उड़द पर मनमाने दामों की कैंची, वापस ले जा रहे किसान

कलेक्टर के निर्देश के बावजूद हो रही मनमानी

By: yashwant janoriya

Published: 09 Dec 2017, 10:34 AM IST

इटारसी। कृषि उपज मंडी में उड़द के कम दाम बोले जाने के कारण किसानों ने एक बार हाइवे जाम करने का झटका प्रशासन को दे दिया है। जिला प्रशासन ने व्यापारियों को समझाइश दी थी कि उड़द का सम्मानजनक दाम दिया जाए मगर मंडी में फिर वही हालात बनने लगे हैं जिससे फिर किसानों का गुस्सा भड़क सकता है। मंडी में उड़द की बंपर आवक हो रही है। उड़द की बंपर आवक के कारण मंडी प्रबंधन को व्यवस्थाएं बनाने में पसीना छूट रहा है वहीं बंपर आवक के बीच व्यापारी उड़द के दामों को मिट्टी के भाव खरीदने पर तुले हैं। शुक्रवार को मंडी में उड़द का भाव 200 रुपए क्विंटल तक बोला गया। व्यापारियों की इस मनमानी से किसानों में नाराजी बढ़ रही है।
200 रुपए लगाई बोली, सकते में किसान - कृषि उपज मंडी उड़द बिकने आ रही है। शुक्रवार को जब उड़द की बोली चालू हुई तो किसी व्यापारी ने उड़द के 200 रुपए क्विंटल का रेट लगा दिया। इससे किसान नाराज हो गए। किसानों ने कहा कि व्यापारी मनमानी कर रहे हैं वे हमारी उपज को मिट्टी समझकर ले रहे हैं। किसानों के तेवर देख वह व्यापारी वहां से खिसक गया। किसानों ने कहा कि व्यापारी छोटे ढेर जिनमें से 1 से 2 क्विंटल माल होता है उसके 1800 से 2000 रुपए के रेट बोल देते हैं ताकि प्रबंधन को दिखाने के लिए रहे। बाकी जो अच्छी गुणवत्ता के बड़े ढेर होते हैं उनके दाम 1100 से 1200 के आसपास ही बोल रहे हैं।
उड़द 14 हजार, धान 20 हजार बोरा प्रतिदिन की आवक - शासन ने भावान्तर योजना के तहत उड़द बेचने के लिए 15 दिसंबर तक की समयावधि निर्धारित की है। भावान्तर योजना में उड़द बेचकर लाभ लेने की मंशा से बड़ी संख्या में किसान उड़द लेकर कृषि मंडी पहुंच रहे हैं। उड़द की आवक बढ़ते हुए करीब 14 हजार बोरा प्रतिदिन पहुंच गई है। इस बीच धान की आवक भी मंडी परिसर में होने लगी है। धान की आवक प्रतिदिन करीब 20 हजार बोरा पहुंच गई है। दोनों उपजों की आवक बढऩे और मंडी में किसानों की रेलमपेल बढऩे से व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई हैं। किसानों की उपज रखने का अब जगह नहीं बची है।
मंडी में अटके हैं किसान - मंडी में उड़द की बंपर आवक हो रही है। बंपर आवक के कारण किसानों की उड़द बिकने में भी समय लग रहा है। मंडी में ऐसे कई किसान हैं जो 7 दिन से पड़े हुए हैं। उसके अलावा किसानों को भुगतान करने की व्यवस्था में भी दिक्कत आ रही है। व्यापारियों के पास भी उतना नकद भुगतान नहीं होने से किसानों को इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है। जिन किसानों का भुगतान रुका है वे तो मंडी में जमे हुए हैं और हर दिन नए किसान अपनी उपज लेकर मंडी में और पहुंच रहे हैं जिससे हालात गंभीर हो गए हैं।
किसने क्या कहा
हम उड़द बेचने आए थे। हमारे ढेर की जब नीलामी हुई तो बोली 200 रुपए क्विंटल से चालू हुई। हम उपज कोई कचरा थोड़ी है जो व्यापारी मनमानी करेंगे। हम अपनी उपज वापस ले आए।
लक्ष्मीनारायण, पीडि़त किसान
हम 7 दिन से उड़द लेकर मंडी में पड़े हुए हैं। कोई व्यवस्था ही नही है। किसानों की उपज की तुलाई और भुगतान दोनों में ही देरी से किसान परेशान हो रहे हैं।
सागर राजपूत, किसान डोलरिया
हमारे पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। किसानों को यदि कोई समस्या आ रही है तो वे हमसेआकर शिकायत कर सकते हंै। उनकी शिकायत का निराकरण किया जाएगा।
सुनील गौर, सचिव कृषि उपज मंडी इटारसी

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