scriptFake DAP found selling ashes in the district, farmers caught | जिले में बिक रही राखड़ मिली नकली डीएपी, किसानों ने पकड़ी | Patrika News

जिले में बिक रही राखड़ मिली नकली डीएपी, किसानों ने पकड़ी

कृषि विभाग के फील्ड अफसर गहरी नींद, किसानों ने उजागर किया मामला, तब जागे अधिकारियों की टीम ने की जब्त और बनाया पंचनामा, किसान संघ का कहना जिले में बड़े पैमाने पर नकली खाद का कारोबार हो रहा, प्रशासन ने नहीं रोका तो होगा आंदोलन

होशंगाबाद

Published: November 18, 2021 11:48:42 am

होशंगाबाद. जिले में घटिया-मिलावटी खाद बेची जा रही है। हाल ही में डोलरिया तहसील में राखड़ मिली डीएपी का मामला सामने आया है। किसानों ने इन खाद की बोरियां निजी क्षेत्र से व्यापारी से खरीदी थी। ग्राम पतलई कला में जब किसानों ने बोरियों को खोलकर उपयोग किया तो इसमें राखड़ मिली पाई गई। कुछ बोरियों को किसानों ने उपयोग भी कर लिया। किसानों ने खाद की बोरियों का वीडियो बनाकर बाकी बची बोरियों को बिना खोले सुरक्षित रखकर इसकी शिकायत कृषि विभाग के अधिकारियों से करते हुए बुलाकर इसकी जब्ती पंचनामा कराया है। भारतीय किसान संघ ने जिले में नकली खाद के कारोबार पर सख्ती से रोक लगाते हुए दोषी खाद विक्रेता-व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की है। बताया जाता है कि ग्राम पतलईकला के इन किसानों ने यह डीएपी खाद की बोरियां भूमि कृषि सेवा केंद्र डोलरिया से खरीदी थी। इसे बानापुरा से प्राइवेट व्यापारी से लाया गया था। एक नामी कंपनी की डीएपी खाद में राखड़ मिली होने से कृषि विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है। बता दें कि कृषि मंत्री कमल पटेल बुधवार को होशंगाबाद जिले में आए थे। इस दौरान भी कुछ किसानों ने खाद-पानी और बिजली की समस्याओं से अवगत कराया है।

किसान संघ ने पकड़ी नकली खाद, टीम ने बनाया जब्ती-पंचनामा
भारतीय किसान संघ के सदस्य व किसानों ने डोलरिया में राखड़ मिली नकली डीएपी खाद को पकड़ा है। ताजा मामला भूमि कृषि सेवा केंद्र का है, जिसका संचालक्अजीत सिंह राजपूत है। इस विक्रेता ने क्षेत्र के किसानों को बगैर बिल के एमआरपी से अधिक कीमत पर खाद का विक्रय किया, जिसमें शंका होने पर किसानों ने विरोध प्रकट करने एवं अपने विरुद्ध कार्रवाई होने के भय से विक्रेता ने अनेक किसानों के पैसे उनके खाते में वापस ट्रांसफर कर दिए, लेकिन किसान संघ की सक्रियता के कारण आखिर मामला दब नहीं सका और जब उप संचालक कृषि तक यह मामला पहुंचा तो तत्काल उप संचालक ने एक टीम बनाकर सहायक संचालक योगेंद्र बेड़ा के नेतृत्व में डोलरिया पहुंचाया। जहां पर विभागीय अधिकारियों ने भारी अनियमितता पाई और किसानों के बयान सहित पंचनामा आदि तैयार कर प्रतिवेदन कृषि उप संचालक जेआर हेडाऊ को सौंपा दिया। आगे की कार्रवाई उप संचालक स्तर से होगी।

फील्ड अफसरों के निरीक्षण पर उठे सवाल
प्रकरण में महत्वपूर्ण पहलू यह है जब एक वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एसएल जैन जिन्हें खाद के निरीक्षण-वितरण की मॉनीटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है तो फिर नकली खाद कैसे बिक रही थी। उन्होंने आखिर कार्रवाई क्यों नहीं। किसानों ने सवाल किया है कि नकली खाद को रोकने में फील्ड के अफसर क्यों असफल सिद्ध हो रहे हैं और क्यों किसानों की जागरूकता के बाद ही यह मामला उजागर हो सका। किसान संघ के पदाधिकारी ललित चौहान का कहना है कि डोलरिया तहसील ही नहीं पूरे जिले में निजी क्षेत्र में नकली खाद का कारोबार फलफूल रहा है। डोलरिया का छोटा व्यापारी यह नकली खाद कहां से लाया और अब तक कितनी बेच चुका है, इसकी भी जांच होनी चाहिए। जिले में नकली खाद के मुख्य कारोबारियों तक पहुंचकर पुलिस कार्रवाई की जाए।

