19 साल बाद आया गंगा दशहरा पर दुर्लभ योग, गंगाजल से शिवलिंग का करे अभिषेक

अधिकमास के बढ़ा गंगा दशहरा का महत्व

By: poonam soni

Published: 24 May 2018, 07:30 PM IST

होशंगाबाद। शास्त्रों के अनुसार गंगा दशहरा पर देवनदी गंगा धरती पर आई थी। इसलिए इस दिन गंगा दशहरा मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इन दिनों अधिकमास भी चल रहा है, जिसकी वजह से गंगा दशहरा का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसके पहले ज्येष्ठ का अधिकमास १९ साल पहले आया था। और अब २०१८ में २०३७ में फिर ज्येष्ठ अधिकमास आया है। गंगा दशहरा पर इस विशेष संयोग के साथ और इस विधि के पूजा करने से अधिक फल की प्राप्ति होती है।

 

यह है पूजा विधि
संकल्प पूर्वक गंगा में या अन्य पवित्र नदी में स्नान करने से व साफ कपड़े पहनकर पितरों का तर्पण करें। फिर उस तीर्थ की पूजा कर घी से पूजा कर काले तिल जल में डाल दें। इसी तरह गुड़ से बने सत्तू के लड्डू भी जल में डाल दें। तांबे, मिट्टी के घडे में रखी सोने, चांदी की प्रतिमा की पूजा मंत्र के साथ करें।

शिवलिंग की करे पूजा
अधिकमास और गंगा दशहरा के अवसर पर आपके आसपास के भगवान शंकर की शिवलिंग का जल से अभिषेक करे। १९ साल बाद गंगा दशहरा पर आए इस दुलर्भ संयोग पर शिवलिंग की पूजा करें ऐसा करने से महादेव सहित अन्य देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

इटारसी. संसार सागर में कलयुग के प्रारंभ के सांथ ही श्रीमद् भागवत कथा का पदार्पण हुआ ताकि इसमेें रचित प्रभू परमात्मा के आध्यात्मिक एवं सांसारिक शिक्षाप्रद संदेश को जनमानस आत्मसात कर कलियुग के प्रतिकूल प्रभाव के भंवर में अपने जीवन को ना उल्झाए। सभी धर्मग्रंथों में सबसे बड़ा है भागवत महापुराण। उक्त उद्गार भागवत कथाकार पंडित जगदीश पांडेय ने ग्राम सोनासांवरी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह में व्यक्त किए। भागवत कथा का आयोजन ग्राम सोनासांवरी के संस्कार मण्डपम् किया जा रहा है। कथा के पहले दिन गांव के सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने माता मंदिर से कलश यात्रा निकाली जो गांव के प्रमुख मार्ग से होकर कथास्थल पर पहुंची। भागवात कथा में पहले दिन भागवत कथाकार पंडित जगदीश पांडेय ने कथा का महत्व बताया।

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