बड़े-बड़े दावे करने वाली यह दो नगर पालिकाएं हो गई फेल, रैंकिंग में खुली पोल

साफ-सफाई में थ्री-स्टार हासिल करने का किया था दावा, नहीं मिला एक भी स्टार

इटारसी/होशंगाबाद। शहर को कचरा मुक्त करने के इटारसी-होशंगाबाद नपा के हवाहवाई दावों की पोल खुल गई है। दोनों नगर सरकारों ने कचरा मुक्त शहर बनाने के लिए थ्री-स्टार का दावा किया था, लेकिन परिणाम जारी हुए तो दोनों नपा के हाथ एक भी स्टार नहीं लगा। हालात तो यह हैं कि दावे के सभी पैरामीटर में दोनों नपा फिसड्डी साबित हुई हैं।
स्टार रेटिंग में जिले का एक भी निकाय नहीं
केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा हाल ही में कचरा मुक्त निकायों की स्टार रेटिंग जारी की गई है। इस सूची में जिले का एक भी निकाय शामिल नहीं हो पाया है। इटारसी औरह होशंगाबाद नपा प्रबंधन अब स्वच्छता सर्वेक्षण की रेटिंग में बेहतर प्रदर्शन करने का दावा कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के ३७८ निकायों में से सिर्फ १४ निकायों को इस सूची में जगह मिली है।

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इटारसी में गीला-सूखा कचरा भी नहीं कर पाए अलग-

इटारसी नपा की रेटिंग को गिराने में कचरे की कैटेगरी का अहम रोल रहा। गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने की बजाय एक साथ रखे जा रहे थे। इसमें नपा को 80 फीसदी से ऊपर होना था जिसमें वह सफल नहीं रही।
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एसटीपी प्लांट का काम अधर में-
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम अधर में चल रहा है। पहली बार नपा ने जिस जगह को चिंहित किया वहां एप्रोच रोड़ नहीं मिल पाई। ओवर ब्रिज तिराहे के पास दूसरी बार जगह चिंहित की तो डूब क्षेत्र की वजह से रोक लग गई।

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५ फीसदी भी नहीं बना होम कम्पोस्ट-

स्टार रेटिंग में लोगों के घर से निकलने वाले जैविक कचरे से खाद बनाने की योजना थी। शहर में लगभग २५ हजार घर हैं। लगभग ५०० घरों में होम कम्पोस्ट यूनिट होना था। सर्वेक्षण में ५ फीसदी होम कम्पोस्ट पर नंबर दिए जाते हैं। शहर में ५ फीसदी घरों में भी होम कम्पोस्ट यूनिट नहीं होने से इन बिंदू पर भी हम पिछड़ गए।
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टिं्रचिंग ग्राउंड में नहीं बनी कम्पोस्ट यूनिट-
ट्रिचिंग ग्राउंड में कम्पोस्ट यूनिट हो या बाबई में बनने वाला क्लस्टर कोई भी काम नहीं हो पाया। कचरा प्रबंधन के लिए ये दोनों ही यूनिट काफी महत्वपूर्ण हैं। जनवरी में हुए सर्वेक्षण में इस वजह से भी निकाय को रेटिंग नहीं मिली।

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स्वच्छता निरीक्षकों के पद खाली-

स्वच्छता सर्वेक्षण में स्वच्छता निरीक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जबकि नपा में स्वच्छता निरीक्षकों के दोनों पद खाली है। स्वच्छता निरीक्षक राजेश सोनी के स्थानांतरण के बाद नपा को कोई स्वच्छता निरीक्षक नहीं मिला।
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ये भी रहीं खामियां...
-डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में पुख्ता नहीं हो पाई व्यवस्था।

-गीले और सूखे कचरे का पृथककरण भी नहीं हुआ बेहतर।
-शहर के कई सार्वजनिक स्थलों से नहीं हट पाए कूड़ाघर।

-प्रतिबंध के बाद भी पॉलीथीन मुक्त नहीं हो पाया शहर।
-रात्रिकालीन सफाई में नहीं मिली बेहतर उपलब्धि।

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इनका कहना है...

