इस छात्र ने बचपन में रची थी अंग्रेज गवर्नर की हत्या की साजिश

इस छात्र ने बचपन में रची थी अंग्रेज गवर्नर की हत्या की साजिश

poonam soni | Publish: Aug, 15 2019 09:53:25 AM (IST) Hoshangabad, Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

अंग्रेजो ने दिया था 100 बेतो का दण्ड

लोकेश तिवारी/होशंगाबाद। आजादी के लड़ाई में होशंगाबाद जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भी अहम भूमिका निभाई थी। आज हम आपको स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अश्वनी कुमार मिश्रा से जुड़े कुछ किस्सों से रू-ब-रू कराएंगे। होशंगाबाद के युवा क्रांतिकारी पंडि़त अश्वनी कुमार मिश्रा ने आजादी की लड़ाई में कई बार अपनी जान जोखिम में डाली।

 

पिता से मिली प्रेरणा

उन्हे यह प्रेरणा पिता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. पंडि़त शंभू दयाल मिश्रा से मिली थी बात 1942 की है। जब सारे मुल्क में 'भारत छोड़ो आंदोलनÓ के नारे गूंज रहे थे। तब युवा अश्वनी ने अपने स्कूल और नगर पालिका कार्यालय में तिरंगा झंडा फहराकर अंग्रेजो भारत छोड़ो का नारा बुलंद किया था।

 

अग्रेंजो ने दिया था 100 बेतों का दण्ड

जिसके लिए अंग्रेजों ने उन्हें सौ बेतों का दंड दिया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें 9 माह तक जेल में भी रहना पड़ा था। जेल से निकलने के बाद अश्वनी ने होशंगाबाद आ रहे अंग्रेज गवर्नर हेनरी टायनाम की हत्या की साजिश भी रची थी। इसके लिए अश्वनी होशंगाबाद की छोटी पहाडिय़ा पर हर दिन पिस्तौल चलाने का अभ्यास करने भी पहुंचते थे। जब उनके एक साथी को इसकी सूचना लगी तो उसे लगा कि हत्या के मामले में सजा हो सकती है। इसे देखते हुए उसने पुलिस को इसकी सूचना दी थी। जिस पर पुलिस ने उन्हे गिरफ्तार कर खतरनाक नेता घोषित कर दिया था। अश्वनी कुमार की इस घटना को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने उन्हें एक साल के लिए निष्कासित भी कर दिया था। 2 नवंबर 2007 को वह दुनियां से रूखसत हो गए।

 

पिता जज की नौकरी छोड़ शामिल हुए थे आंदोलन में
अश्वनी कुमार मिश्रा के पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शंभू दयाल मिश्रा महात्मा गांधी के कहने पर सिविल जज की नौकरी छोड़कर आजादी के आंदोलन में शामिल हुए थे।

 

प्रेम कुटी आजादी की जंग का गवाह
आजादी की लड़ाई के दौरान अश्विनी कुमार के पिता शंभू दयाल मिश्रा की सदर बाजार स्थित घर जिसे प्रेम कुटी कहा जाता है। वह आज भी आजादी की जंग का गवाह है। यहां उस समय के सभी क्रांतिकारी आकर आजादी की लड़ाई की योजना बनाया करते थे। जैसा उनके पुत्र अनुराग मिश्रा ने बताया।

 

 

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