दूध के नाम पर बाजार में बिक रहा जहर, अधिकारियों ने तबेलों में जाकर खोजे ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन

कई डेयरियों में लगा रहा ताला : डेयरियों पर की जा रही कार्रवाई के डर से बुधवार को शहर की कई डेयरियों की शटर बंद रही और दुकान पर ताले झूलते रहे।

By: poonam soni

Published: 05 Sep 2019, 12:15 PM IST

होशंगाबाद/ जिले में रोजाना लगभग दस हजार लीटर दूध की खपत हो रही है। मिलावटी दूध की रोकथाम के लिए पहली बार खाद्य सुरक्षा विभाग लैक्टोमीटर लेकर डेयरियों पर पहुंचा। जांच में दूध में पानी की मिलावट पाई गई। डेयरियों से दूध का सैंपल लेकर कैमिकल जांच के लिए राज्य स्तरीय लैब भेजा गया है।

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तबेले में अधिकारियों में इंजेक्शन की जांच की

शहर के एक तबेले में टीम ने दूध निकालने में उपयोग होने वाला ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन ढूंढा। हालांकि मौके पर इंजेक्शन नहीं पाया गया। टीम ने रेस्ट हाउस के सामने नामधारी दूध डेयरी व पांडे नर्सिंग होम के सामने सांवरी दूध डेयरी और सांवरी डेयरी के तबेले की जांच की। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि शिकायत मिली थी कि यहां ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन का उपयोग किया जाता है। जांच में इंजेक्शन नहीं मिला। आईटीआई के पास चौहान दूध डेयरी पर लैक्टोमीटर से दूध की जांच में रीडिंग २६ से कम मिलने पर पानी की मिलावट का खुलासा हुआ।

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दूध के सर्वाधिक नमूने हुए थे फेल
जिले भर से लिए गए 130 खानपान के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए थे। शुक्रवार को पहली बार 21 नमूनों की रिपोर्ट आई, जिसमें 12 नमूने फेल बताए गए। इनमें छह दूध, एक पनीर, एक दही, रिफाइंड ऑयल, चावल, बेसन/ब्रेड टोस्ट और बेसन शामिल हैं।

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ऑक्सिटोसिन क्या है...

ऑक्सिटोसिन पेप्टाइड हॉर्मोन है, जो इंसानों और पशुओं में पाया जाता है। उप संचालक पशु डा. केके देशमुख बताते हैं कि निडिल चुभने के एक मिनट के अंदर ही दूध उतरने लगता है।

हर सामान में मिलावट

प्रतिबंधित है...
ऑक्सिटोसिन को पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम के तहत प्रतिबंधित किया गया है। इसे दर्दनाक इंजेक्शन माना गया है। खाद्य और उपभोग पदार्थों की मिलावट अधिनियम और औषधि नियंत्रण कानून के अनुसार एक रजिस्टर्ड डॉक्टर के परचे पर ही इसकी बिक्री की जा सकती है।

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लैक्टोमीटर से डेयरियों में दूध की जांच की गई। तबेले में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन तलाशा गया। इंजेक्शन नहीं मिले। कैमिकल जांच के लिए दूध के नमूने लैब भेजे गए।
रवीश श्रीवास्तव, एसडीएम।

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