बेटी का सपना पूरा करने फोटोकॉपी की दुकान चलाने वाले पिता बने कोच, दे रहे क्रिकेट की कोचिंग

- भारतीय महिला क्रिकेट मैच को देखकर जागा वेदेही को क्रिकेट का शौक ।
- पिपरिया की वेदेही राजपूत रोजाना करती है पांच घंटे स्कूल ग्राउंड में प्रैक्टिस ।
- फोटोकॉपी की दुकान चलाने वाले पिता बने कोच।

By: Shailendra Sharma

Published: 13 Oct 2020, 03:53 PM IST

होशंगाबाद. कहते हैं प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। फिर चाहे वह बेटी ही क्यों न हो। जी हां.. हम बात कर रहे हैं पिपरिया की एक गरीब परिवार की बेटी वेदेही राजपूत की जो क्रिकेटर बनने के साथ ही देश की महिला क्रिकेट टीम की कप्तान बनना चाहती है। उसके पिता गोविंद सिंह राजपूत छोटी सी फोटोकॉपी की दुकान चलाते हैं, उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह अपनी बेटी को किसी बड़ी एकेडमी में भर्ती कराकर उसे अच्छी ट्रेनिंग दिला सकें, लेकिन बेटी की आंखों में तैर रहे सपने को साकार करने के लिए पिता खुद कोच बनकर उसे रोजाना पांच घंटे समीप के स्कूल ग्राउंड में क्रिकेट के गुर सिखा रहे हैं। पिता पहले बेहतरीन धावक और क्रिकेट के खिलाड़ी रहे हैं। अब दुकान से परिवार चलाने के साथ बेटी के सपने को पूरा करने में जुटे हुए हैं।

टीवी में मैच देखकर जागा क्रिकेटर बनने का सपना
घर में टीवी पर एक दिन महिला क्रिकेट मैच आ रहा था, जिसमें देश की महिला क्रिकेट टीम की धुरंधर खिलाड़ी हरमन प्रीत, मेताली राजपूत को सिंगल, डबल रन लेते देखा तो वेदेही को क्रिकेट इतना पसंद आया कि पिता से खुद भी क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई। बेटी की जिद के आगे पापा गोविंद सिंह राजपूत भी तैयार हो गए। खुद का बल्ला बेटी को थमा दिया। फिर क्या था बेटी ने हाथ में बल्ला पकड़ते ही रोजाना प्रैक्टिस करना शुरू कर दी।

 

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बैट लेकर अकेले जाने लगी स्कूल ग्राउंड
5 साल की उम्र में जागे क्रिकेट खेल के जुनून में वेदेही राजपूत अपने घर से समीप के स्कूल ग्राउंड में अकेले ही बल्ला लेकर प्रैक्टिस करने जाने लगी। पिता ने रोकने के बजाए उसे प्रोत्साहित किया और खुद ही उसके कोच बनकर प्रैक्टिस कराने लगे। इसका नतीजा यह हुआ कि आज वेदेही बेहतरीन खिलाड़ी बन चुकी है। लंबे-लंबे शॉट मारती है। कभी गेंद को आसमान में उछाल देती है। उसके प्रैक्टिस करते पांच साल हो गए हैं। अब वह नर्मदापुरम् संभाग का गौरव बन चुकी है। इंदौर, उज्जैन, होशंगाबाद, चंबल, ग्वालियर में अपने क्रिकेट का जौहर दिखा चुकी है। 2018-19 अंडर नर्मदापुरम् संभाग का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी है। उसकी तमन्ना है कि वह एक दिन भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान बनकर अपनी होशंगाबाद जिले एवं पिपरिया का नाम प्रदेश व देश में रोशन कर सके।

सुबह 5 बजे से करती है चार घंटे प्रैक्टिस
वेदेही की दिनचर्या ऐसी हो गई है कि वह सुबह साढ़े चार बजे रोजाना उठ जाती है और पांच बजे एक्सरसाइज कर नपा के स्कूल ग्राउंड पर प्रैक्टिस करने पहुंच जाती है। पिता गोविंद सिंह राजपूत के साथ ही मोहित एवं अनिल जैन भी कोच की भूमिका निभा रहे हैं।

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