सुबह काम की उम्मीद में तो रात दूसरे दिन की चिंता में गुजर रही

सुबह काम की उम्मीद में तो रात दूसरे दिन की चिंता में गुजर रही

Sandeep Nayak | Publish: Sep, 03 2018 02:21:11 PM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

जीतोड़ मेहनत के भी नहीं जुटा पा रहे दो वक्त की रोटी, शासन की योजनाओं की जानकारी भी नहीं

 

होशंगाबाद. सरकार ने मजदूरों के लिए कई प्रकार की योजनाएं चला रखीं हैं। लेकिन जानकारी नहीं होने और पढ़े-लिखे नहीं होने के कारण इनकी जानकारी ही नहीं होती है। जिस कारण मजदूर हाड़तोड़ मजदूर करने के बाद भी मुश्किल से दो वक्त की रोटी परिवार के लिए जुटा पाते हंै। कभी-कभी तो भूखे पेट ही सोना पड़ता है। हर रोज इनकी सुबह एक उम्मीद के साथ होती है तो शाम दूसरे दिन की चिंता के साथ गुजर जाती है कि कल का खाना कहां से मिलेगा। यह कहना है मजदूरों का। जीतोड़ मेहनत के भी नहीं जुटा पा रहे दो वक्त की रोटी, शासन की योजनाओं की जानकारी भी नहीं ।

 


मजदूरी में गुजर गया आधा जीवन
37 साल के सुक्करबाड़ा कला निवासी मजदूर मुकेश केवट सीमेंट की बोरियां ढोकर परिवार पाल रहे हैं। इसी में उनका आधा जीवन गुजर गया है। हर दिन नए काम की तलाश में घूमना पढ़ता है, ताकि बच्चों का उच्च शिक्षा दिला सकें। जानकारी नहीं होने के अभाव में इनको सरकार की योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

दूसरे शहर से आए मजदूरी करने
20 साल से मजदूरी कर परिवार पाल रहे बनखेडी निवासी मुनीम दास कहार बारिश के दौरान मजदूरी नहीं मिलने के कारण मालिक से एडवांस रुपए लेकर परिवार चला रहे हैं। पढ़े-लिख नहीं होने के कारण किसी प्रकार की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। मुनीम कहते हैं कि महंगाई के जमाने में २५० रुपए दिन से परिवार की जरूरतें पूरी नहीं हो पाती हैं।

सुबह से रहता है मन में सवाल
ईंट का का काम करने वाले मजदूर दिनेश कटारे हर सुबह मजदूरी की तलाश में निकलते हैं। मन में सवाल होता है कि आज मजदूरी मिलेगी या नहीं, शाम को घर की सब्जी आएगी या नहीं। लेकिन बाजार में पहुंचते ही छोटी-मोटी मजदूरी मिल जाती है, जिससे घर खर्च चल जाता है।

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