यह सिर्फ स्टार रेटिंग है। स्वच्छता रैंकिंग आना अभी बाकी है। स्टार रेटिंग में इस बार नंबर नहीं लगा, अगले साल बेहतर काम करेंगे। जिससे निकाय की रेटिंग बढ़े।
-माधुरी शर्मा, सीएमओ

हमने पूरा प्रयास किया था कि थ्री स्टार रेटिंग आए मगर कुछ कमी रही। हम उन कमियों को दूर कर और बेहतर करने का प्रयास करेंगे।

-सीपी राय, सीएमओ नपा

इटारसी में गीला-सूखा कचरा भी नहीं कर पाए अलग

इटारसी नपा की रेटिंग को गिराने में कचरे की कैटेगरी का अहम रोल रहा। गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने की बजाय एक साथ रखे जा रहे थे। इसमें नपा को 80 फीसदी से ऊपर होना था जिसमें वह सफल नहीं रही।
एसटीपी प्लांट का काम अधर में
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम अधर में चल रहा है। पहली बार नपा ने जिस जगह को चिंहित किया वहां एप्रोच रोड़ नहीं मिल पाई। ओवर ब्रिज तिराहे के पास दूसरी बार जगह चिंहित की तो डूब क्षेत्र की वजह से रोक लग गई।

5 फीसदी भी नहीं बना होम कम्पोस्ट

स्टार रेटिंग में लोगों के घर से निकलने वाले जैविक कचरे से खाद बनाने की योजना थी। शहर में लगभग 25 हजार घर हैं। लगभग 500 घरों में होम कम्पोस्ट यूनिट होना था। सर्वेक्षण में 5 फीसदी होम कम्पोस्ट पर नंबर दिए जाते हैं। शहर में 5 फीसदी घरों में भी होम कम्पोस्ट यूनिट नहीं होने से इन बिंदू पर भी हम पिछड़ गए।

ट्रिचिंग ग्राउंड में नहीं बनी कम्पोस्ट यूनिट-
ट्रिचिंग ग्राउंड में कम्पोस्ट यूनिट हो या बाबई में बनने वाला क्लस्टर कोई भी काम नहीं हो पाया। कचरा प्रबंधन के लिए ये दोनों ही यूनिट काफी महत्वपूर्ण हैं। जनवरी में हुए सर्वेक्षण में इस वजह से भी निकाय को रेटिंग नहीं मिली।

स्वच्छता निरीक्षकों के पद खाली-

स्वच्छता सर्वेक्षण में स्वच्छता निरीक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जबकि नपा में स्वच्छता निरीक्षकों के दोनों पद खाली है। स्वच्छता निरीक्षक राजेश सोनी के स्थानांतरण के बाद नपा को कोई स्वच्छता निरीक्षक नहीं मिला।
ये भी रहीं खामियां...
-डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में पुख्ता नहीं हो पाई व्यवस्था।

-गीले और सूखे कचरे का पृथककरण भी नहीं हुआ बेहतर।
-शहर के कई सार्वजनिक स्थलों से नहीं हट पाए कूड़ाघर।

-प्रतिबंध के बाद भी पॉलीथीन मुक्त नहीं हो पाया शहर।
-रात्रिकालीन सफाई में नहीं मिली बेहतर उपलब्धि।

इनका कहना है...

यह सिर्फ स्टार रेटिंग है। स्वच्छता रैंकिंग आना अभी बाकी है। स्टार रेटिंग में इस बार नंबर नहीं लगा, अगले साल बेहतर काम करेंगे। जिससे निकाय की रेटिंग बढ़े।
-माधुरी शर्मा, सीएमओ

हमने पूरा प्रयास किया था कि थ्री स्टार रेटिंग आए मगर कुछ कमी रही। हम उन कमियों को दूर कर और बेहतर करने का प्रयास करेंगे।

-सीपी राय, सीएमओ नपा

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बृजेश चौकसे
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