लॉकडाउन के दिन...

लॉकडाउन के दिन...

By: sandeep nayak

Published: 16 Sep 2020, 06:12 PM IST

याद बहुत आते हैं रह रह, लॉकडाउन के दिन,
सूनी सड़कें, चहके आंगन, बंद टाउन के दिन
दिनभर पड़े रहो बिस्तर में, दिनभर चाय पियो
नहीं दूसरों से कुछ लेना, अपनी लाइफ जियो,
करना धरना नहीं, मगन बस रहना अपने में,
बारह घंटे खुली आंख में, बारह सपने में

राजा मन के, राजपाट था अपना पूरा घर,
कुर्सी थी अपना सिंहासन, ताज, क्राउन के दिन
ढेरों कवि हो रहे फेसबुक पर प्रतिदिन लाइव
एक नहीं, दो नहीं, सुनाते ट्वेंटी प्लस फाइव,
टीवी बोर करे, मोबाइल खोलो, लिखो पढ़ो
बिका मीडिया, झूठी खबरें, खुद से लड़ो भिड़ो

इसी उधेड़बुन में कट जाते, दिवस प्रहर रातें,
बिस्तर, सोफे और चटाई पर डाउन के दिन।

सब्जी भाजी बंद, मयकदे पर लंबी लाइन,
लंगड़ी सरकारों की पूंजी, टैक्स और फाइन
घर जाने को निकले, ऊपर गए बहुत सारे,
असली मार लॉक की झेले, श्रमिक थके हारे

आखों में हैं, भूखे प्यासे कोटि कोटि जनगण
पीड़ा, और व्यथा में डूबे, वे सारे पल छिन।
याद बहुत आते हैं रह रह, लॉकडाइन के दिन।
- डॉ. विनोद निगम होशंगाबाद

sandeep nayak Desk/Reporting
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