इटारसी जंक्शन पर नहीं होती पेंट्रीकार के खाने की जांच

इटारसी जंक्शन पर नहीं होती पेंट्रीकार के खाने की जांच

pradeep sahu | Publish: Oct, 12 2018 07:00:00 AM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

शिकायत पर ही खुलती है रेलवे के स्वास्थ्य विभाग की नींद

इटारसी. जबलपुर जोन का सबसे बड़ा और लाखों यात्रियों के दबाव वाले जंक्शन के तौर पर इटारसी रेलवे स्टेशन का नाम रेलवे की लिस्ट में शामिल हंै। इतना महत्वपूर्ण स्टेशन होने के बावजूद यात्रियों को जो खाना पेंट्रीकार में बंटता है उसकी क्वालिटी जांचने के लिए जंक्शन पर कोई सुविधा नहीं है। रेलवे ने प्लेटफॉर्मों के स्टॉलों पर बिकने वाली खाद्य सामग्री जांचने के लिए एक हेल्थ इंस्पेक्टर की नियुक्ति कर रखी है लेकिन वह भी कभी पेंट्रीकार में झांकने नहीं जाते हैं। खाने की टेस्टिंग सुविधा नहीं होने से यात्रियों को पेंट्रीकार में तैयार हुआ खाना भगवान भरोसे खाना पड़ता है।

स्टेशन है हेल्थ इंस्पेक्टर की पोस्टिंग- इटारसी, जबलपुर, भोपाल सहित जोन के सभी बड़े स्टेशनों पर हेल्थ इंस्पेक्टर की पोस्टिंग रेलवे ने इसी मंशा से की है कि यात्रियों को दी जाने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वाले के खिलाफ कार्रवाई हो सके लेकिन हकीकत यह है कि हेल्थ इंस्पेक्टर्स द्वारा ट्रेनों के पेंट्रीकार में खाद्य सामग्री की जांच में घोर लापरवाही बरती जाती है। पेंट्रीकार के खानों की जांच कोई मामला बिगडऩे पर ही होती है वरना हर दिन टे्रनें जंक्शन से बिना जांच के ही गुजर जाती हैं।
जोन में कहीं नहीं होती जांच- पेंट्रीकार में दी जाने वाली खाद्य सामग्री की जांच अकेले इटारसी जंक्शन पर ही नहीं होती है बल्कि जबलपुर जोन के भोपाल, जबलपुर, कोटा सहित अन्य बड़े स्टेशनों पर भी पेंट्रीकार के खाने की जांच सुविधा उपलब्ध नहीं है। जबलपुर जोन से करीब आधा सैंकड़ा यात्री ट्रेनें गुजरती हैं जिनमें पेंट्रीकार लगे हुए हैं। इस सुविधा के नहीं होने से यह पता ही नहीं चलता है कि जबलपुर जोन में टे्रन के चलने के दौरान यात्रियों को दिए जाने वाली खाने की गुणवत्ता कैसी है।
हंगामे पर खुलती है नींद- यात्री ट्रेनों में पेंट्रीकार का प्रावधान लंबी दूरी के बीच चलने वाली ट्रेनों में किया गया है। पेंट्रीकार लगाने की मंशा यह है कि यात्रियों को उनकी बर्थ पर ही भोजन उपलब्ध हो सके और उन्हें परेशान न होना पड़े। पेंट्रीकार में बनने वाला भोजन गुणवत्तायुक्त है या नहीं इसका पता तब लगता है जब यात्री खाने की क्वालिटी को लेकर शिकायत करता है या हंगामा मचाता है।

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