माघ पूर्णिमा पर रामजी बाबा की समाधि पर उमड़ेगा सैलाब,जानें क्या है खास

सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल है रामजी बाबा का मेला

By: sandeep nayak

Published: 26 Jan 2018, 12:00 PM IST

होशंगाबाद। शहर का ऐतिहासिक रामजी बाबा मेला माघ पूर्णिमा पर रामजी बाबा की समाधि के पास लगता है। इस मेला में रामजीबाबा की समाधि पर मत्था टेकने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ता है। गुप्ता ग्राउंड में लगने वाले इस मेला के बारे में कई अनछुई बातें हैं जो कम ही लोग जानते हैं।

मेला की कुछ खास बातें
- रामजी बाबा के मेले की शुरुआत गौरी शाह बाबा को निशान चढ़ाने के बाद ही होती है।
- निशान के रूप में चादर श्रद्धालु रामजी बाबा की समाधि से ग्वाल टोली स्थित गौरी शाह बाबा की दरगाह पर ले जाते हैं इसके बाद मेला शुरु होता है।
- दोनों संत अलग-अलग धर्म के होने बाद भी अच्छे मित्र थे। उनकी दोस्ती सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल बनीं।

 

मजार और समाधि पर नजर आती है दोस्ती
दोनों संतों की दोस्ती उनकी मजार और समाधि पर भी दिखती है। समाधि पर जहां मजार का चिन्ह है वहीं मजार पर समाधि का निशान है। कहते हैं कि रामजी बाबा की समाधि के निर्माण के समय समाधि के शिखर पर छतरी अपनी जगह पर नहीं लग रही थी, तब रामजी बाबा ने पुजारी को स्वप्न में दर्शन देकर गौरीसा बाबा की दरगाह से प्रतीक के रूप में एक पत्थर लाने को कहा था, जैसे ही उस पत्थर को छतरी के साथ लगाया सब ठीक हो गया। ऐसा ही प्रतीक चिन्ह गौरी शाह बाबा की दरगाह पर रामजी बाबा की समाधि पर प्रतीक के रूप में गुंबज पर लगा है।

माघ पूर्णिमा के दिन लगता है मेला
यहां की खास बात यह है कि यह मेला माघ पूर्णिमा के दिन ही लगता है, इसमें शहर सहित अन्य राज्यों के लोग भी शामिल होते हैं।

 

माघ पूर्णिमा पर इस बार खास
इस बार माघी पूर्णिमा 31 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी। यह चंद्रग्रहण पुष्य नक्षत्र में होगा और श्लेषा नक्षत्र में समाप्त होगा। इस दिन चंद्रग्रहण भी रहेगा। 31 को राहू की अशुभ छाया चंद्रमा को ढंक देगी। भारतीय समयानुसार ग्रहण का प्रारंभ यानी स्पर्शकाल सायं 05:18 पर है। ग्रहण का मध्य काल रात्रि 07:00 बजे तथा मोक्ष काल रात्रि 08:42 पर है। काशी में ग्रहण चंद्रोदय सायं 05:35 से दिखाई देगा। इस तरह चंद्रमा पर राहू की छाया तीन घंटे 24 मिनट तक रहेगी।

धर्मशास्त्र के अनुसार चंद्रग्रहण में नौ घंटे और सूर्यग्रहण में 12 घंटे से पहले सूतक काल होता है। शास्त्रों में ग्रहण में वृद्ध, बालक और रोगी को छोड़कर अन्य के लिए भोजन आदि निषेध बताया गया है। पूर्णिमा तिथि 30 जनवरी को रात्रि 09:32 पर लगेगी, जो कि बुधवार को रात्रि 07:15 तक रहेगी। तिथि विशेष पर काशी एवं प्रयाग में गंगा स्नान के साथ सूर्य एवं श्रीहरि की आराधना के उपरांत गरीबों व ब्राह्मणों में दान करना चाहिए।

sandeep nayak Desk/Reporting
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