नसबंदी कराने के लिए पुरुषों को नहीं मना पा रहा स्वास्थ्य विभाग

परिवार नियोजन के संसाधन अपनाने में महिलाएं अव्वल, नसबंदी कराने में अब भी जागरुक

होशंगाबाद। तेजी से बढ़ती आबादी के लिए कहीं तक पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता ही दोषी है। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर पुरुष जागरूक नहीं हैं, आज भी सारा दारोमदार महिलाओं पर है। यही वजह है कि पुरुष परिवार नियोजन के संसाधन अपनाने में महिलाओं से पिछड़ रहे हैं। नतीजतन अब भी भी परिवार नियोजन कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सका है। जिनके कंधों पर इस कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है, वही लोगों को जागरूक नहीं कर पा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार जमीन पर काम करने के बजाय कागजी आंकड़ेबाजी तक ही सीमित हैं। स्वास्थ्य निदेशालय से परिवार नियोजन के विभिन्न संसाधन का जो लक्ष्य जिले को मिलता है, वह अब भी पूरा नहीं हो सका। चाहे महिला नसबंदी हो या पुरुष नसबंदी। इसके अलावा कॉपर टी, निरोध, ओरल पिल्स एवं समतुल्य नसबंदी के मामले में भी पिछड़े हुए हैं।

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पिछले तीन सालों से १०० का आंकड़ा नहीं कर पा रही पार

पुरूष नसबंदी के मामले में पिछले तीन सालों से सौ का आंकड़ा पार नहीं कर पा रहे हैं। इस साल जिलेभर में एमपीडब्ल्यू ने कुल ४६ लोगों को ही नसबंदी के लिए मोटिवेट कर सके। जबकि महिलाओं ने सीटीटी और एलटीटी के माध्यम से ५८१० सीजेरियन कराए जा सके।
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पुरुष नसबंदी के जिले में आंकड़े
२०१५-१६ - ९०

२०१६-१७ - ९१
२०१७-१८ - ६८

२०१८-१९ - २०
२०१९-२० - ४६

महिला नसबंदी
वर्ष - लक्ष्य - पूर्ति - प्रतिशत

२०१८-२०१९ - ८५०० -६२६६ - ७३.२६
२०१९-२०२० - ८५०० - ५८१० - ६८.४

इनका कहना है
स्वास्थ्य विभाग की प्रयास कर रहा है कि पुरुषों को नसबंदी के लिए अधिक से अधिक जागरुक किया जाए। इसे लेकर दो दिन पूर्व ही बैठक ली है। जिसमें एएसओ को पुरुष नसबंदी के केस अधिक से अधिक कराने के निर्देश दिए है।- डॉ.दिनेश कौशल, सीएमएचओ होशंगाबाद

amit sharma Reporting
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