाइक आरोपियों के बड़े भाई अनिल की है। आरोपियों ने उधारी चुकाने और शराब व जुआ खेलने में 15 हजार रुपए उड़ाए।

फैजान हत्याकांड: क्राइम पेट्रोल सीरियल देखकर बनाई थी हत्या की योजना, सगे भाई गिरफ्तार

यह थी घटना :

11 सितंबर को फैजान हंगामा सेल से 40 हजार रुपए लेक बंधन बैंक जमा करने निकला था फिर नहीं लौटा। पांच दिन बाद शहर से १४ किलोमीटर दूर खेत की झाडि़यों में उसकी लाश मिली थी। पैसे और मोबाइल गायब थे।

नदी दिखाने के बहाने ले गए थे साथ
आरोपी भाइयों ने पहले सीरियल देखकर रैकी की। फिर बस स्टैंड पर फैजान को रोककर कहा- चल नदी में बाढ़ आई है देखकर आते हैं। वह राजी हो गया तो बाइक से डोलरिया रोड पर ले गए। सुनसान खेत में ले जाकर नगदी छीनने लगे तो फैजान ने विरोध किया। इस पर मनीष ने लोहे की पाइप से उसके सिर पर वार कर दिया। जिससे वह पानी से भरे गड्ढ़े में औंधे मुंह गिर पड़ा। इसके बाद सतीश ने गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। पैसे निकाले और लौट आए। हत्या के बाद मनीष घर चला गया था। जबकि हंगामा सेल पर काम करने वाला सतीश शाम ६ बजे दुकान पर आया था। वह शराब के नशे में था।

एेसे धरे गए आरोपी
छानबीन और आसपास के दुकानदारों से पूछताछ में पता चला कि सतीश घटना के तीन दिन पहले से दुकान नहीं आ रहा था लेकिन वह भाई के साथ बस स्टैंड के पास देखा गया था। संदेह के आधार पर दोनों को हिरासत में लिया गया तो उन्होंने कहा कि वे सिंचाई विभाग में एसडीओ के ड्राइवर बंटी यादव को बाइक से बस स्टैंड छोडऩे गए थे। जहां से वे सुबह 10 बजे तक वापस लौट आए थे। बंटी से तस्दीक की तो उसने बताया कि वह मालाखेड़ी तिराहे पर खड़ा था, तभी सतीश और उसका भाई बाइक से होशंगाबाद जा रहे थे। बंटी ने लिफ्ट ली और बस स्टैंड आए थे। उससे छाता भी ले गए थे। उसने कहा था- छाता घर पर दे देना। इसी छाते ने उनकी पोल खोल दी। सीसीटीवी फुटेज में बाइक पर छाते से मुंह छुपाकर सतरस्ता, ग्वालटोली पुलिया की तरफ जा रहे बाइक सवार यह थे। जिन्होंने पुलिस से बचने के लिए छाते का उपयोग किया था। दुकानदार ने फुटेज देखकर इनकी सतीश, मनीष और फैजान के रूप में पहचान कर ली। फिर सख्ती से पूछा तो आरोपियों ने सच उगल दिया। आरोपी हत्या के बाद शराब पीकर भी दुकान पर आया था।

एसपी को ज्ञापन देने भी गया था आरोपी
आरोपियों को पता था, पुलिस सबसे पहले कॉल डीटेल और लोकेशन खंगालती है। इसी वजह से वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपी सतीश ने अपना मोबाइल बंद करके घर पर ही छोड़ दिया था। 17 सितंबर को मृतक के परिजनों के साथ वह एसपी कार्यालय भी ज्ञापन देने पहुंचा था। ताकि पुलिस उस पर संदेह न करे और उसे पता भी चल जाए कि आगे पुलिस क्या करने वाली है।

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