तितलियों की प्रजातियों और वन्यजीवों के व्यवहारिक परिवर्तन की दी जानकारी

तितलियों की प्रजातियों और वन्यजीवों के व्यवहारिक परिवर्तन  की दी जानकारी

govind chouhan | Publish: Sep, 06 2018 06:46:47 PM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

मढ़ई रेंज में किया गाड्स, नेचुरलिस्ट और टूर आपरेटर्स का प्रशिक्षण कार्यक्रम, दी विभिन्न जानकारियां

 सोहागपुर. सतपुड़ा टाईगर रिजर्व की फेवरेट टूरिज्म डेस्टीनेशन मढ़ई में गत दिनों टूर आपरेटर्स, गाड्स तथा नेचुरलिस्ट का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें तीनों श्रेणियों के प्रशिक्षुओं को जंगल से जुड़ी विभिन्न जानकारियों सहित मानसून गश्ती की जानकारी दी गई है।
मढ़ई रेंज आफिसर मुकेश डुडवे ने बताया कि मानसून में पर्यटन की गतिविधियां बंद रहती हैं, जिसके चलते गाईड्स भी नहीं आते हैं। लेकिन उनके प्रशिक्षण के कार्यक्रम मानसून के सीजन में जरूर आयोजित किए जाते हैं, ताकि उनका वन और वन संपदा सहित वन्यजीवों से जुड़ाव बना रहे। इस वर्ष के प्रशिक्षण में टूर आपरेेटर्स को भी शामिल किया गया था तथा इनके अलावा विभिन्न रिसोर्ट्स के अनुबंधित व कार्य करने वाले नेचुरलिस्ट्स को भी प्रशिक्षु रूप में आमंत्रित किया गया था। प्रशिक्षण का कार्य रेंज आफिसर डुडवे सहित कार्तिक सिंह चौहान द्वारा किया गया। डुडवे ने बताया कि उक्त कार्यक्रम एसडीओ आरएस भदौरिया के निर्देशन में संचालित किया गया तथा इसमें नेचुरलिस्ट हरेंद्र साहू, मोहन जोशी, हरप्रीत सिंह आदि का सहयोग रहा।

दी ये जानकारियां
प्रशिक्षण में प्रशिक्षुओं को मढ़ई में पाई जाने वाली तितलियों की प्रजातियों की जानकारी तो दी ही गई। इसके अलावा वन्यजीवों के नैचुरल हेबीटेट व उनके जंगल में मानवीय गतिविधियों पर रोक के बाद होने वाले व्यवहारिक परिवर्ततन की जानकारी भी दी गई। वहीं औषधीय पौधों को पहचनना तथाा उनके गुणों की जानकारी भी प्रशिक्षुओं को दी गई। प्रशिक्षुओं ने बताया कि ट्रेनिंग का लाभ आगामी सीजन में मिलेगा, जब पर्यटक आएंगे तो उन्हें वन्यजीवों के अलावा वनस्पतियों व तितलियों की जानकारी भी दी जाएगी।

होते रहते हैं आयोजन
एसटीआर के मढ़ई रेंज में वन्यजीवों से जुड़े इस तरह के विविध कार्यक्रम व प्रशिक्षण अक्सर होते रहते हैं। कभी वल्र्ड वाचिंग, कभी वन्यजीवों की गणना तो कभी गजराजों के जन्मदिवस जैसे आयोजन मढ़ई का एक हिस्सा हैं। इतना ही नहीं वन्यजीवों में रुचि रखने वाले इनके जानकारों व विशेषज्ञों की कार्यशाला व वन्य जीव संरक्षण से जुड़े विषयों पर आधारित प्रशिक्षण लेने हर वर्ष यहां सैकड़ों वन्यजीव प्रेमी यहां आते हैं और यहां वादियों में प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

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