किसानों के बयान दर्ज हुए
कृषि विभाग के अधिकारियों की टीम ने मौक पर पहुंचकर किसानों के बयान दर्ज किए। जिसमें सुरेंद्र सिंह राजपूत निवासी पतलई कला ने बताया कि उसने 16 नवंबर को भूमि सेवा केंद्र से 19 बोरी इफको कंपनी का डीएपी खरीदा था। जिसका दुकानदार ने कोई बिल नहीं दिया। 13 सौ रुपए के रेट से खरीदा था। शंका होने पर बोरी खोलकर देखा तो डीएपी नकली थी। दुकानदार को वापस कर दिया है। किसान ललित सिंह चौहान व अजय सिंह ने भी इसकी पुष्टि की।

यह बनाया जब्ती नामा टीम ने
कृषि टीम ने जो खाद का जब्तीनामा बनाया है, उसमें दर्शाया है कि किसान संतोष सिंह राजपूत पतलईकला ने 16 नवंबर को भूमि कृषि सेवा केंद्र डोलरिया से उक्त डीएपी खाद खरीदकर लाया था। जो देखने में फास्फेट जैसा दिखाई दे रहा। खाद की जब्ती व सीलबंद कर सैंपलिंग के लिए पंचनामा तैयार किया गया। पंचनामें पर किसान लखन सिंह, राजेंद्र सिंह चौहान, उजयार सिंह सिकरवार, बलवान सिंह, सुरेंद्र सिंह जैवार एवं राजेंद्र सिंह ने दस्तखत किए।

विभाग ने क्यों नहीं की कार्रवाई...
इस मामले में किसान आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि जब कृषि कार्य के अलावा विभागीय कार्य भी हम ही को करना है तो फिर इतने बड़े कृषि विभागीय अमले पर शासन को अपना राजस्व व्यय करने की क्या आवश्यकता है। और यदि ऐसा नहीं है तो आज से ही कृषि विभाग को जैसा कि सरकार का कहना है कि पूरे जिलों में युद्ध स्तर पर नकली खाद और बीज के खिलाफ अभियान चल रहा है। लापरवाह कृषि विभाग के फील्ड अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्यवाही होना चाहिए, ताकि उनके कार्य क्षेत्र में नकली खाद की बिक्र्री रूक सके।
-शिवमोहन सिंह, प्रचार प्रमुख भारतीय किसान संघ नर्मदापुरम्

इनका कहना है...
विभाग की टीम को भेजकर डीएपी की बोरियों को जब्त कर सैंपलिंग कराई गई है। जांच प्रतिवेदन प्राप्त होते ही उसके आधार पर गुरुवार को सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसानों की शिकायतों का त्वरित निराकरण हो जाएगा।
-जेआर हेडाऊ, कृषि उप संचालक होशंगाबाद

खाद-पानी को लेकर क्रांतिकारी किसान मजदूर संघ करेगा आंदोलन
इधर, क्रांतिकारी किसान मजदूर संघ ने जिले में किसानों को नहीं मिल रही खाद और पानी की समस्या को लेकर आंदोलन करने की चेतावनी दी है। संघ के जिलाध्यक्ष हरपाल सिंह सोलंकी ने बताया कि किसान हर तरफ से परेशान है। बोनी के पीक अवर्स में भी किसानों को डीएपी खाद जरुरत के हिसाब नहीं मिल पा रहा। अगर मिल भी रहा तो उसकी क्वालिटी भी ठीक नहीं है। हालत ये है कि किसान का परिवार पांच-पांच दिन लाइन में लगा रहता है उसके बाद मुश्किल से 5 से 10 बोरी खाद बमुश्किल मिल पाती है। यही हाल तवा बांध की नहरों का भी है। नहरों के अंदर न तो सफाई हुई है और न ही पानी आ पा रहा है। ग्राम भट्टी से भिलाखेड़ी होते हुए बैगनिया जाने वाली नहर का संघ की टीम ने खुद जायजा लिया तो स्थिति बेहद खराब पाई गई। यदि 3 से 4 दिन के अंदर खाद एवं नहर से पानी नहीं मिलने की समस्या हल नहीं हुई तो संगठन अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन एवं जनप्रतिनिधियों का घेराव भी करेगा।

जिले में बिक रही राखड़ मिली नकली डीएपी, किसानों ने पकड़ी
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