यहाँ पौने दो लाख की आबादी पर रोजाना आधा दर्जन डिलीवरी

यहाँ पौने दो लाख की आबादी पर रोजाना आधा दर्जन डिलीवरी

Shakeel Khan | Updated: 11 Jul 2019, 04:02:37 PM (IST) Hoshangabad, Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

नवजात बच्चों को कपड़े में रखकर लाते है बाहर, अस्पताल में बेबी केयर किट का टोटा

शकील नियाजी/पिपरिया. सरकार शिशु मृत्यु दर रोकने करोड़ों का बजट खर्च कर रही है लेकिन सिविल अस्पताल में नवजात की संख्या के मान से बेबी केयर किट की आपूर्ति तक नहीं कर पा रही है। पौने दो लाख की आबादी के अस्पताल में रोजाना आधा दर्जन डिलेवरी होती है लेकिन सभी नवजात को अस्पताल से किट नहीं मिल पाती है।

 

नही मिलती बेबी केयर कीट
जानकारी अनुसार डिमांड के अनुरूप बेबी केयर किट जिले से ही नहीं मिल पाती है। जितनी मिलती है उतनी प्रसूता महिलाओं के नवजात को दी जाती है। डिलेवरी के बाद नवजात पर सबसे अधिक संक्रमण हावी होने का खतरा रहता है स्वास्थ्य विभाग इसकी रोकथाम के प्रयास भी कर रहा है लेकिन संक्रमण से बचाने नवजात को संख्या के अनुसार किट्स की आपूर्ति नहीं कर पा रहा यह आश्चर्यजनक है।

 

प्रदेश सरकार कर रही करोड़ो खर्च
प्रदेश में प्रसूताओं, नवजात को सुरक्षित रखने एनआरएचएम करोड़ों की याजनाएं संचालित कर रहा है। इसी के तहत सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट वितरण योजना चलाई जा रही है। प्रदेश में करीब 19 लाख बच्चे जन्म लेते हैं इन नवजात को संक्रमण से सुरक्षित रखने साल भर में 37 लाख बेबी किट क्रय कर अस्पतालों में सप्लाई होती है। 137 रुपए मूल्य की यह बेबी किट अस्पताल में प्रसूताओं को नि:शुल्क दी जाती है।

 

प्रसूतों ने कहा नवजातों को कपड़े में लपेटकर लाते हैं
अस्पताल में भर्ती प्रसू्रताओं से जब पूछा गया तो सभी ने कहा घर से या बाजार से नवजात को कपड़े लाकर पहनाए जाते है। स्वास्थ्य विभाग का उददेश्य है कि तत्काल जन्म लिए बच्चे को बेबी केयर किट पहनाई जाए ताकि नवजात संक्रमण की गिरफ्त से सुरक्षित रखे। शहरी महिलाएं तो ठीक है ग्रामीण अंचल से आई गरीब, आदिवासी परिवार की महिलाएं संक्रमण से वाकिफ नहीं होती जानकारी के अभाव में कोई भी कपड़ा नवजात को पहना देती है जिससे शिशु का जीवन संकट में पड़ जाता है।

 

क्या है बेबी केयर किट
बेबी केयर किट नवजात को संक्रमण से बचाने की एक एक ड्रेस होती है। इसमें झबला, केप, मोजे, नेपी, फ्रॉक शामिल रहती है यह दो सेट प्रसूता महिला को अस्पताल से मिलते है। दिल्ली, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश में यह बेबी केयर किट 2 हजार मूल्य की नवजात को सप्लाई होती है। इसमें रबर टॉवल, तकिया, झबला, फ्रांक, नेपी, हैंड ग्लोब्स, केप, मोजे, आयल, सोप, शैम्पू, सेनिटाइजर, हैंडवास, मच्छरदानी, खिलौने आदि शामिल रहते हैं।

 

दो की जगह मिल रही एक
किट की आपूर्ति कम होने की वजह लेवर रूम से एक नवजात को एक किट दे दी जाती है जबकि नियम दो किट का है वो भी इसलिए कि एक किट गंदी हो जाए तो दूसरी तत्काल नवजात को पहनाई जा सके। प्रसूताएं एक किट के बाद फिर शिशु को घर का ही कपड़ा पहना देती है जो खतरनाक हो सकता है।

 

डिमांड पर मिली 50 किट
बीएमओ के अनुसार अभी जिले में स्टॉक की कमी है50 बेबी केयर किट पिछले माह मिली थी जो नवजात को वितरित कर दी गई है। माह में 180 से 200 डिलेवरी अस्पताल में होती है। डिमांड भेजी है मिलने पर सभी महिलाओं को किट दी जाएगी। इंफेक्शन से बचाने नवजात के लिए किट अहम होती है। महिलाएं डिलेवरी के बाद गंदे कपड़े आदि में बच्चें को लपेट देती है जिससे इंफेक्शन का खतरा बना रहता है।

 

आपूर्ति कराई जाएगी
सीएमएचओ से जानकारी लेंगे स्टॉक में कमी है तो उसकी आपूर्ति अस्पताल को कराएंगे। बेबी केयर किट की कमी नही आने दी जाएगी।
- शीलेन्द्र सिंह, कलेक्टर होशंगाबाद।

 

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